उस जिले के 3 हज़ार लोग आज खुश है वो भी 70 साल बाद

 

बोलता उत्तराखंड़ आज आंखों से आंसू बहाए तो कोन से वाले ? दुःख वाले या सुखद वाले या फिर गुस्से वाले भाई जी ख़बर ही वो है कि ना आज ये कह सकता हूँ कि खुश बहुत हूँ, ना ये बोल सकता हूँ कि दुखी हूँ आज मै, ओर ना ये कह सकता हूँ कि दर्द नही है दिल मे, क्योंकि बात ही कुछ यु है कि मेरे पहाड़ उत्तरकाशी जिले की जनता उजाले की किरण को 70 साल से तलाश रही थी इस बीच कही लोग ओर बुजुर्ग बिजली का इंतज़ार करते करते दुनिया को अलविदा भी कह गए पर ये बिजली ना पहुची थी। आप समझ सकते है कि आजकल आधुनिक जीवन में बिजली के उजाले के बिना जिंदगी की कल्पना अधूरी सी लगती है। पर ऊपर वाले कि किर्पा है कि उत्तरकाशी में चार गांवों में बिजली की रोशनी की कल्पना 71 साल बाद साकार हो ही गई। आपको बता दे कि इन गांवों के लोग पहली बार बिजली की जगमग के बीच स्वतंत्रता दिवस मना रहे है।  
बात उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से 215 किलोमीटर दूर हर की दून घाटी पड़ती है। इस घाटी में ओसला, गंगाड़, पवाणी, धारकोट गांव पड़ते हैं। ओर यही से सड़क मार्ग तालुका से इन गांवों तक पहुंचने के लिए लगभग 20 से 25 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है।

इसके साथ ही गोविंद वन्यजीव विहार क्षेत्र में आने वाले इन गांवों को जोड़ने के लिए सड़क स्वीकृत नहीं है। क्योंकि गाँव वाले है ना इनकी कोन सुने? इसके साथ ही ये गांव संचार सेवा से भी पूरी तरह से कटे हुए हैं। लेकिन, करीब तीन हजार की आबादी वाले इन गांवों में आजादी के 72 वर्ष बाद बिजली की रोशनी पहुंची है।  जो बोलता उत्तराखंड के लिए खुशी की बात है ओर आंखों में पानी भी । 
कहानी सुनो जरा बीते एक अगस्त को चारों गांवों में बिजली की आपूर्ति सुचारु हुई, तो इन चारों गांवों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। यह बिजली भी इन ग्रामीणों को गांव में ही बनी 100 किलोवाट की चिलुड़गाड लघु जलविद्युत परियोजना से मिल रही है। चिलुड़गाड लघु जलविद्युत परियोजना समिति पावणी के अध्यक्ष बचन पंवार ने कहा कि वर्ष 2010-2011 में चिलुड़गाड लघु जलविद्युत परियोजना का काम शुरू हुआ, लेकिन उरेडा की लापरवाही के कारण परियोजना का काम बीच में बंद रहा, जिसके बाद ग्रामीण शासन में पहुंचे थे।
आपको बता दे कि साल 2015 से परियोजना पर निर्माण फिर से शुरू हुआ। बीते अप्रैल में परियोजना की दो टरबाइन में से 50 किलोवाट की एक टरबाइन शुरू हुई। दूसरी टरबाइन का काम बीते एक अगस्त को पूरा हुआ और दोनों टरबाइनों से उत्पादन शुरू हुआ, जिससे चारों गांवों में बिजली की आपूर्ति सुचारु हो गई है।
बोलता उत्तराखंड़ बोल रहा है कि जानकारी अनुसार इस परियोजना के संचालन के लिए चारों गांवों से एक-एक युवक को प्रशिक्षण के लिए आइआइटी रुड़की भेज रहे हैं, जिसके बाद ये युवक ही इस परियोजना का संचालन करेंगे। बिजली की दर भी समिति तय करेगी, जिससे इन युवाओं का मानदेय निकल सके।

 

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