त्रिवेन्द्र रावत के दुश्मनों को झटका सीएम पद बने रहेंगे त्रिवेन्द्र !

राज्य के मुख्यमंत्री दिल्ली क्या गए जनता से लेकर सचिवालय तक अफवाह उड़ गई कि सीएम बदलने वाले है बस फिर क्या सीएम के अपने कुनबे के बीजेपी नेताओं को सोशल मीडिया से मिल रही ख़बर पर किसी को गुस्सा आया जिनमे से मुझे भी बीजेपी  नेता जोगेंद्र पुंडीर का फोन आया कि हमारे नेता के लिए बीजेपी के लिए ये गलत खबरे क्यो ओर कोन चला रहा है वो नारज भी थे  उन लोगो पर उन सोशल मीडिया पर जो बिन बात के अटकलें लगा रहे है               तो कुछ वो लोग भी है जो इन खबरों से खुश नजर आए और आये भी क्यो ना आखिर वो त्रिवेन्द्र को सीएम की कुर्सी पर देखना जो नही चहाते है आपको मालूम है कि हरीश रावत की आम – ककड़ी पार्टी के बाद एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत गर्म हो गयी ओर झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि उत्तरा प्रकरण औऱ हरीश रावत की आम पार्टी में शामिल होने के कारण बीजेपी आलाकमान सीएम त्रिवेंद्र से नाराज हो गया है यही नही त्रिवेंद्र को कुर्सी से हटाने पर विचार भी कर रहा है, ओर यही वजह है कि त्रिवेंद्र को हाईकमान ने दिल्ली बुला दिया आपको बता दे कि ये अफ़वाहें हैं ओर वो लोग फैला रहे है जो त्रिवेन्द्र से खार खा रहे है उनके सीएम बनने के बाद से ही इसलिये जरा सा मौका मिला नही की बस अफवहाओ को फैला दो ये वो लोग है या उनके गुट है जो त्रिवेंद्र के लिए मुसीबत भी खुद लेकर आते है पहले उनको फ़साते है फिर दे दाना दन अफवाह का बाज़र भी गर्म कर देते है  बीजेपी का हाईकमान हर बात से अनजान नही इसलिए वो इन सब बातों पर बात भी नही करता विचार तो बहुत दूर की बात एक बात और बीजेपी हाईकमान नेतृत्व परिवर्तन कर के सूबे में सिरफुटौव्वल को न्यौता नही देगा क्योकि उनको मालूम है यहा के हालत ओर जिस तरह से सीएम त्रिवेन्द्र जीरो टॉलरेंस की नीति से चल रहे है उससे बीजेपी हाईकमान काफी हद तक संतुष्ट दिखाई देता है ओर कुछ गीले शिकवे दूर कर फिर से त्रिवेन्द्र पर विस्वास कायम रखा है आपको बता दे कि जीरो टॉलरेंस की नीति से राज्य के अफसर, विधायक और उत्तराखंड के भाजपाई ओर सियासी दिग्गज परेशान है कोई कहता है कि अफसर कमा नही पा रहा है तो कोई बोला नेताओ की महत्वाकांक्षा सरकार बनने के बाद भी अधूरी है इसलिये अफवाहें खबरों का माहौल बनाया गया है आपको बता दे कि त्रिवेन्द्र रावत को हटाना क्यो संभव नही! उत्तराखंड बीजेपी के अंदर तमाम खेमे है जो सीएम पद के लिए गोलबंदी शुरू कर देंगे, ऐसे में सीएम का चयन बड़ा सिरदर्द बन जाएगा और पार्टी के अंदर ही एक बड़ी सिरफुटौव्वल शुरू हो जाएगी। इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा ओर बीजेपी के कई नेता तो मौके की तलाश में है ही पर हाईकमान जनता है कि अभी निकाय चुनावों के बाद 2019 के आम चुनावों में भी। इसलिए वो सर दर्द मोल नही लेगा
क्योंकि इस समय उनका ओर पूरे बीजेपी परिवार का मिशन 2019 है इसलिए अभी कोई मुसीबत लेने वाला काम नही किया जाएगा हा उतरा पंत बहुगुणा सीएम विवाद ने जरूर सरकार को कुछ हद तक परेशान किया जिसका लाभ विपक्ष ने उठाया भी पर उससे ज्यादा मजबूत त्रिवेन्द्र रावत का पक्ष है क्योकि कोई भी अभी तक ये नही कह सकता कि त्रिवेन्द्र रावत की सरकार मे या खुद त्रिवेन्द्र रावत ने भटाचार किया हो भ्रस्टाचार किया हो

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