त्रिवेन्द्र राज मे जीरो टालरेश का असर! अब अफसरों की बारी!

राज्य मे त्रिवेन्द्र रावत कि सरकार ने बनते ही कहा था कि वो राज्य मे जीरो टालरेश की सरकार देगे ओर राज्य मे अब घोटाले करने वाले को जेल के अंदर पहुचाया जाएगा जिसके चलते त्रिवेन्द्र सरकार ने सबसे पहले ऊधमसिंह नगर में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 चौड़ीकरण के मुआवजा घोटाले की जद में आए लोगो पर कार्यवाही की अब कहा जा रहा है कि ऊधमसिंह नगर में राष्ट्रीय राजमार्ग 74 चौड़ीकरण के मुआवजा घोटाले की चपेट में राज्य के दो बढे नौकरशाहों का नाम आ रहा है ।सूत्र बोल रहे है कि शुक्रवार को।कुछ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से भी मुलाकात की। ओर उससे पहले अपर सचिव उत्पल कुमार सिंह से भी मुलाकात की थी ।
आपको बता दे कि ऊधमसिंह नगर जिले में रुद्रपुर से होकर गुजरने वाले नेशनल हाईवे 74 के चौड़ीकरण में मुआवजा घोटाला अब सामने आ चुका है। इस घोटाले में यह बात सामने आई कि मुआवजा देने के लिए सरकारी अधिकारियों ने भू-उपयोग बदलने के साथ ही कुछ मामलों में तय से कहीं अधिक मुआवजा देने का काम किया। आप को बता दे कि इस मामले में अभी तक आठ पीसीएस अधिकारी प्रथम दृष्ट्या आरोपी पाए गए हैं। इनमें से सात निलंबित हैं जबकि एक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ओर लगभग एक साल से एसआइटी इस पूरे मामले की जांच कर रही है। जानकार कह रहे है कि एसआइटी ने इस मामले में आइएएस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ओर नाम  उनका लिया जा  रहा है उनका  जो जिलाधिकारी के रूप में ऊधमसिंह नगर जिले में इस अवधि में  आर्बिट्रेटर की भूमिका में थे!  सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने पहले ही दोनों अधिकारियों को अपना पक्ष जांच एजेंसी के सामने रखने को कह दिया था । जानकार कह रहे है कि कल शुक्रवार को इन दोनों अधिकारी ने मुख्य सचिव से लेकर सीएम के आगे अपना पक्ष रखा। माना  जा रहा है कि इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के सामने अपना पक्ष रखा। तो ख़बर ये भी है कि जांच की आंच मे आये अधिकारियों अगर दोषी पाए गए तो कार्यवाही होना अब तय माना जा रहा है क्योकि त्रिवेन्द्र रावत पहले ही जीरो टालरेश की बात कहते आ रहे है ।दूसरी तरफ ख़बर ये भी है कि इस पूरे मामले मे बढे सफ़ेद पोशो की भूमिका भी संदिग्ध है! पर उन तक अभी कोई भी हाथ डालने या जांच करने का शाहस नही जुटा पाया है बहराल देखते है आगे और किस किस के नाम निकलकर आते है इस घोटाले मे ओर इस बात से भी इनकार नही किया जा सकता कि त्रिवेन्द्र के राज मे ही अधिकारियों पर कार्यवाही हुई है। वरना मजाल है इन 17 सालो मे जब किसी भ्रष्ट अधिकारी का बाल भी बांका हुवा हो जिसके लिए मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत को सुभकामनाये ।

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