गैरसैंण और गन्ना पर हरीश रावत बनाम त्रिवेंद्र सिंह रावत

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का एलान
5 दिसम्बर को प्रातः 11 बजे, विधानसभा भवन के सम्मुख, किसानों की समस्या को लेकर, विशेष तौर पर गन्ने के सवाल पर ‘‘उपवास’’ पर बैठूंगा।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लिखते है कि
उत्तराखण्ड में किसान है त्रस्त, नौजवान लस्त-पस्त, उत्तराखण्ड अस्त-व्यस्त और सरकार है, मस्त, यह स्थिति बदलनी है। गन्ने का भुगतान नहीं, खरीद मूल्य दूर घोषित नही, बेबस किसान औने-पौने दाम पर चरखी में गन्ना बेच रहा है, पहले धान, अब गन्ना, किसान बदहाल है। मैं मजबूर हूॅ, त्रिवेन्द्र सिंह जी की वजन घटाने की सलाह पर अमल करने के लिये और 5 दिसम्बर को प्रातः 11 बजे, विधानसभा भवन के सम्मुख, किसानों की समस्या को लेकर, विशेष तौर पर गन्ने के सवाल पर ‘‘उपवास’’ पर बैठूंगा। गैरसैंण और गन्ना, दोनों मेरी आत्मा के हिस्सा हैं।


इससे पहले हरीश रावत ने लिखा था कि
#गैरसैंण को लेकर कुछ भ्रामक बातें कही जा रही हैं, गैरसैंण को लेकर कुछ दुष्चक्र भी रचा जा रहा है, खैर ऐसा करने वाले भी सामने आ जायेंगे। माननीय #मुख्यमंत्री जी के बयान के बाद कि, गैरसैंण में ठंड लगती है, अब राजनीति में या तो गैरसैंण समर्थक हैं, ठंडे समर्थक हैं, जो ठंड में भी खड़े होने को तैयार हैं और दूसरी तरफ ओ लोग हैं, जिनको सुविधा चाहिये, जिनको कोजी-कोजी वातावरण चाहिये। देखते हैं, विधायकों से मैंने स्वयं अनुरोध किया है कि, उनको गैरसैंण नहीं आना चाहिये, वो विधानसभा में रहें, जनता के बहुत सारे सवाल हैं, उनको उठायें। मगर गैरसैंण के झण्डे को ऊंचा उठाकर के रखने वाले लोग इस अवसर पर गैरसैंण में जुटेंगे ही, क्योंकि यदि हम अपना गुस्सा नहीं दिखायें, अपनी तकलीफ नहीं बतायेंगे, तो फिर यह ठंड गैरसैंण के साथ, उत्तराखण्ड के साथ चिपक जायेगी, फिर हर कोई ठंड का बहाना लेकर गैरसैंण और गैरसैंण जैसी जगहों से कन्नी काटने लगेगा। मेरी मजबूरी है कि, मुख्यमंत्री जी के इस बहुत दुःखद बयान के बाद, मैं चुप बैंठू यह सम्भव नहीं है। इसलिये 4 तारीख को मैं सांकेतिक ही सही अपने उपवास के जरिये, अपना विरोध प्रकट करूंगा। आप भी जहां हैं, जैसे भी हैं, जिस रूप में हैं, अपना विरोध अवश्य प्रकट करें, “गैरसैंण” जीतना चाहिये।

आपको बता दे कि गैरसैंण में शीतकालीन सत्र न करवाने के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के गैरसैंण में धरना देने के ऐलान ने नया मोड़ ले लिया है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरीश रावत के धरने के ऐलान पर चुटकी लेते हुए इसे डायटिंग के लिए दिया जा रहा धरना क़रार दिया था तो हरीश रावत ने फिर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र की बात को कुछ इस तरह लिया कि वे अब 5 तारीख को देहरादून में भी धरना देगे
बता दे कि इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा था कि वह तीन दिन कुमाऊं-गढ़वाल के सबसे ठंडे गांवों में रुककर यह बताएंगे कि ठंड से कोई दिक्कत नहीं है.

जानकारी अनुसार त्रिवेंद्र रावत सरकार ने यह शीतकालीन सत्र गैरसैंण में करवाने से यह कहकर इनकार कर दिया था कि गैरसैंण में बहुत ठंड पड़ती है और इससे बुजुर्ग विधायकों को दिक्कत हो सकती है. सदन के सबसे बुजुर्ग विधायकों में से एक पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल ने इसका विरोध किया और गैरसैंण में सत्र कराने की चुनौती दी.।
फिर कांग्रेस के इस स्टैंड की हवा नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश ने यह कहकर निकाल दी थी कि गैरसैंण में ठंड पड़ती है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता.।

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