त्रिवेन्द्र का ऐलान निर्दोष नहीं फंसेगा, दोषी नहीं बचेगा, नही काम आयेगी ऊंची पहुंच!

 

जीरो टालरेश वाली त्रिवेंद्र सरकार उत्तराखंड राज्य में 18 महीने से ऊपर का कार्यकाल पूरा कर चुकी है. इस दौरान त्रिवेन्द्र सरकार ने कई काम किये जिन्हें वो अपनी उपलब्धि के तौर पर गिनाती है। आपको बता दे कि एनएच-74 घोटाले की जांच भी इन्हीं में से एक है. राज्य में प्रचंड बहुमत से बीजेपी सरकार को जनता ने बनाया और बीजेपी हाईकमान ने त्रिवेन्द्र को मुख्यमंत्री बस फिर क्या था सीएम बने त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने इस घोटाले का खुलासा कर भूचाल मचा दिया था। आपको बता दे कि एसआईटी जांच में अबतक इस घोटाले के संबंध में 22 लोग जेल जा चुके है जबकि दो वरिष्ठ IAS अधिकारी निलंबित किये गए हैं।
बोलता उत्तराखंड कहता है कि उत्तराखंड में भष्ट्राचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सीएम त्रिवेंद्र ने एनएच-74 घोटाले पर बड़ी कार्रवाई की है। एनएच-74 घोटाले में त्रिवेंद्र ने राज्य के दो आईएएस अधिकारियों को निलंबित किया मीडिया को राज्य के मुखिया त्रिवेंद्र रावत ने बताया कि उनकी सरकार भष्ट्राचार मुक्त सरकार है. उन्होंने कहा कि एनएच-74 घोटाले में अबतक 22 लोगों को जेल भेजा जा चुका है. साथ ही दो वरिष्ठ अधिकारियों को राज्य सरकार ने निलंबित किया है. त्रिवेन्द्र दा ने कहा कि हमारी स्पष्ट सोच रही है कि किसी निर्दोष को हम फंसाएंगे नहीं और दोषी को छोड़ेंगे नहीं. अब फिर वो कोई अधिकारी हो, किसी पार्टी का नेता या उद्योग जगत का कोई बड़ा नाम या बड़े दलाल और माफिया किस्म के लोग ही क्यों न हों किसी की भी पहुंच हम तक नहीं पहुंच पाएगी. इसलिए जांच बिल्कुल निष्पक्ष होगी जो SIT कर रही है.

मुआवजा घोटाले पर बोलते हुए सीएम त्रिवेंद्र
रावत ने कहा कि इस मामले में उनकी सरकार की स्पष्ट सोच रही है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने एनएच-74 घोटाले की निष्पक्ष जांच करवाई है. एसआईटी जांच की निष्पक्षता पर बोलते हुए सीएम ने कहा कि उनकी सरकार बिना किसी के दबाव के काम कर रही है, जिसके कारण मामले में सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है.

वही एनएच-74 घोटाले में सीएम रावत ने एसआईटी और पुलिस की जांच की तारीफ की. सीएम ने कहा कि एसआईटी ने इस मामले में बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष जांच की है. मामले में जांच जारी है. सीएम रावत ने कहा कि आगे भी इस मामले में जो भी और कसूरवार होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा.
अबतक NH घोटाले में हुई कार्रवाई पर एक नजर डाले तो
प्रदेश का सबसे बड़ा और बहुचर्चित NH-74 घोटाल में दो बड़े अधिकारियों पर गाज गिरने के बाद से ही हलचल मची हुई है ।
करोडों के इस महाघोटाले में अबतक पांच पीसीएस अफसरों समेत 22 लोगों पर कार्रवाई हो चुकी है. इनमें दो नायब तहसीलदार, राजस्व विभाग के कर्मचारी, किसान व बिचौलिए शामिल हैं. मामले में एक एसडीएम और तहसीलदार जेल में हैं. इसके अलावा अलग-अलग मामलों में करीब 2 करोड़ 12 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है.

अभी हाल मैं ही IAS अधिकारियों डॉ. पंकज कुमार पांडेय और चंद्रेश कुमार यादव पर कार्यवहीं हुई है. दोनों को निलंबित किया गया है. पंकज पांडे शासन में प्रभारी सचिव और चंद्रेश यादव अपर सचिव पद पर तैनात थे. दोनों ही अधिकारियों पर बतौर जिलाधिकारी उधम सिंह नगर (आर्बिट्रेटर) रहते हुये भूमि का नियम विरुद्ध मुआवजा कई गुणा तक अधिक निर्धारित करने का आरोप है. शासन ने एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई करते हुए उन्हें अपर मुख्य सचिव कार्मिक के साथ अटैच कर दिया है. आपको बता दे कि
तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि एनएच-74 में भूअधिग्रहण को लेकर बड़ा गोलमाल चल रहा है. इसके बाद 1 मार्च 2016 को उन्होंने उधम सिंह नगर जिला मुख्यालय पहुंचकर अधिकारियों संग एक अहम बैठक की. मीटिंग में कुमाऊं कमिश्नर ने साल 2011 से 2016 के बीच एनएच-74 चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित की गयी किसानों की जमीन के एवज में दी गई मुआवजा राशि की सभी फाइलों को तलब किया. इस दौरान उन्होंने जांच समिति को 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए.

1 मार्च 2016 कुमाऊं कमिश्नर ने घोटाले की आशंका जताई.
8 मार्च 2016 शासन को भेजी रिपोर्ट.
9 मार्च 2016 एसएलओ के घर आयकर का छापा.
10 मार्च 2016 पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज.
10 मार्च को तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन ने जांच रिपोर्ट शासन को भेजी और मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने के लिए प्रस्ताव भेजा.
15 मार्च 2016 घोटाले की जांच के लिए शासन ने एसआइटी गठित की.
23 मार्च एसआइटी ने एसएलओ दफ्तर में छापा मारा.
25 मार्च को 6 पीसीएस सस्पेंड.
5 अप्रैल 2016 को केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी का पत्र
9 अप्रैल को मामले की जांच एसआइटी को सौंपी.
एएसपी कमलेश उपाध्याय के नेतृत्व में एसआइटी का गठन.
3 जून 2016 को जसपुर से निलंबित पेशकार विकास चौहान की गिरफ्तारी.
9 जुलाई 2016 को पीसीएस अधिकारी निलंबित.
7 नवंबर को निलंबित पीसीएस अधिकारी भगत सिंह सहित 8 गिरफ्तार.
23 नवंबर को घोटाले का मुख्य आरोपी डीपी सिंह गिरफ्तार.
14 जनवरी 2017 को निलंबित पीसीएस अधिकारी अनिल शुक्ला गिरफ्तार.
18 मार्च को त्रिवेंद्र सरकार के सत्ता संभालने के बाद सभी संदिग्ध पीसीएस अफसरों को सस्पेंड करने का सिलिसला शुरू हो गया.
20 मार्च 2017 को 2 बिल्डर प्रिया शर्मा और सुधीर चावला गिरफ्तार.
8 जुलाई को बेरीनाग तहसीलदार रघुवीर सिंह गिरफ्तार.
11 अगस्त को दो आईएएस अधिकारियों से पूछताछ.
11 सितंबर को दो आईएएस अधिकारियों हुए सस्पेंड.
मामले की सीबीआई जांच कराने को लेकर पहली कैबिनेट बैठक में मुहर लग गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया था.
तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन इस घोटाले को सामने वाले शख्स थे. इसका नतीजा ये हुआ कि पांडियन को जान से मारने की धमकी भी मिली थी. इसके बाद सरकार ने घोटाले की जांच एसएसपी सदानंद दाते को सौंपी.
मामले से अलग करने के लिए एसएसपी दाते को दिल्ली से बुलावा भी आया था, लेकिन भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई लगातार होती रही.

आपको बता दे कि क्या था
एनएच घोटाला?
पूर्व की हरीश रावत की सरकार के कार्यकाल में उधम सिंह नगर में एनएच-74 के चौड़ीकरण के लिए किसानों से भूमि अधिग्रहण की गई थी. भूमि का लैंड यूज बदलकर कई गुना मुआवजा वसूला गया. कृषि भूमि को अकृषि भूमि दिखाया गया. तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन की प्राथमिक जांच में यह तथ्य सामने आया था कि वर्ष 2015 में कम्प्यूटर खतौनी में जो भूमि अकृषि दर्ज की गई वो 2011 से 2015 के बीच के वर्षों में कृषि भूमि थी. जांच में सामने आया कि चुनिंदा किसानों को फायदा पहुंचाने के लिए कृषि भूमि को अकृषि दर्शाकर कई गुना मुआवजा वसूलने की साजिश की गई. इसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्यों की भूमिका रही.

दो IAS हो चुके हैं सस्पेंड जिसमे पंकज कुमार पांडेय ओर चंद्रेश कुमार यादव है।

इसके साथ ही ये पीसीएस भी चुके हैं सस्पेंड
सुरेंद्र सिंह जंगपांगी
अनिल कुमार शुक्ला
दिनेश प्रताप सिंह
जगदीश लाल
भगत सिंह फोनिया
एनएस नगन्याल
तीर्थपाल सिंह
पीसीएस हिमालय सिंह मर्तोलिया पर रिटायरमेंट के बाद कार्रवाई।
बहराल त्रिवेन्द्र सरकार जहा जीरो टालरेश की तर्ज पर काम कर रही है वही विपक्ष लगातार इस पूरे मामले पर c.b.i जांच की मांग कर रहे है ।तो उधर ख़बर ये भी है कि आने वाले दिनों मे सस्पेंड हुए i.a.s अधिकारी वो राज खोलेंगे की राज्य की सियासत से लेकर नोकरशाह तक बड़ा तहलका मच जायेगा जिस पर सबकी नजर होंगी अगर ऐसा हो पाया तब असली परीक्षा जीरो टालरेश वाली सरकार के मुखिया की होगी।

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