हरदा के पैदल भ्रमण कार्यक्रम रिलीज होने के बाद सरकार ने कसी अपनी कमर !

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देहरादून– बीते बुधवार को उत्तराखंड के एक्स सीएम हरीश रावत का केदार भ्रमण कार्यक्रम रिलीज हुआ तो संगठन से लेकर सरकार और सरकार से लेकर प्रशासन तक में हलचल मच गई।
बाबा केदार के कपाट खुलने के मौके पर लेजर शो को कवर कर वापस लौटे कई पत्रकार बंधुओं को जब हरीश रावत के पैदल भ्रमण कार्यक्रम की खबर लगी तो अनायास ही उनके मुंह से शुक्रिया निकल गया। खबर है कि जैसे ही ये बात सरकार को पता चली तो सरकार ने पर्यटन महकमें की समीक्षा बैठक बुला दी।
गुरूवार को हुई उस समीक्षा बैठक में सूबे के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज भी मौजूद रहे। उनकी मौजूदगी में सीएम ने पर्यटन विभाग समेत गढ़वाल मंडल विकास निगम के कई अधिकारियो के पेंच कसे और यात्रा मार्ग की सहूलियतों की समीक्षा की।
ताकि पता चल सके कि सूबे में शुरू हुई चार धाम यात्रा के लिए महकमें ने कितना होमवर्क किया है। इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन को भी कई निर्देश दिए गए।
पर्यटन सचिव से लेकर जीएमवीएन के अधिकारी और दूसरे हाकिमों को हुजूर ने जरूरी टिप्स दिए ताकि चार धाम यात्रा पर आए देश-विदेश के यात्रियों को किसी तरह की कोई तकलीफ न उठानी पड़े। इसमें चिकित्सा सुविधाओं से लेकर प्रसाधन सहूलियत और जेबीसी से लेकर एटीएम कैश तक पर चर्चा हुई।
खबर है कि सरकार जहां काम-काज से संतुष्ट रही वहां साहबों की पीठ थपथपाई और जहां सरकारी सिस्टम वाली हीलहवाली दिखाई दी वहां अधिकारियों को न केवल नसीहत दी बल्कि अपने अंदाज में पेंज भी कसे। ताकि पैदल जाने का ऐलान करने वालों के  हाथ कोई ऐसा सबूत न लगे जिसे लेकर सरकार को जबरदस्ती आईना देखना पड़े।
सीएम के तेवर देख वातानुकूलित दफ्तरों में बैठने के आदी हाकिम लोगों ने फटाफट फाइलें पलटाई और तमाम जानकारियां सीएम त्रिवेंद्र रावत को दी। चार धाम यात्रा पर प्रशासन कितना मुस्तैद है इससे से सीएम सर को रू-ब-रू करवाया गया।
बहरहाल सरकार की इस बैठक को लेकर महकमें में जहां खुसुर-पुसर शुरू हो गई वहीं सचिवालय से बाहर और विपक्षियों के दफ्तरों में जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई।
कहा जा रहा है कि जिन कामों की समीक्षा चारों धामों के कपाट खुलने से पहले हो जानी चाहिए थी उनकी याद सरकार को तब आई जब पूर्व सीएम हरीश रावत ने बाबा केदार के दर्शन पैदल करने का प्रोग्राम बनाया।
कहने वाले कह रहे हैं कि सरकार को उम्मीद है कि अधिकारियों के पेंच कसने के बाद लुंज-पुंज महकमा हरकत में आएगा. कुछ पैबंद लगेंगे ताकि पहले वालों को पैदल यात्रा के दौरान डबल इंजन राज की कमियां न दिखाई दें।
बहरहाल उत्तराखंड तो यही बोल रहा है कि सुबह का भूला अगर शाम को घर लौट आए तो उसे भूला नहीं कहते। उत्तराखंड आने वाले सभी तीर्थयात्रियों की चार धाम यात्रा मंगलमय हो , उन्हें किसी भी तरह की मुश्किलात का सामना न करना पड़े।
यात्रा सुगम रहे सुरक्षित रहे और जब वो वापस लौंटे तो अगले साल अपने सगे-संबन्धियों के साथ उत्तराखंड की चार-धाम यात्रा समेत दूसरे पर्यटन स्थलों की ओर जाने का प्रोग्राम बनाएं।

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