सरकार खतरा बढ़ रहा है ओर हालात ठीक नही समय रहते हो एक्शन!

 

पूरे राज्य मे पिछले महीने से हो रही लगातार बरसात ने बता दिया है कि अगर बरसात आगे भी लगातार जारी रहेगी तो इस भारी बारिश के चलते जगह-जगह नए भूस्खलन जोन सामने आ रहे है और भविष्य मे ओर आ सकते है अगर अभी से सतर्क ना रहा गया तो ?अब राज्य के आपदा प्रबंधन महकमे की नींद उड़ना जायज़ होगी, आपको बता दे कि बागेश्वर का कपकोट क्षेत्र, पौड़ी जिले में कोटद्वार के नजदीक लालपुल के नजदीक का क्षेत्र , ओर आस पास के दूसरे इलाके ये डरा रहे है की जान खतरे में है ओर पहाड़ की ज़िंदगी मतलब ( सड़क ) का हाल भी बेहाल करके बता रहे है कि हम भविष्य का खतरा है।

जानकारी अनुसार सचिव आपदा प्रबंधन अमित नेगी कहते है कि इस समस्या से निबटने के मद्देनजर सभी जिलाधिकारियों को नए भूस्खलन जोन का भू-वैज्ञानिक सर्वे कराने को कहा गया है, ताकि इसके आधार पर ट्रीटमेंट किया जा सके।

आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील उत्तराखंड में हर साल ही बरसात जनजीवन पर भारी पड़ती है। खासकर उन पर्वतीय इलाकों में, जो भूस्खलन की जद में हैं। वहां वर्षाकाल काला पानी की सजा से कम नहीं होता। थोड़ी सी बारिश हुई नहीं कि भूस्खलन की आशंका से सांसें अटकने लगती हैं। ओर जब जगह-जगह से सड़कें बाधित हो जाए तो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी तरसना पड़ता है ।
आपको बता दे कि राज्य में विभिन्न मार्गों पर भूगर्भीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील 43 भूस्खलन जोन लोक निर्माण विभाग ने चिह्नित किए हैं। इसके अलावा चार सौ से अधिक गांव भूस्खलन की दृष्टि से खासे संवेदनशील माने गए हैं। ओर जो ये लगातार बरसात हो रही है इस वजह से नए भूस्खलन जोन सामने आ चुके है तो गांवों के लिए भी खतरा लगातार बढ़ रहा है। जो राज्य सरकार के लिए चिंता की बात है ।
जानकारी मिली है कि सचिव आपदा प्रबंधन अमित नेगी ने माना कि इस बरसात में जगह-जगह नए भूस्खलन जोन सामने आए हैं। ओर इस सिलसिले में सभी जिलाधिकारियों से जानकारी मांगी गई है। इसमें सड़कों के साथ ही भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील गांवों के बारे में विस्तृत ब्योरा मांगा गया है। उन्होंने बताया कि जितने भी नए भूस्खलन जोन सामने आ रहे हैं, उनके भू-वैज्ञानिक सर्वे के बाद इनके ट्रीटमेंट के लिए कदम उठाए जाएंगे। इसमें वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान समेत अन्य संस्थाओं की मदद भी ली जाएगी।
वही सचिव आपदा प्रबंधन की माने तो सरोवरनगरी नैनीताल में माल रोड पर भू-धंसाव के मद्देनजर आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र (डीएमएमसी) की टीम निरीक्षण के लिए भेजी गई है। वह स्थलीय निरीक्षण के साथ ही भू-धंसाव के कारणों की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट देगी। इसके अलावा अन्य वैज्ञानिक संस्थानों से भी सहयोग मांगा गया है, ताकि माल रोड पर बेहतर ट्रीटमेंट कर भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न होने पाए
बहराल यहा पर सरकार के लिए चिन्ता बढाने वाली बात है क्योंकि सरकार को समय रहते ही उचित रास्ता निकलना होगा

सबसे महत्वपूर्ण है 400 से अधिक वो गाँव   जो  भूस्खलन की जद मे ओर यही पर असली डबल इज़न की सरकार को जल्द से जल्द केंद्र से मदद लेकर   कोई मज़बूत रास्ता  निकलाना पड़ेगा!

 

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