लो जी अब वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना में भी बड़ा घोटाला हो गया ख़बर हरिद्वार से है जहा राज्य के युवा बेरोजगारों के साथ इस कदर धोखाधड़ी हुई उसका खुलासा जब हुवा तो सब चोक गए आपको बता दे कि हरिद्वार के एक वकील ने आरटीआई में जानकारी मांगी ओर फिर हुवा खुलासा । आपको बता दे कि उत्तराखंड के बेरोजगारों को स्वरोजगार के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पयर्टन स्वरोजगार योजना में सरकारी धन की जमकर लूट हो चुकी है।
इस योजना के तहत में साल 2003 से साल 2011 तक कुल 252 लोगों को हरिद्वार में लोन दिया गया था. आरटीआई में मिली जानकारी से खुलासा हुआ है कि इस योजना में बेरोजगारों के बजाय नेताओं, विधायकों और आयकरदाताओं धनकुबेरों द्वारा लोन लिया गया. लोन लेने वालों में ज्यादातर बीजेपी के नेता और विधायक शामिल हैं.
दरअसल, इस योजना में सरकार द्वारा कुल लोन की राशि की 25 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है और ब्याज दर भी बहुत मामूली है. इस योजना में सरकारी धन की लूट के खिलाफ कोर्ट में योजना में लोन देने के लिए जिम्मेदार हरिद्वार के कई जिलाधिकारियों सहित लगभग एक दर्जन अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज कर कारवाई करने के आदेश दिए हैं.
आपको बता दें की उत्तराखंड राज्य बनने के बाद नारायणदत्त तिवारी सरकार के कार्यकाल में राज्य के बेरोजगारों के लिए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पयर्टन स्वरोजगार योजना शुरू की गई थी, जिसमें राज्य में पयर्टन को बढ़ावा देने के लिए बेरोजगारों को पयर्टन से संबंधित व्यवसाय के लिए लोन दिया जाना था. इस योजना में बहुत ही कम ब्याज दर रखी गई थी और लोन की राशि के 25 प्रतिशत राशि लाभार्थी को सब्सिडी के रूप में मिलनी थी. इसी सब्सिडी की राशि के चक्कर में इस योजना में अधिकारियों और नेताओं ने जमकर लूट मचाई.
वही साल 2003 से लेकर साल 2011 तक कांग्रेस और भाजपा के शासनकाल में कुल 252 लोगों ने लोन लिया. हैरानी की बात ये है कि इस योजना में बेरोजगार युवकों की बजाय बड़े व्यवसायियों और विधायकों ने इस योजना में लोन ले लिए. रुड़की से वर्तमान में बीजेपी विधायक तत्कालीन कांग्रेस विधायक प्रदीप बत्रा करोड़पति हैं, मगर उन्होंने अपनी पत्नी को गरीब और बेरोजगार दर्शाकर 10 लाख रुपये का लोन ले लिया.

इसी तरह यशवीर चौधरी ने अपने बेटे के लिए लाखों का लोन लिया. भाजपा नेता और राज्य के एक ताकतवर मंत्री की करीबी हरिद्वार में वर्तमान में उपभोक्ता फोरम की सदस्य अंजना चड्ढा ने भी 22 लाख का लोन ले लिया, जबकि उनके पति का होटल का और नामी कंपनियों की एजेंसी का कारोबार है.
252 लाभार्थियों की सूची में ज्यादातर नाम नेताओं, विधायकों और आयकर दाता बड़े-बड़े लोगों के नाम शामिल हैं. ये स्थिति तब है जब इस योजना में पात्रता की अनिवार्य शर्त बेरोजगार होना और मूल रूप से उत्तराखंड का निवासी होना जरूरी है, मगर जिन लोगों ने लोन लिया है उनमें कई तो यूपी के निवासी है और बड़े पैसे वाले प्रभावशाली लोग हैं.

वकील अरुण भदौरिया ने कुछ साल पहले इस योजना की आरटीआई से जानकारी मांगी थी, इस संबंध में जब जानकारी मिली तो हैरान करने वाला करोड़ों का खुलासा हुआ. करोड़ों रुपये के लोन में करोड़ों की सब्सिडी के लिए तमाम नियम कानून ताक पर रख दिये गए. इस योजना में पात्र लोगों को चुनने के लिए बनी समिति में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, पर्यटन अधिकारी सहित अन्य कई अधिकारी शामिल हैं. यही समिति प्राप्त आवेदनों पर विचार कर लोन के लिए पात्र लोगों को चुनती थी.

वकील अरुण भदौरिया ने साल 2003 से लेकर साल 2011 तक हरिद्वार में तैनात रहे इन सभी अधिकारियों को भी योजना की बंदरबांट का दोषी बताते हुए, इन सब के खिलाफ हरिद्वार कोर्ट में मुकदमा कर रिपोर्ट दर्ज करने और इन सब से सरकारी धन की रिकवरी करने की मांग की थी. हरिद्वार के सिविल जज ने भदौरिया की याचिका पर इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर करवाई के आदेश दिए हैं.





LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here