शर्मनाक सरकारी अस्पताल में फिर महिलाओं ने फर्श पर दिया बच्चे को जन्म , डबल इज़न का ये कैसा राज ?

बाजपुरः अस्पताल में महिलाओं ने फर्श पर दिया बच्चे को जन्म

सीएम सर प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य सुविधा किसी से छुपी नहीं है आये दिन गर्भवती महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का तमाम दावे तो सरकार कर रही है, लेकिन स्थिति जस की तस है. सीएम सर आपको तो मालूम है ही कि दून महिला अस्पताल मे क्या हुवा था और अब ख़बर है कि बाजपुर के सीएचसी में महिला डॉक्टर की कमी के कारण दो महिलाओं में से एक महिला को वार्ड के फर्श में जबकि दूसरी महिला को अस्पताल परिसर में प्रसव कराना पड़ा. सर अस्पताल में 14 पदों में से 12 डॉक्टरों के पद रिक्त चल रहे हैं, ऐसे में सवाल उठना भी लाजमी है कि तमाम दावे और घोषणाएं महज कागजों तक सीमित क्यों है? सीएम सर ये सवाल उठने लगे है भले ही आपकी सरकार पूरा प्रयास कर रही ही कि डॉक्टर की भर्ती अधिक से अधिक राज्य मे की जाए ओर आप कर भी रहे है पर अभी के जो हाल है वो भी तो आपके आगे रखने है ।

हमारे प्रदेश में प्रत्येक गर्भवती महिलाओं और गर्भस्थ शिशु के बेहतर स्वास्थ के लिए तमाम सुविधाएं देने की बात की जाती है. लेकिन बाजपुर चिकित्सालय ना तो नर्स की पर्याप्त संख्या है, ना ही पर्याप्त डॉक्टर तैनात किए गए हैं. सीएचसी में डॉक्टरों और नर्सो की कमी के कारण गर्भवतियों को वार्ड व परिसर के फर्श में ही बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है.
आपको फिर बता दे कि शुक्रवार को जिले के बाजपुर सामुदायिक स्वास्थ केंद्र में महेशपुर निवासी एक महिला ने अपनी गर्भवती बहू को प्रसव के लिए अस्पताल में पहुंचाया था उसी अस्पताल में एक अन्य गर्भवती महिला को भी प्रसव के लिए अस्पताल में लाया गया. गर्भवती महिला की सास ने बताया कि उसकी बहू दर्द से कराह रही थी. महिला ने नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि ड्यूटी पर तैनात नर्स से बहू को देखने की गुहार लगाती रही, लेकिन नर्स ने बच्चा अभी ना होने का हवाला देकर नजरअंदाज किया. उन्होंने बताया कि वार्ड में भर्ती एक अन्य महिला मरीज की मदद से गर्भवती महिला को फर्श पर लिटा प्रसव कराया. शिशु के जन्म की जानकारी मिलने पर ड्यूटी पर तैनात नर्स ने जच्चा और बच्चा को वार्ड में भर्ती कराया. चिकित्सालय परिसर में ही एक अन्य गर्भवती महिला ने भी बाहर ही शिशु को जन्म दिया.

वही इस पूरे मामले में चिकित्सालय अधीक्षक खेमपाल सिंह ने बताया कि मामला की जानकारी उन्हें नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जाएगी. साथ ही कहा कि इस तरह कि घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं. अस्पातल में डॉक्टर और नर्सो के कमी के कारण ऐसी घटनाये हो रही है.
बहराल उम्मीद करती है राज्य की जनता की सीएम त्रिवेन्द्र रावत इन सब बातों को नज़र अंदाज़ नही करेंगे । और रास्ते भी उन्ही को निकालने है क्योकि मुख्यमंत्री के साथ वो राज्य के स्वास्थ्य मंत्री भी है ।

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