ख़बर दुःखद है बता दे कि
उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल के श्रीकोट गांव में हफ्ते भर पहले शादी समारोह में पिटाई से घायल अनुसूचित जाति के युवक जितेंद्र की रविवार सुबह मौत हो गई। वही परिजनों का आरोप है कि गांव के सात दबंगों ने शादी समारोह में कुर्सी पर सामने बैठकर खाना खाने पर उसकी बेरहमी से उसकी पिटाई की थी। वहीं मौत से गुस्साए ग्रामीणों ने अस्पताल पहुंचकर हंगामा भी किया। क्योंकि आक्रोशित ग्रामीणों की योजना शव को सीएम आवास पर ले जाने की थी, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें किसी तरह समझा-बुझाकर शांत किया।

जानकारी अनुसार।
जितेंद्र के ऊपर ही बुजुर्ग मां गीता, 20 साल की बहन पूजा और 12 साल के भाई के पालन पोषण करने का जिम्मा था। क्योंकि वही कुछ भी कर , मजदूरी कर पूरे परिवार का गुजर बसर करता था। वही जितेंद्र अपनी बहन की शादी की तैयारी में भी लगा था, लेकिन जितेंद्र का यह सपना अधूरा ही रह गया। वही अब जितेंद्र की मौत से परिवार पर आजीविका का संकट आ गया है।   पूरे परिवार मे कोहराम मचा हुवा । आप को बता दे कि
टिहरी गढ़वाल जिले के श्रीकोट गांव में 26 अप्रैल की रात शादी समारोह में कुछ दबंग युवकों ने बसाण गांव निवासी जितेंद्र दास को बुरी तरह मारापीटा था। पिटाई में जितेंद्र को गंभीर चोटें आई थीं। 27 अप्रैल की सुबह बेहोश होने के बाद से जितेंद्र अंतिम सांस तक होश में नहीं आ सका। जितेंद्र की बहन पूजा ने इस मामले में कैंपटी थाने में हमलावर गजेंद्र, सोबन सिंह, कुशाल, गंभीर, हुकुम सिंह, हरविंदर और गब्बर के खिलाफ मारपीट और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था।


वही सीओ नरेंद्र नगर उत्तम सिंह भी कई दिन से जितेंद्र दास के बयान लेने को देहरादून में ही थे , लेकिन होश में न आने के कारण उसके बयान दर्ज नहीं हो सके। रविवार सुबह लगभग 5 बजे जितेंद्र की मौत हो गई। इसके बाद बसाण और श्रीकोट गांव में तनातनी का माहौल बन गया। मां गीता देवी और बहन पूजा के विलाप से पूरा माहौल गमगीन हो गया था। अनुसूचित जाति के जितेंद्र की मौत की खबर मिलते ही आक्रोश देखां जा रहा है वही
लोगों ने आरोप लगाया कि उन दबंगों को यह रास नहीं आया कि अनुसूचित जाति का युवक उनके सामने बैठ कर कैसे खाना खा सकता है। वही आरोपियों ने जातिसूचक शब्दों से अपमानित करके बेकसूर जितेंद्र को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। उनका कहना था कि पूरे मामले में पुलिस का रवैया भी अब तक आपत्तिजनक रहा है। क्योंकि पुलिस ने किसी आरोपी को पकड़ने का प्रयास इससे पहले नहीं किया।
आरोप है कि आरोपी लगातार पीड़ित पक्ष को जान से मारने की धमकी देकर आतंकित कर रहे हैं। अस्पताल पहुंचे जिला पंचायत सदस्य अमरेंद्र बिष्ट और जबर सिंह आदि ने पुलिस अधिकारियों से बात कर नाराजगी जताई। वहीं रविवार शाम मेडिकल बोर्ड गठित कर शव का पोस्टमार्टम कराया गया और पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
बहराल इस दुखद ख़बर ने जहा उत्तराखंड को शर्मसार किया है वही एक परिवार ने अपने घर का चिराग़ खो दिया। अब जितेंद्र की दुःखद मौत के आगे जो भी कार्यवाही हो। जो भी दोषी हो वो अलग बात ।
पर अब कैसे चलेगा जितेंद्र का घर, कोन कराएगा उसकी बहन कि शादी, कैसे होगा उसके पूरे परिवार का पालन पोषण।
ये सब मानवता के नाते हमको सोचना चहिये। ओर दिल मे दर्द भी होता है। और दिमाग ये कहता कि क्या हो रहा है अपने उत्तराखंड मै ।हम सब लोगो मै तो आपस मै प्यार प्रेम है।फिर हम कब से इन छोटी छोटी बातों को लेकर , सुनकर, अपराधी बनने लगे।



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here