एक्सक्लूसिव:- हाईकोर्ट में इस बड़े मामले में फंस गई सरकार?

जनहित याचिका पर हो रही है सुनवाई, पूर्व मुख्यमंत्रियों से जुड़ा है मामला

देहरादून। भ्रष्टाचार को लेकर पहले दिन से ही जीरो टालरेंस लेकर चल रही सरकार आम जनता में लगातार लोकप्रिय हो रही है। जनता को त्रिवेन्द्र सरकार के तमाम फैसले खूब भा रहे हैं। जनहित से जुड़े फैसलों पर सरकार भी तेजी से फैसले ले रही है। जिसका असर दिखाई भी दे रहा है राज्य में विकास का रथ तेजी से दौड़ रहा है। लेकिन इन्ही अच्छे फैसलों के बीच अपने एक फैसले से सरकार कटघरे में खड़ी होती हुई दिखाई दे रही है। जी हां मामला है पूर्व मुख्यमंत्रियों से जुड़ा हुआ। दरसअल पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवास व भत्ते माफ करने के मामले में सरकार फंसती हुई दिखाई दे रही है।

आपको बता दें कि सरकार की ओर से हाई कोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान शपथ पत्र देकर कैबिनेट में बकाया किराया माफ करने का उल्लेख किया गया था, जबकि सोमवार को पेश नए हलफनामे में इसका उल्लेख ही नहीं है। अब याचिकाकर्ता ने सरकार पर झूठा हलफनामा दाखिल करने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में इसकी शिकायत करने की बात कही है। रूरल एनटाइटिलमेंट एंड लिटिगेशन केंद्र देहरादून के अध्यक्ष अवधेश कौशल ने जनहित याचिका दायर कर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास खाली करने व अब तक का किराया बाजार दर से वसूलने की मांग की थी।

याचिकाकर्ता अवधेश कौशल ने पांच पूर्व मुख्यमंत्रियों पर 13 करोड़ बकाया होने का आंकलन किया था। 13 फरवरी को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ने बताया कि कैबिनेट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों पर दो करोड़ 85 लाख बकाया माफ करने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने शपथ पत्र के साथ कैबिनेट फैसले की प्रति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति रमेश खुल्बे की खंडपीठ में सुनवाई होनी थी, जो अब मंगलवार को होगी, मगर इस दौरान सरकार की ओर से हलफनामा पेश किया गया। इसमें कहा गया है कि कैबिनेट ने बकाया किराया माफ करने का निर्णय नहीं लिया है, बल्कि उच्च न्यायालय से इसके लिए आग्रह करने का निर्णय लिया है। साफ है कि सरकार ने गेंद पूरी तरह कोर्ट के पाले में डाल दी है।

इधर, याचिकाकर्ता अवधेश कौशल का कहना है कि एक ओर बजट के अभाव में देश की सेना का आधुनिकीकरण नहीं हो रहा है। सेना के वाहन बेहद खराब हालत में हैं, मगर सरकार पूर्व मुख्यमंत्रियों पर बकाया माफ कर रही है।



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