सरकारी शिक्षा पहाड़ में ही नहीं, मैदान में भी बेहाल

उत्तराखण्ड में शिक्षा की स्थिति क्या है ये सभी जानते हैं पहाड़ो पर शिक्षा के हाल बुरे हैं ही लेकिन मैदानी इलाकों के हाल भी ज्यादा ठीक नहीं हैं…. गढ़वाल मंडल के पहाड़ी जिलों के अलावा देहरादून हरिद्वार में 1365 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां छात्र संख्या दस से कम है। आपको बता दें इस मामले में सबसे खराब स्थिति पौड़ी जिले की है। पौड़ी जिले के 540 सरकार प्राथमिक विद्यालय संकट में हैं तो वहीं टिहरी में भी 304 ऐसे विद्यालय हैं जहां छात्र संख्या दस से कम है…. और चमोली जिले के भी यही हाल है।

नयां सत्र शुरू होते ही स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए जनजागरूकता के अभियान भी चल पड़ते हैं इसके अलावा स्कूलों में कई तरह की योजनाएं हैं जिन्हें संचालित किया जा रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत तो ये है कि सरकार की ये कोशिशें परवान नहीं चढ़ पा रही है। आज पहाड़ों में सबसे बड़ी समस्या पलायन है और इसी के चलते कई गांव जनशून्य हो रहे हैं तो वहीं स्कूलों से भी बच्चों की संख्या लागातार कम होती जा रही है।

 

दस से कम छात्र संख्या वाले स्कूल

चमोली     205

रूद्रप्रयाग   75

पौड़ी       540

टिहरी      304

उत्तरकाशी  117

देहरादून    122

हरिद्वार    02

वहीं अगर स्थानीय लोगों की माने तो उनका कहना है कि स्कूलों की इस स्थिति के जिम्मेदार सरकार और विभाग दोनों ही हैं। सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता पर हर बार सवाल उठते रहते हैं। स्कूलों की इस स्थिति के चलते पहाड़ों से पलायन हो रहा है या फिर पलायन के चलते स्कूलों की ये स्थित हो रही है दोनों ही बातें लगभग एक सी हैं। लेकिन जो भी हो सरकारी स्कूलों पर अगर ध्यान नहीं दिया गया या फिर सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया तो हो सकता है आने वाले समय में इनके हाल और भी ज्यादा बेहाल हो जाएं।

 

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