उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने आज मुंबई मे उपचार करा रहे उत्तराखंड से राज्यसभा सदस्य पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी से कुशल क्षेम पूछी एवं ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा है कि श्री बलूनी शीघ्र स्वस्थ हो ।
इस अवसर पर अग्रवाल ने कहा है कि पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी जी शीघ्र स्वस्थ होकर हम सब लोगों के बीच में पुनः सक्रिय राजनीति एवं समाज सेवा में अपना योगदान देंगे l


वही भेंट मुलाकात के दौरान पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने देहरादून में संपन्न हुए पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की सफलता पर उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल को बधाई भी दी l
वही अग्रवाल ने पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी से प्रदेश के विकास से संबंधित विभिन्न विषयों पर चर्चा वार्ता कीl
अंत में श्री अग्रवाल ने ईश्वर से श्री अनिल बलूनी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की l
आपको बता दे कि
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चन्द्र अग्रवाल पिछले साल 8 नवम्बर को पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी के पैतृक गांव नकोट भी पहुँचे थे जो जिला पौड़ी गढ़वाल मैं है यहा उन्होंने इगास का पर्व धूम धाम से मनाया था
उस दिन भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने इगास मनाने के लिए प्रदेश के ऐसे परिवारों से अपील की थी जो कि गांव छोड़कर शहरों में जाकर बस गए हैं। उन्होंने लोगों से अपने गांवों में आकर इगास पर्व मनाने को कहा था


ओर वे राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी का संदेश लेकर उनके पैतृक गांव कंडवालस्युं पहुचे थे।
उन्होंने इस दौरान सांसद पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी के इस अभियान से जुड़ने के लिए राज्य के नौजवानों से भी अपील की थी
सांसद बलूनी का संदेश यह है कि  राज्य की परंपराओं और संस्कृति का संरक्षण जरूरी है। पलायन के कारण उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों की सिमटती विधानसभा सीटों की चिंता के समाधान को लेकर उन्होंने अपना वोट अपने गांव अभियान चलाया। इसी के तहत उन्होंने उत्तराखंड के प्रमुख लोक पर्व इगास या इकाशी बग्वाल को मनाने के लिए देश-विदेश में रह रहे प्रवासी उत्तराखंडियों का आह्वान किया।
इस अभियान मैं भी उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल भी पहाड़ पुत्र बलूनी के पैतृक गांव पहुंचें थे और इगास पर्व मनाया था उस दिन अग्रवाल ने कहा कि इगास-बग्वाल पर्व हम सभी के जीवन में नया प्रकाश लेकर आए और हमारा प्रदेश सदा सुख समृद्धि और सौभाग्य से आलोकित रहे।


उन्होंने अपने संदेश में कहा था कि उत्तराखंड की सभ्यता, संस्कृति और पर्व त्योहार को मनाने का तरीका अपने आप में अनूठा है। उन्होंने सभी से पर्व को मनाए जाने का आह्वान किया है जिससे कि आज की पीढ़ी हमारी संस्कृति को समझ और जान सके एवं हमारी लुप्त होती जा रही संस्कृति को बचाए जा सके।


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