जरा याद करो वो कुर्बानी
वो रामपुर तिराहा कांड ।ओर
आज है 25 वीं बरसी।


ओर आज फिर पर एक बार जहा राज्य के शहीदों का संघर्ष और कुर्बानी को सलाम किया जा रहा है वही आज के दिन को राज्य बनाने वाले राज्य आंदोलन कारी धिक्कार दिवस दिवस के रूप में मना रहे हैं ओर आज फिर एक बार देहरादून के शहीद स्थल पर बैठकर , जनगीत गा कर , राज्य आंदोलन की मूल अवधारणा के उन सवालों के भी जवाब तलाशे जा रहे हैं, जो राज्य आंदोलनकारियों की निगाहों में आज हाशिये पर चले गए हैं।


उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, पर हुवा क्या?
आखिर क्यों दोषियों को सजा आज तक नहीं मिली?
याद करो साल 1994 में देर रात को रामपुर तिराह में तत्कालीन यूपी पुलिस ने राज्य आंदोलनकारियों के साथ जो जघन्य अपराध किया, जमकर खाकी ने कहर बरपाया था, हर तरफ लाश ही लाश थी ।सवाल यही कि उनके दोषियों को आज तक सजा क्यों नहीं मिली? 9 नम्बर 2000 को राज्य का गठन हुवा ओर तब से लेकर आज तक सत्ता पर काबिज रहीं उत्तराखंड की सरकारों से ये अपेक्षा थी कि वे दोषियों को सलाखों के पीछे डालेंगे , लेकिन सरकारों के लिए ये सवाल गैरजरूरी हो गया। प्रदेश सरकार की ओर से इस पूरे मसले को सीबीआई कोर्ट में नए और प्रभावी ढंग से लड़ने की कोशिश तक नहीं हुई।


वही दूसरी तरफ राज्य बनाने वाले राज्य आंदोलनकारियों को इस सवाल का जवाब भी अभी तक नहीं मिला है कि आखिर पहाड़ की राजधानी पहाड़ क्यो नही बन पाई जबकि राज्य गठन के 19 साल पूरे 9 नंम्बर को होने जा रहे हैं,
ओर इन 19 सालो मैं उत्तराखंड को स्थायी राजधानी तक नहीं मिल पाई ।


बता दे कि राजधानी आयोग बनाने से लेकर उसकी रिपोर्ट छुपाने तक राजधानी के मसले पर गैरसैंण आज भी एक अबूझ पहेली बनकर रह गया है
दुःख के साथ कहना ओर लिखना पढ़ रहा है कि पलायन, पर्यटन और रोजगार की ठोस नीति आज तक नही बन पाई बस इन नामो से खाना पूर्ति के सिवा कुछ नही हो रहा है ओर अगर धरातल पर कुछ है तो बताये हमको राज्य को नोकरशाह , ओर इन विभागों का मंत्री, अधिकारी, छोड़िए साहब अच्छी शिक्षा भी अभी राज्य मैं कंबल मे लिपटी हुई खराटे भर रही है ।नया कुछ धरातल पर तो दूर की बात जो पुराने स्कूल कालेज है उन पर ताला लग चुका है ओर कुछ पर लगने वाला है।


आज भी हमारा पहाड़ बीमार है वहा ना डाक्टर मिलता ओर ना दवा सरकारे भले ही प्रयास करती है लेकिन इस मामले मैं उत्तराखंड के पहाड़ों मैं स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठीक होंने मे लगता है अभी 10 साल ओर लग जायेंगे वो भी तब जब सरकारों का फ़ोकस पूरी तरह इस पर ही हो सवाल बहुत है पर छोड़िए साहब
विकास राजनेताओं का हुवा पहाड़ का नही ।
आर्थिकी मजबूत नेताओ की हुई
पहाड़ की नही,
कदम कदम पर नेताओ ने की
पहाड़ के साथ छलावे की सियासत।
और इन सभी मुद्दों को लेकर
राज्य बनाने वाले राज्य आंदोलन करी आज शहादत दिवस को धिक्कार दिवस के रूप में मना रहे हैं क्योंकि ना बन पाया है उनके सपनों का उत्तराखंड। और ना 25 साल बाद भी मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को मिल पाई है सजा।

 



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