लोकप्रिय त्रिवेंद्र सरकार इस कोरोना काल मैं उत्तराखंड का पूरा स्वास्थ्य महकमा दिन ओर रात लगातार अपने फ़र्ज़ को पूरी निष्ठा,कर्त्तव्य, ओर ईमानदारी से निभा रहा है
इसके लिए पूरे स्वास्थ्य महकमे को बधाई।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी स्वयं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री हैं लिहाजा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी को भी बहुत-बहुत बधाई।


लेकिन इन सब के बीच जब
कही पर इस कोरोनाकाल में सरकारी सिस्टम की
लाहपरवाही कुछ लोगो की वजह से हो जाती है तो पूरे महकमे पर भी सवाल खड़ा हो जाता है
आज प्रदेश मे 430 से अधिक कोरोना पाजिटिव के मामले है
पर तेज़ी के साथ अब फिर से लोग ठीक होकर अपने घर भी जाने लगे है
लेकिन कही कही पर इस समय
उत्तराखंड में मरीजों के बढ़ते ग्राफ मैं मुस्तैदी दिखाई भी नही देती है जो चिंता जनक है


सुनने मैं आया है कि
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती पांच मरीजों के सैंपल की रिपोर्ट 10 दिन बाद भी नही मिली थी
ख़बर ये थी कि 16 मई को श्री महंत इंदिरेश अस्पताल से पाँच मरीजों के सेम्पल जांच के लिए दूंन भेजे गए थे।
जिनकी रिपोर्ट ख़बर लिखे जाने तक नही आई थी
इस बीच हुवा ये की
सभी मरीज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रहे और लगातार 10 दिन से रिपोर्ट का इंतजार करते रहे। उन पर ये पिछले 10 दिन पल पल भारी पड़े
ओर वे मानिसक तनाव मैं भी आये की आखिर क्या हुवा जो हमारी रिपोर्ट अभी तक आई नही या फिर हम से कुछ छुपाया जा रहा है , इस बीच भारी तनाव मैं मरीज रहे ।

 


10 दिन बाद जब मामले ने तूल पकड़ा तो फिर दूंन मेडिकल कालेज के अधिकारी हरकत में आए। ओर फिर दस दिन बाद बताया गया कि सैंपल सही से नहीं लिए गए थे और इन्हें रिजेक्ट कर दिया गया है।
यहा पर सवाल ये उठता है कि यदि ऐसा था तो निजी अस्पताल को क्यो नही बतया गया??
क्या 10 दिन इस कोरोना काल मैं कोई मायने नही रखते ??


आखिर कैसे कुछ लापरवाह लोग अपनी जिमेदारी से बच सकते है , अपनी जवाबदेही से बच सकते है??ओर उनकी इस भूल की वजह से जहा मरीजों को तनाव मैं 10 दिन के पल पल गुजारने पड़े,
ओर उनके परिजन भी परेशान रहे।
तो वही पूरे दूंन मेडिकल कालेज पर भी सवाल खड़े हो गए जबकि सभी डॉक्टर , स्टाफ लगातार कोरोना वरियरस की महत्वपूर्ण भूमिका मैं अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहे है।
इस बीच अस्पताल में भर्ती रहा निरंजनपुर मंडी के आढ़ती के मुनीम का बेटा कोरोना पॉजिटिव आ चुका था जिसके बाद से
अस्प्ताल मैं भर्ती मरीजों के परिजन ओर डर गए।
इस बीच अखबार मैं छपा की डॉ. आशुतोष सयाना (दून मेडिकल कॉलेज )
का कहना है कि मैंने इस विषय में जानकारी ली है। पता चला कि सैंपल सही तरह से नहीं लिए गए थे। जिस कारण इनकी जांच नहीं हो सकी। अस्पताल प्रबंधन को इस बारे में हमसे बात करनी चाहिए थी। बहरहाल, उन्हें दोबारा सैंपल भेजने के लिए कहा है। जबकि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी का बयान आया है कि अस्पताल से सैंपल 16 मई को भेजे गए थे। इसके बाद विभाग को पत्र भी भेजा गया कि अभी तक रिपोर्ट नही आई है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब दोबारा सैंपल कराए जा रहे हैं।
अब आप समझ गए होंगे कि
कही ना कही दूंन मेडिकल कालेज की गलती यहा पर उजागर होती है के वे श्री महंत इंदिरेश अस्पताल को बताना ही भूल गए या लापरवाही कहे जो
जानकरीं अस्प्ताल तक नही पहुचीं
बहराल कारण जो भी
रहा हो पर ये घटना दुःखद है
आगे ये सब नही होना चाइए।

ओर एक महत्वपूर्ण बात ये है कि अभी तक उत्तराखंड मैं एक लाख 64 हज़ार 8 प्रवासी
वापस आ चुके है
उस लिहाज से उम्मीद है कि अभी कम से कम 3 लाख लोग ओर वापस आयेगे
ओर
इस समय कोरोना पाजिटिव मरीजों का आंकड़ा 500 को छूने को तैयार है ( जिस तरह से पिछले दिनों से मामले बढ़ रहे है ) बार बार कोरोना टेस्ट सैंपलिंग बढ़ाये जाने की माग उठ रही है और
जितना हो सकता है उतना सैंपलिंग बड़ाई भी गई है
पर इस बीच कम से कम देहरादून मैं 2 से तीन जगह ओर कोरोना टेस्ट करने की परमिशन निजी बड़े अस्पतालों को मिलनी चाइए ताकि तेज़ी
से सैंपलिंग हो। ओर राज्य सरकार को भी राहत मिल सके ।

 

राज्य में कोरोना पॉजिटिव मरीजो की संख्या 432 तक पहुँची

एम्स ऋषिकेश में 31 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

कोरोना संक्रमित में 13 टिहरी,

5 नरेंद्रनगर,
10 हरिद्वार
और ऋषिकेश
व यमकेश्वर के लोग शामिल है

ऋषिकेश की कोरोना संक्रमित महिला एम्स में डॉक्टरों की फैमिली यहां करती है मेड का काम

अब एम्स के डॉक्टर और उनकी फैमिली को किया गया क्वॉरेंटीन।

राज्य में टोटल मरीजो की संख्या 432

85 हुए डिस्चार्ज

347 मरीजो को चल रहा राज्य में उपचार।

4 सस्पेक्टेड मौत (थे कोरोना पाजिटिव )

3 माइग्रेट हुए


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