उफ़ ये किशोर जी के बयान आज समझ से बहार!!

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काग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके किशोर उपाध्याय जो आजकल टिहरी मै खूब पसीना बहा रहे है क्योंकि उनको टिहरी से लोकसभा के मैदान मे जो उतरना है वो बात अलग है कि टिकट किसको मिलता है खेर आजकल ये महोदय डबल इज़न की सरकार को जमकर कोस रहे है किशोर कहते है कि जंगलों पर प्रदेश सरकार ने कर रखा है कब्जा भाई ये बात समझ नही आ रही है कि क्या इन जगलो मे त्रिवेन्द्र सरकार ने अभी आते ही कब्ज़ा किया है या पहले से ये कब्ज़ा चल रहा है ये बात किशोर ने साफ नही की काग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कहते है कि लोगों को पहाड़ी होने का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रदेश सरकार ने यहां के जंगलों पर पूरी तरह से कब्जा कर रखा है। जिस कारण गांव से लोग पलायन कर रहे हैं। किशोर उपाध्याय ने कहा कि भले ही वन कानून 2006 में बन गया था। लेकिन आज तक वह सही प्रकार से लागू नहीं हो पाया है। वनों को बचाने के लिए तिलाड़ी में सैकड़ों लोग मारे गए। गांव में जलने वाले चूल्हों की लकड़ी तथा मिट्टी,के साथ खेती के संसाधनों पर प्रदेश सरकार ने पूरी तहर से कब्जा किया हुआ है। पहले जंगल की खाली जमीन लोगों को कास्त के लिए मिलती थी,जिन पर ग्रामीण छानियां बनाते थे,लेकिन आज सरकार ने उस पर पूरी तहर से कब्जा किया हुआ है। जिस कारण गांव के गांव खाली हो रहे हैं। उपाध्याय ने कहा कि ये प्रदेश के लोगों को केन्द्र की नियमावली में गिरजन घोषित कर आरक्षण देने, एक यूनिट बनाकर लोगों को बजरी, रोड़ी आदि निशुल्क की मांग को लेकर वे पीएम से मिलने के लिए योग दिवस पर गए, लेकिन पीएम उनसे नहीं मिले। ओर अब प्रदेश के लोगों को इन अधिकारों को दिलाने के लिए वो राष्ट्रपति से गुहार लगाएंगे जिससे कि प्रदेश के लोगों को उनका अधिकार मिल सके। अब बोलता है उत्तराखंड की किशोर जी आप के सवाल ठीक होते है आप राज्य की चिंता करते है पर सवाल ये खड़ा होता है की जब आपके पास पावर थी आपकी अपनी सरकार थी तब आपने क्या किया चलो मान लिया सरकार ने कुछ नही किया पर आप सगठन के मुखिया थे और सगठन से सरकार होती है ना कि सरकार से सगठन तब आप चुप क्यों थे हा अगर आपकी कही आवाज़ सुनाई दी तो हरीश रावत ओर आपके बीच चल रहे शब्दो के मतभेद कहे या दिल के या फिर दिमाग के बस यही चलता था हरीश रावत जो बोले आप उसका उल्टा बोलते थे तब क्यो नही आपने जंगल की बात की अपनी सरकार से तब आपके हाथ मे सब कुछ था पर उस दौरान गलत हरीश रावत थे आपकी नजर में या हरीश रावत की नज़र में आप बात जो भी रही हो पर खामियाजा जनता ने भोगा क्योकि आप जो आज माग कर रहे हो इन बातों पर ज्यादा बल तब मिलता जब आप की सरकार थी पर तब आपस मे शब्दो से लड़ने से फुरसत कहा थी और आज भी यही हाल है सूत्र बोलते है कि आपकी आज प्रीतम सिंह से बिल्कुल भी नही बनती अब राज्य की राजनीति को समझने वाले लोग ओर नेताओ के अंदर की बात को जानने वाले लोग यही कह रहै है कि किशोर की बात सही है पर जब उनके हाथ मे सबकुछ था तब उन्होंने क्या किया और अगर किशोर सही है तो खुलकर बोले कि उस दौरान हरीश सरकार उनकी सुनती नही थी ये हरीश रावत बोले कि किशोर किशोर ही रह गये क्योंकि अब जब जब वो लोग सवाल खड़े करेगे डबल इज़न की सरकार पर तो उनसे जरूर पूछा जाएगा कि जब आप थे तब क्या हुवा ओर क्या किया आपने ? खेर गलतिया सब से होती है किशोर हो या हरीश रावत या आज फिर प्रीतम सिंह या वो नेत्री जिनका नाम इंदिरा ह्रदयेश है इनको तो हल्द्वानी के इलावा कुछ दिखता ही नही ओर प्रीतम सिंह पर दाग लगा है कि वो सिर्फ चकराता तक ही है जबकि  प्रीतम  पूरे राज्य  के नेता है   बाकी उनको कोन जाने बस जब तक जो जो कुर्सी पर जो है उसको नमस्ते यही कर रहे है काग्रेसी ओर  किशोर जी अपनी अगली जंग लड़ने के लिए तैयार है बस इनको कब कहा पर क्या बोलना है मतबल सही समय पर सही काम अगर कर ले बोल ले तो किशोर सब पर भारी सबीत होंगे आने वाले समय पर क्योकि सर हवा हर रोज एक ही दिशा से नही बहती है ये वक़्त है जनाब बदलता रहता है

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