साल 1994 से ही
दो बातें किलयर कट थी
पहली बात
अपने उत्तराखंड की राजधानी पहाड़ मै होगी। बोले तो गैरसैंण।
ओर दूसरा शराब मुक्त उत्तराखंड।
यानी नशा नहीं, रोज़गार चाहिए।

4 मार्च, 2020 की तारीख इतिहास के पन्नो मै दर्ज हो गई है
4 मार्च की शाम मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी का ऐलान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
ओर उसके बाद से आज तक
जो खुशी का , उत्साह का माहौल बना हुआ है पहाड़ से लेकर मैदान तक वो किसी से छुपा नही है।
हर तरफ जश्न है और
त्रिवेंद्र के जय जय कार की गूंज
इस बीच ही आज गैरसैंण मैं ( Bharani send)
बोले तो ग्रीष्मकालीन राजधानी की पहली बर्फ बारी भी देखने को मिली और खुशी का वह माहौल उत्साह अपने आप में अद्भुत था मानो जैसे भगवान भी कह रहे हो वाह त्रिवेंद्र तुम्हारा फैसला मुझे पसंद आया।
हिमालय भी कह रहा त्रिवेंद्र जो तुमने फैसला लिय वह मुझे पसंद आया और यह लो बर्फ़बारी ये संकेत है मेरी ख़ुशी का मानो जैसे खुद हिमालय कह रहा हो।

ओर ये मौसम बोल रहा हो , पहाड़ बोल रहा हो,
कह रहा हो राज्य के मनमौजी अफसरशाहों को, पहाड़ छोड़ मैदान में अपना आशियाना बना बैठे हैं उन नेताओं को,
उन नौकरशाहों को पहाड़ चढ़ने की आदत डालनी होगी ऐसे मौसम की आदत डालनी होगी पहाड़ जैसा कठिन जीवन जीने की आदत डालनी होगी चुनौतियों का सामना करना होगा अब देहरादून के सचिवालय में बैठकर एसी के अंदर और बिसलेरी के पानी को छोड़ना होगा ,
चाय की चुस्की ओं के साथ अब हस्ताक्षर करने वाला काम नहीं चलेगा, अब ग्राउंड जीरो पर आकर पहाड़ में रहकर पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार ग्राउंड जीरो के अनुसार काम करना होगा और रिजल्ट देना होगा ,मार्च के महीने में पहाड़ बता रहा है कि मैं पहाड़ का मौसम हूं , मैं हिमालय हूं कभी भी अपना रूप बदल सकता हूं आपको चुनौतियों की आदत डालनी होगी और इन्हीं स्थितियों में बेहतर काम करना होगा मेरे पहाड़ वासियों को हर सुविधा देनी होगी ,उनका विकास करना होगा उनके दुख को दूर करना होगा, जिसकी आप पगार लेते हैं। अब आपकी भी परीक्षा है ।

ओर यही खुशी कल से लेकर आगे ।सरकार के तीन साल के काम काज पूरे होने वाले दिन तक बनी रहेगी यानी कि 18 मार्च तक। या उससे भी आगे
गैरसैंण से देहरादून पूरे शबाब पर है कई विधायकों के साथ मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष तक लोक वाद्यों की थाप पर थिरकते नज़र आए है
मुख्यमंत्री का जगह जगह पहाड़ो मैं स्वागत हो रहा है
पर सुनो इस बीच ही
राज्य के काबिल अफसरों ने गुरुवार शाम 5 मार्च को गैरसैंण से पहला शासनादेश जारी भी कर दिया लेकिन इसे लेकर विभिन्न वर्गों में इसे प्रतिक्रियाएं अच्छी नहीं आईं. क्योंकि यह शासनादेश शराब को सस्ती किए जाने को लेकर था जी हां
विपक्ष मतलब कांग्रेस
ओर कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने तो इस शासनादेश पर हमला बोल डाला उन्होंने कहा कि
मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं और राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं का हवाला देते हुए राजधानी की घोषणा की लेकिन उन्हें शायद यह पता ही नहीं कि शराब के विरोध में कितनी बड़ी संख्या में मातृशक्ति सड़कों पर आंदोलनरत रही. गैरसैंण से पहला फ़ैसला शराब सस्ती करने के पक्ष में फैसला सरकार की मंशा को ही नहीं उसके शराब प्रेम को भी दर्शाता है. यानी, हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और
बहराल विपक्ष का काम है अपना विपक्ष का धर्म निभाना
जिसे वो निभा रहा है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का यह ऐतिहासिक निर्णय यह फैसला सिर्फ आपका है व्यक्तिगत रूप से इसका सारा श्रेय आपको जाता है लिहाजा हम बार-बार कहते हैं इसलिए सारी चुनौतियां भी आपके सर पर ही हैं,
और आपके राजनीतिक शुभचिंतकों का भी आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है ऐसे में सावधान तो आपको ही रहना होगा
कहीं ऐसा ना हो कि करेगा कोई और फिर भरेगा कोई।
सावधान रहना ऐसे कुछ राज्य में मनमौजी अफसर साहब भी हैं इतिहास गवाह है जो मुख्य की लुटिया डुबाने से भी बाज नही आये, चाटुकारिता की राह पर चलने वाले भी हैं , और ऐसे ही कुछ वो लोग भी हैं जो हां जी हां जी का कार्य सिर्फ करते है
कार्य नही।
मतलब सत्य को हटाकर कहने वाले ।
अब जिम्मेदारी बड़ी है पीएम मोदी और अमित शाह ने तो आपको उत्तराखंड का मुख्यमंत्री 18 मार्च 2017 को बनाया लेकिन पहाड़ की भावना ने जन भावना ने आपको अपना मुख्यमंत्री 4 मार्च 2020 से चुना है लिहाजा आपको 4 मार्च 2020 से 22 तक वो सब कुछ करके दिखाना होगा पहाड़ के लिए ,वो पहाड़ के विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करना होगा , पहाड़ की जनता को विस्वास मैं लेकर
ताकि पहाड़ वासियों को लगे कि हां वाक्य में यह है पहाड़ का मुखिया जिसका नाम त्रिवेंद्र है
त्रिवेंद्र की असली परीक्षा अब आरंभ है … अग्निपथ पर अब त्रिवेंद्र है …..
और शुभकामनाएं आपको है क्योंकि निर्णय लेने की क्षमता आप में है शुभकामनाएं।
उत्तराखंड सरकार ने शराब व्यवसायियों को बड़ी राहत दी है। प्रदेश में अब बार लाइसेंस तीन साल के लिए मिलेगा। बार संचालकों को तीन साल का शुल्क एक साथ जमा कराना होगा। खास बात यह है कि पुराने बार लाइसेंस धारकों को लाइसेंस शुल्क में दस फीसदी की छूट मिलेगी। जबकि नए बार लाइसेंस धारकों को यह छूट नहीं मिलेगी।
बता दे कि गैरसैंण के ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बाद आबकारी अनुभाग गैरसैंण ने इसकी अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में कहा गया है कि बार लाइसेंस को एक साल, दो साल एवं तीन साल के लिए रिन्यू कराया जा सकेगा।
लेकिन इसके लिए उतने ही साल का लाइसेंस शुल्क जमा कराने के बाद ही इसे रिन्यू किया जाएगा। जबकि आबकारी नीति विषयक नियमावली वर्ष 2020-21 के नियम 21 में यह व्यवस्था की गई है कि शराब की दुकान के लिए आवेदन धरोहर राशि के रूप में कुल राजस्व के 2.5 प्रतिशत के बराबर धनराशि का बैंक ड्राफ्ट प्रस्तुत करना होगा।


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