त्रिवेंद्र सरकार का बड़ा फैसला:  देवभूमि में लौटे प्रवासियों के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना मंजूर ।

अब उद्योग लगाने या छोटा व्यवसाय लगाने के लिए मिलेगी 15 से 25 प्रतिशत सब्सिडी।
ये भी जाने : मैन्युफैक्चरिंग के लिए 25 लाख, सर्विस सेक्टर में कारोबार के लिए 10 लाख तक मिलेगी सब्सिडी।

पहाड़ों में 25 प्रतिशत और मैदानी क्षेत्रों में 15 प्रतिशत तक मिलेगी सब्सिडी।

त्रिवेंद्र सरकार ने की इस योजना के लिए 15 करोड़ के बजट की व्यवस्था ।

आपको बता दे कि इस योजना के तहत अपने गांव लौटे प्रवासी अपने अनुभव के आधार पर मेन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर के साथ ही छोटा व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं।
इसके लिए ही त्रिवेंद्र ब सरकार 15 से 25 प्रतिशत तक सब्सिडी देगी।
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की खास बात यह है कि इसमें दुकान खोलने से लेकर मुर्गीपालन, पशुपालन, डेयरी और 25 लाख तक के मैन्युफैक्चरिंग और 10 लाख तक सर्विस सेक्टर के उद्योग लगा सकते हैं।
ओर फिर आवेदन स्वीकृत होते ही बैंकों से ऋण उपलब्ध कराने के साथ ही सब्सिडी तुरंत मिल जाएगी। लॉकडाउन से गांव लौटा कोई प्रवासी कृषि, पशुपालन डेयरी, फूड प्रोसेसिंग या किसी तरह की दुकान खोलकर रोजगार करना चाहता है तो सरकार उसे 15 से 25 प्रतिशत तक सब्सिडी देगी। पहाड़ों के लिए 25 प्रतिशत और मैदानी क्षेत्र में कारोबार करने पर 15 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी।
इसके लिए त्रिवेंद्र सरकार ने 15 करोड़ के बजट की व्यवस्था की है जिससे प्रवासियों को तत्काल योजना का लाभ मिल सके। योजना में सभी तरह के कारोबार और उद्योग लगाने की अनुमति है।
तो वही सरकार 25 लाख से बड़े प्रोजेक्टों को एमएसएमई नीति में अनुदान देगी। एमएसएमई नीति के तहत लगने वाले उद्योगों के लिए 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी देने की व्यवस्था है। इसके अलावा प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से छोटे कारोबार के लिए अनुदान दिया जा रहा है। लेकिन इसमें पशुपालन, मुर्गी पालन समेत अन्य रेड श्रेणी के कारोबार के लिए अनुमति नहीं है।
बहराल त्रिवेंद्र सरकार का ये फैसला सुखद है
ओर इस कोरोना काल मे
आपदा को पहाड़ के लिए अवसर मैं बदलने का मौका है।
एक बार फिर से पहाड़ को आबाद करने का मौका है।
जिसमें सरकार द्वारा लिए गए निर्णय पहाड़ के भविष्य को तय करेंगे।


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