शहीद की बेटी ने कहा, “पापा आसमान में स्टार बन गए हैं” तो सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कहा,ये बलिदान युगों युगों तक याद रखा जाएगा!

देहरादून– मातमी माहौल के बीच शहीद पिता के ताबूत को देख जब मासूम बेटी ने कहा, पापा आसमान में स्टार बन गए हैं, तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गई और दिलों पर बिजलियां गिर गई। मासूम बिटिया की पुकार कुछ ऐसी थी कि अंतरआत्मा उस सरकार को कोसने में जरा भी नहीं हिचकी जो कभी कहा करती थी एक सिर के बदल दस सिर लाए जाएंगे। ये जानते हुए भी कि युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है।

आलम ये है कि उत्तराखंड के घरों में सरहदों से ताबूतों के आने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। कहीं मां छाती पीट पीट कर अपने लाल को याद कर रही है तो कहीं उम्र से पहले ही पत्नी को बेवा बनना पड़ रहा है। वो मंजर दानिशमंद जमात के सीने में बरछियां चला रहा है जब मांग का सिंदूर पोंछा जा रहा हैं और कलाइयों की चूड़ियां तोड़ी जा रही हैं। काश सियासत भी कभी इस मातमी माहौल को देखे तो क्या पता उसका भी हृदय परिवर्तन हो जाए।

बहरहाल उत्तराखंड की वादियों में जन्म लेने वाला भारत मां का बेटा शहीद दीपक नैनवाल की पार्थिव देह आज पंचतत्व में विलीन हो गई है। अमर शहीद दीपक नैनवाल  का शव आज ही उनके देहरादून स्थित आवास में लाया गया और आज ही हरिद्वार में पूरे सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।

मुल्क के लिए खुद को फना करने वाले दीपक नैनवाल की शहादत पर सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने सेना के वीर जवान दीपक नैनवाल को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। सीएम रावत ने कहा दीपक वीरभूमि उत्तराखंड की सैन्य परंपरा निभाते हुए देश पर कुर्बान हुए, उनका ये बलिदान युगों युगों तक याद रखा जाएगा।

गौरतलब है कि 10 अप्रैल को कश्मीर के अनंतनाग आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद दीपक नैनवाल को तीन गोलियां लगी थी। गंभीर रूप से घायल होने के बाद दीपक का इलाज चल रहा था। दो गोलियां निकाली भी गई थी, लेकिन एक गोली फंसी रह गई।

सेना के डॉक्टर कोशिश करते रहे, इलाज के दौरान कभी उनकी तबियत ठीक हो जाती तो कभी खराब। बताया जा रहा है कि इलाज के दौरान उन्होंने पुणे से अपनी मां से भी टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात भी की थी। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी सेना दीपक को नहीं बचा पाई और दीपक नैनवाल अमर होकर सदा के लिए भारत मां की गोद में सो गया।

बहरहाल नाइन महार रेजिमेंट में तैनात अमर शहीद दीपक का शव जब कमांडिंग ऑफिसर अजय सिंह शेखावत की अगुवाई में सैनिक टुकड़ी आवास पर लेकर पहुंची, तो ताबूत में रखे शव को देख कर घर में कोहराम मच गया।

हालांकि अमर शहीद दीपक नैनवाल अमर रहे के नारों की गूंज से मातमी माहौल में गर्व मिश्रित गम भी घुल गया। लेकिन न मां के आंसू रुके न उस पत्नी के जो अब कभी भी सिंदूर नहीं पहन पाएगी। गमों का पहाड़ ऐसा टूटा कि सैनिक दीपक के मासूम बच्चे पिता की छाया से हमेशा के लिए महरूम हो गए। मौत के क्रूर पंजों से नवाकिफ बेटी ने तिरंगे में लिपटे ताबूत में पिता को देखा तो रोते हुए कह उठी,” पापा आसमान में स्टार बन गए हैं।” मासूम समृद्धि की यह बात जिसने भी सुनी उसकी आंखें भर आई और कलेजा छलनी हो गया।

हालांकि शहीद दीपक नैनवाल की रगों में उस परिवार का लहू बहता था जिसकी तीन पीढ़ियां मुल्क के हिफाजत के लिए रही। पिता चक्रधर नैनवाल सेना ने 10 गढ़वाल राइफल में नौकरी करते हुए 1971 के भारत-पाक युद्ध, कारगिल युद्ध और बेलीपार ऑपरेशन में हिस्सा लिया। वहीं दादा सुरेशानंद नैनवाल भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे और देश की आजादी में अहम योगदान दिया।

बहरहाल सेना ने अपना बेहद अनुशासित कमांड़ो खो दिया है। ये बात शहीद दीपक नैनवाल की नाइन महार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर अजय सिंह शेखावत ने उन्हें  श्रद्धांजलि देते हुए कही।

वहीं बेटे की शहदत से गमजदा पूर्व सैन्य अफसर पिता चक्रधर नैनवाल ने कहा बेटे की शहादत पर गर्व है, लेकिन इस उम्र में बेटे के शव को कंधा देना जिंदगी का सबसे बड़ा दुख है।

काश देश की सियासत उत्तराखंड के परिवारों की इन कराहों का मतलब समझ पाती, कि आखिर पिता ने क्यों इसे अपना सबसे बड़ा दुख करार दिया और मासूम बेटी ने क्यों कहा कि उसके पिता आसमान में स्टार बन गए हैं।

बोलता उत्तराखंड परिवार की ओर से अमर शहीद दीपक नैनवाल को हार्दिक श्रद्धांजलि और उस ईश्वर से प्रार्थना कि नैनवाल परिवार को इस असहनीय गम को सहने की अपार शक्ति दे।

Leave a Reply