मुख्यमंत्री जी जीओ से प्यास नहीं बुझती!

गाड-गधेरों-नदी-नालों,गंगा यमुना, मंदाकिनी, अलंकनंदा के माएके में मैती प्यासे हैं। इतने प्यासे कि सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सरकार के खिलाफ आग उगली जा रही है। बाकायदा आंदोलन की चेतवानी दी गई है इस संदेश के साथ कि “सीएम साहब जीओ से प्यास नहीं बुझती।”

फेसबुक की वॉल पर अपडेट ये अपील सरकारों का कच्चा चिट्ठा खोल रही है। बता रही है कि अस्थाई राजधानी के सचिवालय मे एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक को जोड़ने के लिए लाखों-करोड़ो की लागत का पुल बना दिया जाता है। लेकिन रुद्रप्रयाग जिले में भरदार की जनता प्यासी है और सरकार की वादाखिलाफी की पोल खोल रही है। कि जीओ से प्यास नहीं बुझती आप भी पढ़िए भरदार से आई इस अपील को

अपील

सम्मानित भरदार क्षेत्र की जनता,
सरकार पर तमाम उम्मीदों और वादों पर विश्वास के बावजूद आज जलापूर्ति के मामले में हम सब अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। जब माननीय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी यहां आए थे तो उन्होंने बड़े गर्व के साथ कहा था कि हम वादा नहीं करते, जीओ साथ लेकर आए हैं। जीओ तो जारी हो गया, लेकिन पैसा आज तक रिलीज़ नहीं हुआ। उधर, भरदार क्षेत्र में जल संकट लगातार गहरा रहा है।

हम, हमारी बहनें, बेटियां, बहुएं, मां सब पानी की तलाश में दिन गुजार रही हैं। उन्हें मीलों तक पैदल चलकर पानी लाना पड़ रहा है। आखिर कब मिलेगा भरदार को पानी। सरकारी उदासी से भरदार की जनता प्यासी है। सीएम साहब के रुद्रप्रयाग दौरे और जीओ के दावे को भी लम्बा समय बीत चुका है और हम गर्मियों में बूँद-बूँद पानी को तरस रहे हैं। भरदार पेयजल योजना के लिए अब तक शासन ने पैसा अवमुक्त नहीं किया हैं। आखिर ये पैसा कब मिलेगा, जब प्यास से हमारा दम निकल चुका होगा? दस साल से योजना पर काम चल रहा है और योजना पूरी नहीं हुई। ग्रामीण आस लगाए बैठे हैं और उधर अफसर और नेता एयरकंडीशनर कमरों में मिनरल वाटर पी रहे हैं। हम गाड़-गदेरे के सहारे जी रहे हैं।

सरकार ने पानी की समस्या दूर करने के लिए वर्ष 2006 में जवाड़ी-रौठिया ग्राम समूह पंपिंग योजना को स्वीकृति दी थी और इसके लिए 1294.64 लाख रुपये की योजना को स्वीकृति भी दी थी, लेकिन कभी वन भूमि की अड़चन तो कभी धन खत्म होने से काम लटकता रहा। विभागों के बीच तालमेल न होने से हम प्यासे रह गये हैं और अब सब्र की इन्तहा हो गयी है। अपने अधिकार के लिए हमें मिलकर आवाज उठानी होगी। सरकार कुम्भकरणीय नींद में है, जब तक हम उसके कानों तक ढोल-दमाऊं और सरकार विरोधी नारों की आवाज नहीं पहुंचाएंगे, उसकी नींद नहीं टूटेगी। आखिर कब तक सहन करेंगे यह अन्याय? क्षेत्र की जनता से विनम्र अपील है कि अपनी लड़ाई खुद लड़ो। देखना, तभी हमें हमारा हक मिलेगा।

अब नहीं सहना है, अपना हक लेके रहना है।
आओ साथ मिलकर चलें, मिलकर लड़ें।।

सीएम साहब उत्तराखंड बोलता है!

(अपील  मोहित डिमरी की फेसबुक से साभार )

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