क्या उत्तराखंड से शौर्य डोभाल लड़ेंगे लोकसभा का रण

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के पुत्र शौर्य डोभाल का उत्तराखंड दौरा राजनीतिक पारी खेलने के लिए एक लांचिंग पैड़ की तरह देखा जा रहा है। भले ही शौर्य डोभाल खुद इसे उनकी सामाजिक ज़िम्दारी से जड़ा बताए। लेकिन सही मायनों में ये उनके राजनीतिक जीवन की शुरूआत का शैशव काल है जिसमें वो राजनीति के गुर सीख रहे हैं।

लोकसभा की रणभेरी बजने में यूं तो अभी काफी वक्त है लेकिन लगता है बीजेपी अभी से अपनी रणनीति में जुट गई है। यूं तो शौर्य डोभाल उत्तराखंड से ही ताल्लुक रखते है लेकिन उनका जनता के बीच जनसंवाद उनकी राजनीतिक पारी से पहले तैयारी का प्लान तो दिखता ही है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि फूलपुर और गोरखपुर में अपने किले पर लग रही सेंध को देखते हुए बीजेपी अब अपनी रणनीति पर सक्रिय हो गई है।शौर्य डोभाल कहते है कि ‘मुझे जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी उसका बखूबी निर्वहन करूंगा इस बात के संकेत है कि 2019 के रण में उनका चेहरा लोगों के बीच होगा और बीजेपी उन्हें एक युवा के तौर पर लोकसभा के रण में उतारेगी। उनका चेहरा इसलिए भी बीजेपी के लिए खास है क्योंकि उनके पिता और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का पद और उनके काम की कायल केंद्र सरकार से लेकर पूरी दुनिया है। बीजेपी की कोशिश अजीत डोभाल के सहारे शौर्य डोभाल की राजनीति वैतरणी पार कराने का है। सूत्र बताते है कि जनरल खंडूड़ी की जगह अब पौड़ी लोकसभा सीट से बीजेपी शौर्य डोभाल को टिकट देने का मन बना रही है यदि सबकुछ ठीकठाक रहा तो क्योंकि इसी पौड़ी लोकसभा सीट पर सतपाल महाराज अपनी पत्नी अमृता रावत के लिए भी टिकट मांग सकते हैं और निशंक भी पौड़ी से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं तो तीसरी तरफ निम के प्रिंसिपल कर्नल कोठियाल भी चाहते है कि पौड़ी लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर वो मैदान में उतरे।

अब देखना ये होगा कि बीजेपी हाईकमान किस को फाइनल करता है। जिस प्रकार राज्यसभा सीट के लिए बीजेपी हाईकमान ने अनिल बलूनी को चुना उसे देखकर जो समझ में आ रहा है वो संकेत यही है कि बीजेपी की पहली पसंद युवा ही है और ऐसे में शौर्य डोभाल मज़बूत दावेदार है टिकट के। लेकिन उससे भी बड़ा यक्ष प्रशन ये है कि इतने कद्दावर नेताओं के बीच क्या बीजेपी ये प्रयोग कर पाएगी भी या नहीं।

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