त्रिवेंद्र राज मै कारोबारियों को त्रिवेंद्र सरकार ने दी बड़ी सौगात, पढ़ें महत्वपूर्ण फैसले।


त्रिवेन्द्र सरकार ने उत्तराखंड में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए मैदानों में भूमि खरीद के लिए 12.5 एकड़ की लगाई सीलिंग हटा दी है। औद्योगिक प्रयोजन के लिए कोई भी कारोबारी अब ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, देहरादून और नैनीताल के तराई क्षेत्रों में तय सीमा से अधिक भूमि खरीद या लीज पर ले सकता है। ओर बता दे कि केवल कृषि कार्यों के लिए भूमि खरीद पर रोक रहेगी और चाय बगान नहीं बेचे जा सकेंगे। मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया। जल्द ही नई व्यवस्था के लिए अध्यादेश लाया जाएगा। इसके अलावा मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण देहरादून का एमडीडीए में विलय कर दिया गया है।
साथ ही सरकार ने पिरूल (चीड़ की पत्तियों) के उठान पर सरकार से मिलने वाले डेढ़ रुपये प्रति किलोग्राम के साथ अब वन विभाग एक रुपये प्रति किलोग्राम देगा। मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय पेंशन योजना में सरकार का योगदान 10 प्रतिशत से 14 प्रतिशत कर वर्ष 2005 के बाद के पेंशनरों को राहत दी है।


वही शासकीय प्रवक्ता और मंत्री मदन कौशिक ने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में प्रस्तुत 15 प्रस्तावों पर मुहर लगी। सरकार ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
मैदानों में अब 12.5 एकड़ से अधिक भूमि औद्योगिक  प्रयोजन के लिए खरीदी जा सकेगी। मंत्रिमंडल में यह तर्क दिया कि तराई क्षेत्रों में औद्योगिक प्रतिष्ठान, पर्यटन गतिविधियों, चिकित्सा तथा चिकित्सा शिक्षा के विकास के लिए निर्धारित सीमा से अधिक भूमि की मांग की जा रही है। कई प्रस्ताव इसी कारण लंबित हैं। इसके लिए उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम व्यवस्था 1950) में परिवर्तन किया गया।
वही कौशिक ने बताया कि नौ पर्वतीय जनपदों में उद्योगों के लिए 12.5 एकड़ से अधिक खरीद की व्यवस्था पहले से थी, लेकिन मंत्रिमंडल में उसमें मामूली संशोधन करते हुए कृषि एवं फल प्रसंस्करण, औद्योगिक हैंप एवं प्रसंस्करण, चाय बगान प्रसंस्करण तथा वैकल्पिक ऊर्जा परियोजना के लिए किसी व्यक्ति, संस्था, समिति, न्यास, फर्म, कंपनी तथा स्वयं सहायता समूह को भूमि लीज या पट्टे पर दिये जाने के लिए संशोधन किया है।

बता दे आपको त्रिवेन्द्र सरकार के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय

– राष्ट्रीय पेंशन योजना एनपीएस के अंतर्गत नियोक्ता की अविधान राशि को 10 प्रतिशत से बढ़ा कर 14 प्रतिशत कर दिया गया है। योगदान को बढ़ाने से 70 हजार कर्मचारियों को फायदा होगा। इससे 150 करोड़ रुपये सालाना खर्च बढ़ेगा।
– उत्तराखंड (बंदियों के दंडादेश निलंबन) नियमावली में संशोधन। 2 माह से अधिक दंडादेश (पैरोल) को भी एक कलेंडर वर्ष में 2 बार अनुमति मिल सकेगी।
– उत्तराखंड विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) देहरादून का मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण में विलय।
– विद्युत नियामक आयोग की वार्षिक रिपोर्ट विधानसभा सदन में रखी जाएगी।
– केंद्रीय विद्युत अधिनियम, विद्युत नियामक आयोग वर्ष 2017-18 विधानसभा सदन में रखी जाएगी।
– आरएस टोलिया प्रशासनिक अकादमी के ढांचे में स्थिति संयुक्त निदेशक लोक प्रशासन के पद को उप निदेशक निसंवर्गीय अभियांत्रिकी में स्थानांतरित किया जाएगा।
– 2016 अर्द्धकुंभ में लल्लू जी एंड संस के बकाया 1 करोड़ 76 लाख 50 हजार 358 रुपये का 15 प्रतिशत ब्याज के साथ होगा भुगतान।
– कौलागढ़ में 28.37 हेक्टेयर भूमि वन विभाग को वापस किया जाएगा इसके सीमांकन हेतु राजस्व एवं वन विभाग मिलकर सीमांकन करने के लिए कमेटी बनायी गई है।
– उत्तराखंड राजकीय विभाग अधीनस्थ लेखा संवर्ग सेवा नियमावली को मंजूर।
– उत्तराखंड सहकारी समिति एवं पंचायतें तथा स्थानीय निकाय की लेखा परीक्षा कार्मिकों की नियमावली को मंजूर।
– नगर निगम के अधीन वित्तीय अधिकार सचिव की अध्यक्षता के स्थान में जनपद में नगर आयुक्त के अधीन समिति को दिया गया।
– रिट याचिका के परिणाम स्वरूप वन क्षेत्राधिकार के अंतर्गत 3 श्रेणियों में वन क्षेत्र को परिभाषित किया गया है।
-संविदा के तहत भर्ती होगा पैरा मेडिकल स्टाफ लगभग 2000 हज़ार पद



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