आज कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन के बीच प्रवासियों और गरीबों की आवाज उठाने के लिए कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर स्पीक अप इंडिया कैंपेन चलाई। ये कैंपेन 11 बजे से शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चली। इस बीच सोनिया गांधी ने कहा कि जरूरतमंदों की मदद के लिए सरकार को अपना खजाना खोलना चाहिए।


कांग्रेस का कहना है कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन से प्रवासी, छोटे उद्योग और खुदरा व्यापारी परेशान हैं। काम-धंधे ठप होने से बहुत से लोगों के बेरोजगार होने का रिस्क बढ़ गया है। किसी भी आपदा में सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब लोग होते हैं। ऐसे लोगों के लिए ही स्पीक अप इंडिया जैसे कैंपेन जरूरी हैं।
‘गरीब परिवारों को 10 हजार रुपए की मदद तुरंत मिले’
कांग्रेस की मांग है कि प्रवासियों से किराया लिए बिना सरकार उन्हें सम्मान के साथ घर पहुंचाए। हर गरीब परिवार को 6 महीने तक 7 हजार 500 रुपए दिए जाएं, लेकिन उन्हें 10 हजार की मदद तुरंत मिलनी चाहिए। छोटे उद्योगों को भी जल्द से जल्द मदद की जरूरत है
साथ ही मनरेगा के तहत रोजगार गारंटी बढ़ाकर 200 दिन करनी चाहिए।


तो वही उत्तराखंड मैं भी
उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में कांग्रेसजनों ने स्पीक अप इण्डिया कार्यक्रम के तहत फेस बुक, ट्विटर, इन्सटाग्राम, यू-ट्यूब के माध्यम से लाईव होकर केन्द्र सरकार से प्रवासी मजदूरों की घर वापसी के लिए निःशुल्क परिवहन व्यवस्था कराये जाने, मनरेगा की मजदूरी के कार्य दिवस बढ़ाकर प्रतिवर्ष 200 दिन किये जाने, गरीबों के खाते में तुरन्त 10000 रूपये ट्रांस्फर किये जाने तथा छोटे व्यवसायियों को लोन के बजाय आर्थिक अनुदान दिये जाने की मांग की।
उन्होंने यह भी मांग की कि केन्द्र सरकार एक वित्तीय पैकेज की घोषणा करे जिसके माध्यम से छोटे व्यवसायियों को लोन के बजाय आर्थिक अनुदान दिया जाय।


तो वही ब्लाक प्रमुख द्वारीखाल
व अध्यक्ष ब्लाक प्रमुख संगठन महेन्द्र सिंह राणा ने केंद्र सरकार और त्रिवेन्द्र सरकार से माग की है कि उत्तराखंड वापस आये हमारे प्रवासी भाइयो को ( जो रोजगार के लिये राज्य से बाहर चले गए थे पर अब फिर गाँव आये है ) ओर आज वे बेरोजगार है ऐसे मे
उनको त्रिवेन्द्र सरकार ,
पर परिवार 7 हज़ार 500
रुपये 12 महीने तक दे
यानी एक साल तक

ओर इसके साथ ही पर परिवार को एक साल का राशन भी फ्री दे। इसके साथ ही उनके टूटे मकान सरकार बनाये
( क्योकि गाँव मैं ना रहने के कारण उनके मकान टूट चुके है ओर बुरी हालत मैं है ) ,
साथ ही उनके स्वास्थ्य का परीक्षण हो,
यही नहीं उनके बिजली के बिल माफ हो, उनके बच्चों की स्कूल फीस माफ की जाए ।


वही ब्लाक प्रमुख द्वारीखाल
व अध्यक्ष ब्लाक प्रमुख संगठन लोकप्रिय नेता महेन्द्र सिंह राणा की इस मांग के बाद गाँव आये प्रवासी भाई लोगो का कहना है कि राणा जी ने एक दम सत्य कहा है
ओर यही इस समय हमारी जरूत है
यदी इस समय हमको अपने परिवार के लालन पालन के लिए साल भर 7 हज़ार 500 रुपये दिए जाते है,
ओर साल भर का ही राशन तो हम
घर परिवार की चिंता से मुक्त होकर
इन 12 महीने मैं जी जान से खुद के स्वरोजगार से जुड़ जाएंगे
, जैविक खेती कर सकते है,
फूल से फलो तक का बगीचा लगा सकते है और तब इस मेहनत का लाभ साल भर बाद दिखने लगेगा तब
हमको कही हाथ फैलाने की जरूरत नही पड़ेगी
ओर हम तब भला अपने पहाड़ को छोड़ क्यो जायेगे
इसके बाद ब्लाक प्रमुख द्वारीखाल व अध्यक्ष ब्लाक प्रमुख संगठन महेन्द्र सिंह राणा को क्षेत्र मैं वापस आये प्रवासियों ने धन्यवाद कहा ओर कहा कि जुबान आपकीं थी पर मांग हमारी इसके लिए आपका धन्यवाद ।


वही बोलता उत्तराखंड पर बात करते हुए द्वारीखाल ब्लाक प्रमुख महेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि त्रिवेंद्र सरकार को अगर इस आपदा को अवसर मैं बदलना है तो सबसे पहले उत्तराखंड वापस आये प्रवासी भाईयो के लिए रोजगार तलाशने होंगे
आज इस कोरोना काल मे कम से कम पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए उनकी एक साल तक मदद करनी होगी
ओर यदि ये करने मे त्रिवेंद्र सरकार कामयाब हो गई तो पहाड़ से बढ़ते पलायान पर लगाम लगेगी
यही नही इसके साथ सरकार को जल्द ही पहाड़ी जिलों मैं खास कर स्वास्थ्य , पानी , शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को पटरी पर लाना होगा। जल्द नये पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने होंगे और बोलना नही करके दिखना होगा

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