तो क्या निर्माणाधीन आल्वेदर रोड़ ले रही है लोगो की जान !

मेरे पहाड़ ओर आपके पहाड़ मे हो रही सड़क दुर्घटना ने मन को बेचैन कर दिया है सवाल उठने लगे है कि आखिर कैसे इन घटनाओं मे कमी आये कभी किसी हादसे में ड्राइवर की लापरवाही उजागर होती है , तो कही ओवरलोडिंग की बात निकलती है, ओर अक्सर सड़क की गुडवत्ता पर सवाल खड़े होते है टिहरी बस हादसे ( दुर्घटना) ने एक बार भी सवाल खड़े कर डाले है.          आजकल पहाड़ो मे
..ऑल वेदर रोड निर्माण के कारण हर जगह सड़क पर काम चल रहा है और ये काम टिहरी में वहां पर भी चल रहा था जहां बस हादसा हुवा आपको बता दे कि
चंबा-उत्तरकाशी मोटरमार्ग के किरगनी के पास हुए बस हादसे को रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के कर्मचारियों ने ऑल वेदर रोड कार्य को इस घटना की वजह बता डाला है । इन कर्मचारियों ने कहा कि निर्माण कार्यों के चलते सड़कों पर जगह-जगह मलबे के ढेर लगे हैं,साथ ही सड़कें कई जगहों पर टूटी हुई हैं, जो कि दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है।
जानकारी अनुसार परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का ऐसा मानना है कि आल वेदर रोड के निर्माण कार्यो के चलते पहाड़ों के कई मार्गों में टूट-फूट हुई है। सड़कों पर मलबे के ढेर लगे हैं, लेकिन ये ढेर सिर्फ दिखाने के हैं जो वाहन चालकों के लिये अपने आप में धोखा साबित होते है मलबे के ये ढेर दिखने में सड़क के लेबल में ही नजर आते हैं, जबकी अंदर से ये काफी कमजोर होते हैं। जिसके कारण बड़ी दुर्घटना होती रहती है।

वहीं रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के महामंत्री दिनेश गुसाईं ने बताया कि हरिद्वार डिपो की दुर्घटनाग्रस्त हुई 39 सीटर बस परसो सवेरे उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी के लिये चली थी। दुर्घटनाग्रस्त बस के परिचालक सत्यपाल सिंह ने कहा कि भटवाड़ी का रास्ता बंद होने की वजह से उन्हें भटवाड़ी से कुछ किलोमीटर पहले मनेरी में हॉल्ट करना पड़ा। ओर षुक्रवार जब वे अपने नियत समय से हरिद्वार के लिये रवाना हुये तो बीच रास्ते में ये बस दुर्घटनाग्रस्त हो गयी। बस के परिचालक गुसाईं ने इस दुर्घटना में चालक की गलती को नकारा है। गुसाईं ने कहा कि जिस स्थान पर बस दुर्घटनाग्रस्त हुई है वहां पर ऑल वेदर रोड निर्माण का कार्य चल रहा था। जिसके कारण वहां पर सड़के कच्ची हो गई हैं जो की दुर्घटना का प्रमुख कारण है। अब सवाल ये उठाता है कि जब ये बस सरकारी मतलब रोडवेज की गाड़ी थी ओर अब घटना होने के बाद परिवहन के अधिकारी या कर्मचारी कमिया बता रहे है आल वेदर रोड़ निर्माण कार्य के चलते सड़को के हालात की पर सवाल ये उठता है कि क्या इनहोने कभी सरकार को अपने परिवहन मंत्री को या उससे पहले अपने बडे अधिकारी को बताया कि सर पहाड़ मे गाड़ी चालते समय ये शिकायत या ये दिकत बताई गई अगर नही बताता गया तो आज वो सब लोग दोषी है जो आल्वेदर रोड के निर्माण कार्य को घटना की वजह मानते है और अगर बताता गया ऊपर तक तो वो लोग जिमेदार है जिनके हाथ मे कामना है हालतों को सुधारने की जांच का विषय यही है कि क्या सड़को के हालातों के बारे मे विभाग को मालूम रहता भी है या नही ओर परिवहन मंत्री जी देख क्या रहे है और क्या कर रहे है उनके अधिकारी हर बार सिर्फ हर हादसे के बाद तबादला हो जाता है और 4 दिन बाद वो दूसरी जगह कुर्सी पर बैठ जाते है तो सरकार मुवाज़ा देकर ,घायलों से मिलकर अपने फ़र्ज़ को पूरा करने का दिखावा करती है और बात खत्म बोलता उत्तराखंड़ बोल रहा है कि सबसे पहले इन हादसों को कम करने के लिए आपको ओर हमको जागरूक होना है ताकि हम सफर मे सवार होते समय हर छोटी बात पर ध्यान रखे जैसे चालक ने कोई नशा तो नही किया हुवा है, चालक को कही पर नींद की झपकियां बीच बीच नही आ रही है, चालक बेवजह ओवर टेक तो नही कर रहा है , चालक पहाड़ मे हालतों अनुसार गाड़ी की स्पीड पर नियंत्रण रखता है या नही इतना तो हर गाड़ी, बस, मे छोटी छोटी गाड़ियों म हम तो नज़र रख ही सकते है जो हमारा काम भी है , दूसरी बात गाड़ी चलाने वाला कोई भी चालक जो अक्सर पहाड़ म गाड़ी चलाते है जब उनको मालूम हो जाये कि सड़क के इन कारणों की वजह से बड़ा हादास कही भी हो सकता है तो उनको विभाग को बताना चाइए या उनको जो उनकी यूनियान के नेता है ताकि वो आगे बात रखे ओर अगर ये सब होता है तो फिर लापरवाही उनकी मानी जाए जो परिवहन विभाग को देखते है ओर उन तमाम विभाग की जो सड़क से जुड़े है आल्वेदर रोड के काम से जुड़े है और आपका p.w.d बहराल जो हुवा बहुत दर्द दे गया पर अगर हम अभी भी सबक ना ले पाए तो दर्द हमको ही मिलना तय है उदारण है पिछले 17 सालों मे 25 हज़ार से जायदा लोगो की सड़क हादसे मे मौत

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