त्रिवेन्द्र दा सरकारी तंत्र को आईना दिखा दिया है!

सूबे के मुख्य मंत्री त्रिवेन्द्र रावत भले ही भ्रष्ट लोगो के खिलाफ धर्म युद्ध लड़ रहे हो पर उनका सरकारी तँत्र मुख्यमंत्री की डांट फटकार ओर दिशा निर्देश के बाद भी जागने को तैयार नही
क्योंकि तस्वीर बोलती है पहाड़ की ओर खोलती है पोल उस सरकारी तँत्र की जो सोया सोया रहता है। आपको बता दे कि उर्गम घाटी में कल्प गंगा पर बने स्थायी पुल 2013 में आई बाढ़ में बह गए थे। तब से लोग कल्प गंगा पर पावर हाउस के पास बने अस्थायी पुलों से आवाजाही कर रहे थे। लेकिन, यह पुल भी इस बार जुलाई में बाढ़ की भेंट चढ़ गए। ओर फिर तब से पिलखी, भर्की, अरोसी, भेंटा, ग्वाना सहित अन्य गांवों की लगभग डेढ़ हजार की आबादी लगभग तीन किमी का चक्कर काटकर पैदल ही बर्ड़ंगडा होते हुए आवाजाही कर रही थी। तब लगातार ग्रामीणों ने कई बार जोशीमठ तहसील प्रशासन को भी इस संबंध में सूचना दी, लेकिन वहां से सिर्फ कोरे आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला। बस फिर ऐसे में सभी ग्रामीणों ने एक सप्ताह पूर्व बैठक कर खुद ही पुल निर्माण का निर्णय लिया। 
ओर उन्होंने सबसे पहले आरोसी के पावर हाउस के पास कल्प गंगा पर लकड़ी का कच्चा पुल तैयार किया। आपको जानकारी दे दे कि कि इस रास्ते घोड़ा-खच्चर नहीं जा सकते थे। जबकि, गांव तक खाद्य-सामाग्री घोड़ा-खच्चर से पहुंचाई जा सकती है। सो ग्रामीणों ने पावर हाउस के फागड़ा तोक में घोड़ा-खच्चर के लिए भी एक  सुरक्षित कच्चा पुल तैयार कर लिया। ओर आपको बता दे कि दोनों पुलों के निर्माण को प्रत्येक परिवार से एक-एक व्यक्ति श्रमदान में शामिल हुआ। 

आरोसी गांव के ग्रामीण रघुवीर सिंह चौहान कहते हैं कि प्रशासन शायद कल्प गंगा में पानी कम होने का इंतजार कर रहा है। लेकिन, ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य सामाग्री की किल्लत थी। लिहाजा अपनी जरूरतों को देखते हुए ग्रामीणों ने अपने संसाधनों से पुलों का निर्माण किया। पिलखी के ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह नेगी कहते हैं कि ग्रामीणों की इस पहल से सामूहिक कार्य की ग्रामीण परंपरा आगे बढ़ी है।

बहराल गाँव वालों ने तो अपना काम कर दिया ।आज भले ही अधिकारी पानी कम होने का इंतज़ार कर रहे हो वो अलग बात पर 2013 के बाद अब 2018 भी जाने को तैयार है फिर क्यो इन 5 सालो मे स्थाई पुल बनकर तैयार नही हो पाया क्या बजट नही था या बजट था पर कमीशन ठीक से नही मिल रहा था ।या फिर ये कह लो कि गाँव वालों को दुखी कर करके ओर उन्हें परेशान करने के बाद स्थाई पुल बनेगा ।ये तो हमारा सरकारी तँत्र ही जाने आज त्रिवेद रावत भले ही राज्य के विकास के लिए अपना पसीना बहा रहे हो।पर ये सरकारी तँत्र और लाचार सिस्टम त्रिवेन्द्र रावत की मेहनत पर पानी फेरता रहता है।

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