उत्तराखंण्ड मे 4 नवजात की मौत एक ही अस्पताल मे दहशत मे हल्द्वानी

इस समय उत्तराखंड़ से एक बडी ख़बर आ रही है जहाँ सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में 4 नवजात बच्चों की मौत हो चुकी है और पूरे स्वास्थ्य महकमे में मचा है हड़कंप मच गया है
आपको बता से ख़बर के अनुसाए नवजात बच्चों के परिजनो ने जमकर हंगामा काटा ओर अस्पताल पर आरोप लगाया
ये पूरी दुःखद ख़बर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल से आई है जहाँ डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से ये अस्पताल एक बार फिर से सुर्खियों पर है। आपको बता दे कि ये पूरा मामला जच्चा बच्चा वार्ड से जुड़ा हुआ है, जानकारी अनुसार प्रसव के दौरान देर रात 4 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। वहीं परिजनों ने इस मामले में डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा भी किया। इस मामले के सामने आने के बाद पूरे स्वाथ्य महकमे में पूरी तसरह हड़कंप मचा हुआ है।

दरसल मे बुधवार को  हल्द्वानी और उसके आसपास के क्षेत्रों की महिलाएं प्रसव के लिए सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती थी। जिनमें से देर रात 4 महिलाओं के प्रसव के दौरान नवजात शिशुओं की मौत हो गई, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर उपचार में लापरवाही करने और मरीजों पर ध्यान ना देने का आरोप लगया।   जानकारी अनुसार कोटाबाग निवासी महेश कांडपाल, खटीमा निवासी संजय सिंह और हल्दूचौड़ निवासी भुवन सिंह अपनी पत्नी का प्रसव कराने के लिए अस्पताल में पहुंचे थे। देर रात सुरक्षित प्रसव होने के बावजूद एक- एक कर 4 बच्चों की मौत हो गई। गुस्साए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। वहीं अस्पताल के प्राचार्य चंद्र प्रकाश भैसोड़ा डॉक्टरों के बचाव में कुछ और ही सफाई दे रहे हैं। बहराल बात जो भी पर पूरे मामले मे निष्पक्ष जांच होनी चाइये ।साथ ही आपको ये भी बता दे कि ये घटना इस अस्पताल मे कोई पहली बाए नह हो रही है बल्कि इससे पहले भी यहा कही प्रकार की घटनाएं इर अस्पताल प्रशासन पर आरोप लग चुके है

बोलता है उत्तराखंड की आखिर सुशीला तिवाड़ी अस्पताल हर बार विवादो मे क्यो रहता है ? कैसे हो गई 24 घण्टे मे ही चार नवजात शिशुओं की मौत आक्रोशित परिजनों का जमकर हंगामा यु ही नही बरपा
अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही से बच्चों की मौत होने का आरोप भी खूब परिजनों ने लगाया । अस्पताल प्रशासन क्यो इस मामले में चुप है।अब मायूस परिजन अब बच्चों के शवों को लेकर लौटे अपने घरों को
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर्स डयूटी करने बजाय रात भर सोते रहते है। जब बच्चों की मौत हुई तब भी कोई डॉक्टर वार्ड में मौजूद नहीं था। डॉक्टर को बुलाने के लिए कहने पर उल्टा उनको धमकियां दी जा रही हैं। तीन मृत शिशुओं के परिजन अस्पताल प्रशासन के खीलाफ जमकर बोले।
उनका आरोप था कि मृत बच्चों को कूड़ेदान में डाल दिया गया था। जो कही सवाल अस्पताल प्रशासन पर खड़े करता है

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