थम गया आंदोलन, भरदार की जनता ने कहा धन्यवाद टीएसआर सरकार आपका बहुत-बहुत शुक्रिया,

रुद्रप्रयाग-  भरदार की जनता के आंदोलन ने रंग दिखाया लिहाजा बोलता उत्तराखंड की खबर का असर हुआ और टीएसआर सरकार के राज में भरदार पेयजल योजना को अमलीजामा पहनाए जाने की कवायद शुरू हो गई है।

योजना के पहले चरण में क़रीब पाँच करोड़ रुपए की धनराशि उत्तराखंड शासन से अवमुक्त हो गई है। इसके अलावा इलाके की  दो क्षतिग्रस्त योजनाओं की मरम्मत के लिए भी शासन ने अपनी थैली खोली है।

इस खबर के साथ ही जनता का जल के लिए आदोंलन खत्म हो गया है। वहीं  थराली उपचुनाव के माहौल के बीच सरकार ने चैन की सांस ली है । थराली की जनता के मूड को अपने पक्ष में करने के लिए सरकार भरदार योजना का हवाला देकर अपनी पीठ थपथपवा सकती है।

जल निगम ने योजना के लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं। जल्द ही योजना पर काम शुरू हो जाएगा।  हालांकि योजना की गुणवत्ता पर निगरानी रखके लिए जल्द ही एक समिति गठित किए जाने का भी आंदोलनकारी समिति ने निर्णय लिया गया है। ताकि भरदार पट्टी के प्यासी जनता की प्यास बुझती रहे।

गौरतलब है कि वर्ष 2006 में जवाड़ी-रौठिया ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना की स्वीकृत मिली थी। योजना निर्माण के लिए शासन से 1294.64 लाख रुपए अवमुक्त हुए थे। वन भूमि के चलते योजना पर पर वर्ष 2010 में काम शुरू हुआ। जल निगम ने वर्ष 2013 तक लस्तर गाढ़ से घेघड़खाल से ढाई किमी पीछे तक पचास किमी पेयजल लाइन बिछाने का काम पूरा किया था।

लेकिन बजट खत्म होने के कारण योजना का काम लटक गया। मजदूरी  और सामान के दाम बढ़ने का हवाला देकर जल निगम ने शासन को रिवाइज स्टीमेट भेजा। इसके बाद करीब 12 करोड़ की धनराशि में लगभग पांच करोड़ की धनराशि की वित्तीय स्वीकृति मिली थी।

इसका शासनादेश जारी होने के बावजूद पैसा अवमुक्त नहीं हो रहा था। धनाभाव के कारण टैंक, ग्रेविटी ओर वितरण लाइन का काम शुरू नहीं हो पा रहा था। जबिक इस पेयजल योजना से भरदार क्षेत्र की 52 बस्तियों की प्यास बुझनी थी। बावजूद इसके लालफीताशाही का रवैया जुल्म में तब्दील होता रहा। नतीजा ये हुआ कि जनता को आंदोलन करना पड़ा। बोलता उत्तराखंड भरदार की जनता की आवाज को बुलंद करता रहा नतीजतन सरकार को झुकना पड़ा।

19 अक्टूबर 2016 को 12.49 करोड़ रुपए नाबार्ड के तहत जवाड़ी-रौठिया ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना (पुनरीक्षित) निर्माण कार्य की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति का शासनादेश जारी हुआ था। जिसके तहत पहले चरण में 4.96 करोड़ रुपए की धनराशि वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई थी।

जल निगम के सहायक अभियंता प्रवीण शाह ने बताया कि पेयजल योजना के निर्माण के लिए शासन से 4.96 लाख रुपए प्राप्त हो गए हैं। टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना का निर्माण शुरू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री जी जीओ से प्यास नहीं बुझती!

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