थराली उपचुनाव मतलब त्रिवेन्द्र रावत बनाम हरीश रावत

  1. थराली के उपचुनाव मैं जीत बीजेपी के उम्मीदवार की हो या काग्रेस के उम्मीदवार की ये तो आने वाला वक्त्त ही बताएगा पर ये बात सच हैं कि हर दा ने थराली की जनता का दिल जीत लिया है                               जितना थराली की जनता के बीच प्रचार प्रसार के दौरान हर दा ने थराली के कोने कोने में जाकर काग्रेस उम्मीद वार के लिए जनसंपर्क किया ,रेलिया निकाली ,घर घर थराली की जनता के द्वार पहुचे ओर थराली की जनता ने जिस तरह हर दा स्वागत किया ,उनके भाषण को सुना ,उसे देख कर तो ये लगता हैं कि हर दा ने थराली की जनता का दिल जीत लिया               जी हा राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ओर राज्य के सीएम त्रिवेन्द्र रावत की साख का सवाल ये थराली का उपचुनाव बन गया हैं इस चुनाव में दोनो ही नेताओ की साख दाव पर लगी हैं वैसे अगर देखा जाए तो हरीश रावत के पास खोने के लिए कुछ नही हैं     पर सीएम त्रिवेन्द्र रावत के लिए इस उपचुनाव में जीत महत्वपूर्ण ही नही जरूरी हैं क्योंकि ये सीएम त्रिवेन्द्र के लिए एक परीक्षा हैं जबकि इस दौरान काग्रेस के अध्य्क्ष प्रीतम सिंह तो मुख्यमंत्री पर थराली उपचुनाव में रुपए बटवाने का आरपो भी लगा चुके है प्रीतम सिंह कह चुके हैं कि सीएम के हेलीकाफ्टर ओर गाड़ियों की चेकिंग क्यो नही की गई थी जबकि उनकी गाड़ी की चैंकिग की गई लिहाज उन्होंने तो सीएम त्रिवेन्द्र रावत पर आरोप तक लगा डाला।         Nदूसरी तरफ राज्य के मुखिया ने बीजेपी के उमीदवार के लिए जनता से वोट मागे ओर अपनी सरकार के कार्यो का भी जमकर बखान किया ,तो हर दा ने भी जब तक थराली के कोने कोने पर जनसंपर्क किया तब तब वो डबल इज़न की सरकार को कोसते नज़र आये और अपने सरकार के दौरान किये गए कार्य बातए तो डबल इज़न की सरकार को अब तक फैल करार दिया थराली की जनता ने इस उपचनाव में प्रचार प्रसार के दौरान बीजेपी के नेताओ के बयान भाषण से लेकर मुख्य्मंत्री त्रिवेन्द्र रावत की बात को सुना तो दूसरी तरफ काग्रेस के नेताओ को भी खूब सुना इस दौरान बीजेपी और काग्रेस के उम्मीदवारो ने भी थराली की जनता के आगे अपने अपने तर्क रखे और अपने लिए प्रचार प्रसार के दौरान वोट मागे अब तय थराली की जनता को करना है की उनको थरली से किसको विधानसभा पहुचाना हैं और किस को थराली तक ही सीमित रखना हैं ये तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन राजनीतिक गलियारे से ख़बर यही हैं कि ये उपचुनाव जितना बीजेपी के लिए ही नही सीएम त्रिवेन्द्र रावत के लिए भी जरूरी है जबकी काग्रेस के पास खोने को कुछ भी नही पर अगर ये थराली की सीट काग्रेस के पाले मैं। चली जाती हैं तो आने वाले निकाय , नगरपालिका चुनाव के लिए काग्रेस को संजीवनी मिल जाएगी  बहराल प्रचार प्रसार का शोर ख़बर लिखे जाने तक थम चुका था बस अब देखना ये ही है कि थराली की जनता का निर्णय क्या होगा और हर दा की मेहनत रंग लाएगी या फिर त्रिवेन्द्र रावत सरकार की

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