उत्तराखंण्ड मे 2000 के नकली नोटों का जाल 3 लोग गिरफ्तार! पुछताझ जारी

ख़बर उत्तराखंड से है जहा पुलिस ने दो हजार रुपये के 47 नकली नोटों के साथ अंतरराज्यीय गिरोह के तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है इन पकड़े गए आरोपियों से आईबी, एलआईयू और स्पेशल ब्रांच की खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी लगातार पूछताछ कर रहे हैं।
आपको बता दे कि कोतवाली में सोमवार को पत्रकार वार्ता में एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र ने बताया कि पुलिस को कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि क्षेत्र में अंतरराज्यीय गिरोह बिहार और पश्चिमी बंगाल से नकली करेंसी लाकर बाजार में खपा रहा है।
जिसके चलते रविवार को देर शाम को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर जसपुर के सूत मिल पुलिस चौकी के पास अंग्रेजी शराब की दुकान में नकली नोट चलाते तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनसे दो-दो हजार के 47 नकली नोट बरामद पुलिस ने किये

आपको बता दे कि गिरफ्तार लोगों ने अपना नाम विक्रम राय मूल निवासी बेतिया जिला चंपारण (बिहार) और हाल निवासी हेमपुर इस्माइल (काशीपुर), सिकंदर साहनी निवासी ग्राम दक्षिण तलुवा थाना नौतन, बेतिया (बिहार) और मनीष वाजपेयी निवासी थाना बिसवां सीतापुर (यूपी) बताया।
पुलिस की गिरफ्त में आया विक्रम राय अंतरराज्यीय गिरोहा का स्थानीय लीडर है। उसकी दो शादियां हैं। वह आठ वर्ष से हेमपुर इस्माइल में दूसरी पत्नी के साथ रह रहा है। विक्रम अपने दोनों साथियों के साथ बिहार और पश्चिमी बंगाल से 60 प्रतिशत के फायदे पर नकली करेंसी लाकर यहां चलाता है। एएसपी ने आशंका जताई कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने के लिए यह नकली करेंसी देश में सप्लाई की जा रही है।
जानकारी अनुसार
आरोपियों से बरामद नकली करेंसी को बड़े गौर से देखने पर ही पता चल सकता है कि करेंसी नकली है। नकली करेंसी के रिबन पर आरबीआई नहीं लिखा है। पेपर क्वालिटी भी हल्की है। नोट पर बने बॉर्डर भी सही अनुपात में नहीं हैं। धंधेबाज नकली करेंसी को शराब की दुकानों, ग्रामीण क्षेत्र की किराना, दैनिक आवश्यक वस्तुओं की दुकानों पर चलाते थे।

यही नही आपको बता दे कि विक्रम राय, उसके बेटे राहुल और पत्नी शिवा को आईटीआई थाना काशीपुर की पुलिस ने साल 2012 में भी नकली नोटों के साथ गिरफ्तार जेल भेजा था। वहीं, आरोपी सिकंदर साहनी को थाना पठानकोट पंजाब और मनीष को थाना विस्बा सीतापुर पुलिस ने नकली नोटों के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
जानकारी अनुसार आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे छह वर्ष से अधिक समय से नकली नोट चला रहे हैं। विक्रम राय ने बताया कि वर्ष 2011 में गया (बिहार) से काशीपुर आते समय ट्रेन में एक व्यक्ति से उसकी मुलाकात हुई थी। उसी ने ही उसे लालच देकर इस काम में लगाया था। बहराल इससे पहले पहाड़ो मे भी नकली नोटों के साथ कुछ लोगो को गिरफ्तार किया जा चुका है और अब ये मामला जो साफ़ सकेंत दे रहा है कि उत्तराखंड़ मे 2000 हज़ार या 500 के नकली नोट बाज़ार मे होंगे! इसलिए इन नकली नोटों को चलाने वाले से आप रहे सतर्क ओर सावधान

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