हमारे पहाड़ की नारी मजबूत ही नही पहाड़ जैसे दर्द को सहकर भी चुप रहती है कोई शिकायत उनकी नही रहती क्योकि वे जानती है कि पहाड़ मे पहाड़ जैसी चुनोतियो रहती है जिससे वो बखूबी निभाती भी है मगर जब बात एक औरत के मंगल सूत्र की हो जिसके वापस मिलने की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी हो तब इस महिला ने उठा डाला ये खतरनाक कदम। आपको बता दे कि महिला द्वारा स्वर्णकार को बनाने के लिए दिया गया दो तोले का मंगलसूत्र वापस मिलने की उम्मीद खो चुकी महिला ने सदमे में खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। ओर इससे वह लगभग 40 फीसदी तक झुलस गई है। वही उनके परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। जानकारी अनुसार जिस स्वर्णकार को उसने मंगलसूत्र बनाने के लिए दिया था, वह तेजाब हमले के मामले में जेल में बंद है। ये ख़बर कनालीछीना विकास खंड के एक एक गांव की है जहां 24 वर्षीय महिला ने रविवार रात मिट्टी का तेल छिड़क कर खुद पर आग लगा ली। उसी समय परिजनो ने 108 एंबुलेंस से उसे अस्पताल लाए। यहां एसआई एचआर चंदेल ने अस्पताल पहुंचकर पूछताछ की। महिला के पति ने बताया कि 25 दिन पूर्व उन्होंने दो तोले के मंगलसूत्र में एक तोला और मिलाने के लिए इसे छड़नदेव के स्वर्णकार सुरेश वर्मा को दिया था। इस दौरान स्वर्णकार तेजाब हमले में जेल चला गया। ओर मंगलसूत्र लौटाने को लेकर स्वर्णकार के परिजनों से पूछने पर उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। इससे बात से उनकी पत्नी परेशान हो गई। तब मंगलसूत्र वापस मिलने की उम्मीद खो बैठी उनकी पत्नी ने रविवार रात खुद पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। इससे उसका गला, दोनों हाथ और चेहरा झुलस गया है। एसआई एचआर चंदेल ने बताया कि चेहरा झुलसने से महिला बोलने की हालत में नहीं है।
बहराल अस्पताल मे उनका इलाज चल रहा है। लेकिन ये दुःख की बात है कि एक 25 साल की महिला इतना बड़ा कदम उठाएगी। की अपनी जान देने की कोशिश करेगी ये ठीक नही हम मानते है कि आज के हिस्साब से दो तोला सोने की कीमत क्या होती है। पर उसके पीछे ज़िन्दगी नही छोड़ी जा सकती । हम मानते है ओर कहते है एक सुहागन की भावना और उनकी आन बाम शान है मंगल सूत्र ।उनकें सुहाग की निशांनी है मंगल सूत्र अगर कोई इस तरह से भी सोचे ओर मंगलसूत्र वापस ना मिलने की उम्मीद से इतना बड़ा कदम उठाए की अपनी ज़िंदगी ही ख़त्म करने की सोचे ये ओर गलत है। बहराल कारण जो भी रहे होंगे ये तो ये महिला जब ठीक हो जाएगी तब ही बता पाएगी की इन्होंने इतना बड़ा कदम ओर क्या सोच कर उठाया होगा। ।पर हम तो यही कहते है कि जब पति पत्नी ठीक रहे स्वस्थ रहे।उनका पूरा परिवार ठीक रहे तो कोई भी मूल्य वान वस्तु दोबारा जोड़ी है सकती है। ओर किसी भी तरह की भावनाओं में या दबाव में बहकर इस प्रकार के कदम नही उठाने चहिये बल्कि शांति और सयम से पूरे परिवार को मिल बैठकर समस्या का हल तलाशने की कोशिश होनी चईये। आप सबकी जिंदगी अनमोल है उन सबके लिए जो आप को अपना आदर्श मानते है, जो आप से प्यार करते है, आपके वो परिवार के लोग , परिजन जन कभी ये जताते नही की आप उनके लिए क्या हो। ओर वो आपको कितना प्यार करते है पर जब आप इस प्रकार के कदम उठाते हो ओर जब कोई ज़िन्दगी को अलविदा कह जाता है तो वे भी पूरी ज़िंदगी भर के लिए टूट जाते है ।
बस हम तो यहीं अपील करते है।कि कोई भी किसी भी हालत में आत्महत्या जैसे कदम ना उठाये।



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