त्रिवेन्द्र की सरकार – विपक्ष- पुलिस महकमा ओर ये अपराध !

बोलता है उत्तराखंड़ की अब कैसे बचाये हम अपनी ब्वारी बेटियों ओर लाडलियों को इन हवस के भेड़ियों से? ये देवभूमि है जहां नारियों का सम्मान होता है ओर यहा देवता निवास करते हैं , फिर ये हवस के भेड़िए कहा से पनपने लग गए है इस देवभूमि मे सवाल बड़ा है जिसका जवाब प्रत्येक नागरिक को खुद से सोचना होगा मासूमों से दरिंदगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं उससे लग रहा है कि बेटियां पहाड़ की हो या मैदान की वो अपने घर पर भी महफूज नहीं हैं। ओर ये बात भी सही है कि अन्य राज्यो के लिहाज से हमारा प्रदेश अभी इन अपराधों मे पीछे है पर लगातार बढ़ती घटनाएं सोचने को मजबूर कर देती है
ताजा मामला उत्तरकाशी का है. जहां उत्तरकाशी जनपद में 12 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद उत्तरकाशी समेत अन्य इलाकों में भी आक्रोश का माहौल था लेकिन पुलिस की अच्छी और बेहतर कार्यप्रणाली ने पहाड़ को आग के मुंह से बचा लिया वरना जिस तरह से हालात बन रहे थे उन्हें देखकर कुछ भी हो सकता था फिर बात आईजी संजय गुंज्याल की हो या अधिकारी अशोक कुमार से लेकर अजय रौतेला तक कि सभी ने मिलकर बेहतर समन्वय बनाकर अपनी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ओर नतीजा रहा कि मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था जिसने अपना गुनाह कुबूल कर लिया.।
तो दूसरी तरफ देहरादून NIVH के अंदर बच्चों के साथ हो रहे घिनौने काम का खुलासा होने के बाद बाल संरक्षण आयोग हरकत में आया. जहां छात्र-छात्राओं ने शिक्षक पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था ओर यह भी परिणाम निकलकर आया उस टीचर को संस्पेंड कर दिया गया तो डायेक्टर का इस्तीफा आ गया और जांच जारी है । अब जरा आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015 में 257, 2016 में 322 और 2017 में 386 पॉस्कों अधिनियम में मामले दर्ज हो चुके हैं.
वहीं 2018 के पहले 6 महीने में ही अभी तक 306 मामले सामने आ चुके हैं. ये हाल तब है जब 2012 में केन्द्र सरकार ने बच्चों पर होने वाले यौन अपराधों को रोकने के लिए कड़ा कानून पॉक्सो यानि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सूयल ऑफेन्सिस एक्ट बनाया था। अब इन आकड़ो को देख कर तो सोचना ही होगा ना कि कैसे बचाये हम इन हवस के भेड़ियों से अपनी लाडलियों को । महिलाओं की सुरक्षा के लाख दावे सरकारो के ठीक उसी प्रकार होते है जैसे खबरिया चैनल मे चार लोगों ने अगर बयान दे दिया कि फलाने ने ये काम नही किया तो मतलब समझो नही किया भले ही 100 लोग कह रहे हो कि सब ठीक है पर उनकी कोई कहा सुने जिंसने बयान दिया वही ठीक पर वो झूठ ही क्यो ना हो भले फिर ।

जमीनी हकीकत पर सरकार को भी विचार करना होगा और सरकार के अंगों को भी ओर आपको हमको ओर सबको जागरूक रहने की जरूरत है ।
अब सोचिए राज्य मे जब जब जिसकी भी सरकार बनती है और उस दौरान विपक्ष मे जो भी पार्टीया रहती है वो सबसे पहले कानून व्यवस्था के पीछे हाथ धो कर पड़ जाती है और भूल जाती है कि कभी वो भी सरकार मे थे और आज की सरकार विपक्ष मे थी तब आज की सरकार वाले भी उस दौरान विपक्ष की भूमिका के नाते राज्य की कानून व्यवस्था पर चोट करते है ।और कहना सबका एक ही होता है विपक्ष के नाते की ये सरकार कानून व्यवस्था बनाने मे लाचार है इस सरकार के राज मे कानून व्यवस्था बिगड़ गई। अब जरा कोई ये बताओ की सरकार जिसकी भी हो भाई राज्य के पुलिस अधिकारी से लेकर अफसर सिपाही तो वही रहते है हा ये जरूर होता है कि इनके महकमे मे ताबदले होते रहते है कुर्सियां बदलती रहती है पर कार्य प्रणाली वही रहती है फिर क्यो जब बीजेपी की सरकार हो तो कानून व्यवस्था खराब ओर जब कांग्रेस की सरकार हो तब भी विपक्ष बोले कि कानून व्यवस्था राज्य मे है ही नही ???? इन राजनेताओ की तिकडम बाज़ी के बीच अगर कोई पिस्ता है  तो  वो है हमारे पुलिसिंग का सिस्टम जिनको ठीक से तो कार्य करने दिया जाता नही ओर हर कोई पड़ जाता है इनके पीछे हाथ धोकर ।ख़बर लिखने वाला कोई पुलिस का दामाद नही पर जो सच है वो तो यही है। अब सोचो जरा जो पिछले 2 साल पहले खुद राज्य के ग्रह मंन्त्री थे प्रीतम सिंह क्या उनको नही मालूम कि कहा पर पुलिस की कार्य प्रणाली गलत है या सही है पर आज विपक्ष मे  है तो राज्यपाल के पास जाकर भी कहेगे की सर देखो इस सरकार मे महिलाएं सुरक्षित नही इस सरकार मे कानून व्ययवस्था का किसी को डर नही , ओर बात भी ठीक है उनकी वो नेेता   है इसलिए जनहित की बात कहेगे ही तो वही जब अजय भट्ट विपक्ष की भूमिका थे तो चिल्ला चिल्ला कर कहते थे कि हरीश सरकार मे गुंडा राज है यह हमारे विधायको को जूठे मुकदमो मे फसाया जाता है और नारी निकेतन जैसे मामलों को लेकर हरीश सरकार मे कानून व्यवस्था पर चोट मारते थे । उनका भी कहना उस दौरान ठीक था भाई नेता थे उस दौरान वो भी विपक्ष के । लेकिन पिस्ता कोन था जवाब है पुलिस महकाम । जब जब बीजेपी की सरकार आई तो कांग्रेस के नेताओ पर मुकदमे ओर कांग्रेस की सरकार आई तो बीजेपी के नेताओ पर मुकदमे ओर दबाव उस समय भी पुलिस पर उनका जिनकी सरकार राज्य मे। ओर उससे बड़ी बात तो सुनो कांग्रेस की सरकार के दौरान कांग्रेस के नेताओ के मुकदमे वापस हो जाते है और बीजेपी की सरकार के दौरान बीजेपी के नेताओ के फिर भी कोन पिस्ता है जवाब ये पुलिस महकमा  
आरे भाई राज नेताओ क्यो नही कह देते की हम ही बेवजह एक दूसरे की सरकार आने पर जिसकी भी सरकार उस समय हो (जिस पार्टी की हो )  उस पर सबसे पहले कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते है ।क्योकि घेरना सरकार को है पर घिरता कोन है पुलिस महकमा । अब बात महिलाओं या नाबालिग के साथ बढ़ रहे दुष्कर्म के मामलों की ही या योंन शोषण की तो इसके लिए हम सबको जागरूक रहने की जरूरत है सब कुछ सरकार के भरोसे  नही छोड़ा जा सकता फिर वो सरकार किसी भी राजनीतिक दल की क्यो न हो ।क्या आपका काम नही बनता की अपने अपने क्षेत्र मे उन लोगो पर नज़र रखे जो अचानक आपके क्षेत्र मे दिखाई दे रहे है। क्या किसी गाँव का प्रधान या पटवारी जिला पंचायत अध्यक्ष का काम नही की वो भी अपने गाँव इलाके मे आने जाने वाले लोगो पर गाँव वालों को नज़र रखने को कहे ओर यही बात शहर मे भी लागू होती है एक पार्षद से लेकर विधायक तक पर क्या वो लोगो को समय समय पर जागरूक करते है? जवाब ना ही मिलेगा । क्या हम ओर आप खुद समाज के बीच जब चलते है कोई घटना होने पर या देखने पर या उसका आभास होने पर कितना पुलिस को सूचित करते है जवाब आप ओर हम अपने मन से पूछे । सबको इस रफ्तार से चल रही दुनिया मे आगे भगाना है यह किसी के पास किसी के लिए समय नही की कोई किसी की मदद कर दे कोई किसी का सहयोग कर दे हा जब कुछ गलत हो जाये तो हम सब सड़कों पर इंसाफ की माग को लेकर ।  अरे भाई लोगो आज अगर देवभूमि मे हवस के भेड़िए घूम रहे है और हमारी लाडली सुरक्षित नही लगती हमको तो हम्हे खुद सबसे पहले सावधान ओर अल्ट रहने की जरूरत है ।पुलिस तो पार्ट 2 है जहाँ तक मेने उत्तराखंड़ पुलिस को समझा है तो वो बात ये है कि कही भी कोई भी जानकारी महिला अपराध की इनके पास पहुचती है तो उस पर तुरंत बिना समय गवाय एक्शन हो जाता है पर कोई जानकारी तो दे समय पर ओर ये ना सुने तब सबसे बडे दोषी इनको ही कहो ।

फेसबूक ओर सोशल मीडिया पर पुलिस पर कुछ लोग सवाल उठा रहे थे ओर  सवाल उनका उठाना जायज़  भी है  पर मे भी कुछ इन बिंदुओं पर अपनी बात रख दू। सोचो जरा जहा एक आदमी बिना बात के मामूली विवाद में गोली किसी को मार देता है और भाग जाता है , जहाँ धरने पर्दशन करने वालो पर पानी की बौछारों से लेकर कभी लाठियां भी चलानी पड़ती है। तो ये तो इतना बड़ा मामला था जिसकी आग मे पूरा पहाड़ जल रहा था उत्तकाशी जिले मे रेप और हत्या का मामला था और नफरत गुस्से की आग मे थी देवभूमि ऐसे मे यहा के बिगड़ते माहौल को विवेक ओर पूरे  कुशल  निर्णय  लेकर राज्य की पुलिस ने बहुत शानदार तरिके से अपने काम को अंजाम दिया वरना कुछ भी हो सकता  था और आप को बता दु की ये घटना अगर किसी दूसरे राज्य के अंदर होती तो जान से लेकर माल तक का नुकसान हो सकता था पर जिस तरह से राज्य की पुलिस ने काम किया बिना आप खोए दिमाग और शालीनता से काम किया उनकी पूरी टीम को धन्यवाद बोलता उत्तराखंड कहता है ।इस बात के साथ कि आप  सब भी रहे सतर्क ओर सावधान हर काम पुलिस ओर सरकार के ऊपर ही नही छोड़ना चाइए जागरूक तो हम्हे आपको ओर सबको तो खुद ही रहना होगा फिर उसके बाद का काम पुलिस का ।हर बात पर पुलिस की टांग खींचना ठीक नही। हा यहा  पर एक बात जरूर है कि पुलिस को भी अब अपने काम करने के कुछ तरीको पर बदलाव करना होगा जो समय की माग भी है ओर जब सब मिलकर एक साथ समन्वय के साथ जनता, कानून, सरकार और विपक्ष करेगे काम तो हवस के भेड़िए खुद ही छोड़कर भाग जायगे आपकी देवभूमि को ओर तब ही महिला अपराध से बचेगी आपकी देवभूमि इन भेड़ियों से । जिसके लिए सबको पुलिस का देना होगा साथ ओर रहना होगा जागरूक

जो कहूंगा सच कहूंगा।(बोलता उत्तराखंड़) मतलब रतन नेगी

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