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उत्तराखंड में तीरथ सरकार और स्वास्थ्य विभाग के कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क

देहरादूनः उत्तराखंड में तीरथ सरकार और स्वास्थ्य विभाग के कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क नजर आ रहा है. जो कोरोना मरीजों के साथ किसी मजाक से कम नहीं है. जो उनकी जान पर भी भारी पड़ सकता है. यह हम नहीं सरकार के ही दवाइयों को लेकर बनाए गए, उस प्रोटोकॉल तस्दीक कर रही है. जिसमें होम आइसोलेशन में घर पर ही कोरोना का इलाज करने के दौरान जरूरी दवाइयों की डोज की जानकारियां दी गई है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि कहने को तो सरकार दवाइयों की डोज समेत कोरोना के इलाज को लेकर इस्तेमाल में लाई जाने वाली दवाइयों का खूब प्रचार-प्रसार कर रही है. दूसरी ओर होम आइसोलेशन के लिए दवाइयों के डोज से जुड़े इस प्रोटोकॉल को ही स्वास्थ्य विभाग खुद फॉलो नहीं कर रहा है.

किसी भी बीमारी में दवाइयों का अहम रोल होता है, दवाइयों के समय पर खाने से लेकर डॉक्टर की ओर से बताई गई सभी दवाइयों की पूरी डोज लेनी बेहद जरूरी होती है. हम जानते हैं कि यह सभी बातें आपको पता है, लेकिन शायद स्वास्थ्य विभाग के बड़े-बड़े डॉक्टर और जानकार समेत राज्य सरकार भी इन आम जानकारियों को भूल गई है. शायद इसलिए सरकार होम आइसोलेशन के लिए बनाई गई कोरोना किट को ही पूरी डोज के साथ मरीजों तक नहीं पहुंचा रही है.

भले ही आपको लग रहा है कि यह कैसे संभव है, लेकिन यही हकीकत है. सबसे पहले आपको बता दें कि राज्य में 90% मरीजों के घर पर ही होम आइसोलेशन के दौरान कोरोना किट के जरिए इलाज होने का दावा स्वास्थ्य विभाग कर रहा है. दावों पर यकीन करें तो राज्य में 50,000 लोग अब भी होम आइसोलेशन में हैं और इन लोगों को कोरोना किट के माध्यम से इलाज दिया जा रहा है.

सबसे पहले सरकार की ओर से जारी किए गए उस पर्चे में लिखी दवाइयों के बारे में जानिए. जिसे आम लोगों को भी प्रचार-प्रसार के जरिए बता कर संक्रमण की जांच रिपोर्ट आने से पहले ही संदिग्ध मरीजों को भी खाने के लिए कहा जा रहा है.

कोरोना किट में मिल रही दवाइयां-

  • पर्ची के मुताबिक, Tab Ivermectin 12 को 3 दिनों तक सुबह और शाम मरीज को खाने के बाद लेना है. यानी हर दिन 2 गोली के लिहाज से 6 गोलियां 3 दिनों में खानी है. जबकि, स्वास्थ्य विभाग कोरोना किट में 3 गोलियां ही दे रहा है.
  • विटामिन सी 500 एमजी की गोली को एक दिन में तीन बार खाने के लिए लिखा गया है. 10 दिनों तक यह गोलियां खानी है. इस हिसाब से 30 गोलियां कोरोना किट में होनी चाहिए थी, लेकिन इसमें केवल एक पत्ता यानी 10 गोलियां ही दी गई हैं.
  • जिंक की टेबलेट 50 एमजी दिन में दो बार 10 दिनों तक खाने के लिए लिखा गया है. यानी 20 गोलियां मरीज को खानी है, लेकिन किट में 10 गोलियां ही दी गई हैं.
  • सरकार की ओर से जारी किए गए इस पंपलेट में D3 की कमी को दूर करने के लिए cholecalciferol 60000 IU sachet पाउडर को भी 4 हफ्ते तक दूध के साथ लेने के लिए कहा गया है, लेकिन ऐसा कोई पाउच इस किट में नहीं है।

सवाल यह है कि जब मरीज को दवाइयों की पूरी डोज के लिए दवाइयों की दुकान तक जाना ही पड़ेगा तो फिर इस कोरोना किट की भी क्या जरूरत है? जबकि, कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा घटने का नाम नहीं ले रहा है. हालांकि, राहत की बात ये है कि रिकवरी रेट में बढ़ोत्तरी हुई है.

सवालों से बचते नजर आ रहे संबंधित अधिकारी

वहीं, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बचते हुए नजर आ रहे हैं. मामले पर स्वास्थ्य सचिव से लेकर डीजी हेल्थ तक से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. लिहाजा, सरकार में शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल से जब इसके मद्देनजर सवाल किया गया तो उन्होंने मामले पर बेहद अजीब जवाब देते हुए परीक्षण कराने की बात कही है.

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