टिहरी झील अभिशाप नही वरदान ,नवंबर मे टिहरी महोत्सव का आयोजन

 

टिहरी झील अभिशाप नही वरदान है पर तब जब नीति नियंता नीतियां ठीक बनाकर धरातल पर उन महत्वपूर्ण योजनाओं को उतारे , स्थानीय लोगो को उनका अधिकार उनका हक दे , पिछले 3 सालों से हम देख रहे है कि कोटी कलोनी मे मतलब टिहरी झील में कई कार्यक्रमो का आयोजन सरकार ने कराया , तो पानी मे खेले जाने वाले सभी खेलो खेलाया गया पर जितना इस झील मे अब तक विकास हो जाना चाइए था वो नही हो पाया है अब नवंबर से सरकार ने तय किया है कि टिहरी महोत्सव शुरू होगा। इस बार यह महोत्सव नए तरह से मनाया जाएगा।                                      खाका तैयार किया जा रहा है कि टिहरी झील के आसपास पर्यटन की गतिविधियां विकसित करने की योजना बन गई है मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह, स्वयं कही बार सचिवालय में टिहरी झील के विकास के बारे में बैठक कर चुके है उनका कहना है कि टिहरी झील के आसपास के गांव में होम स्टे की योजना को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे कि गांव वालों की आमदनी बढ़ाई जा सके। ओर उनकी आर्थिकी मजबूत हो उन्होंने सचिव पर्यटन से कहा कि इन्वेस्टर्स मीट के लिए निवेश के लायक परियोजना की डीपीआर तैयार रखें। जिससे कि पर्यटन के क्षेत्र में पूंजी निवेश आकर्षित किया जा सके। सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने बताया कि 176 करोड़ रुपये की लागत की 5 परियोजनाओं का डीपीआर तैयार कर लिया गई है ओर इसके लिए भूमि का भी चयन भी कर लिया गया है। इसमें से कोटी अठुर में हॉस्पिटैलिटी के लिए स्टार होटल, गंजना में वैलनेस के लिए हिलसाइड रिसोर्ट, गोरण में वैलनेस के लिए लेकसाइड रिसोर्ट, गंजना में हॉस्पिटैलिटी के लिए थीम रेस्टॉरेंट, गोरण में आयुष के लिए इंस्टीटूट ऑफ आयुर्वेद शामिल हैं। टिहरी के मास्टर प्लान बनाने पर भी लगातार चर्चा चल रही है इन बैठकों मैं सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, अरविंद सिंह ह्यांकी, विनोद प्रसाद रतूड़ी, डीएम टिहरी सोनिका सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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