शिक्षामंत्री की बेबाक ना दबूंगा ना झूकूंगा,निजी स्कूलों की चलने नहीं दूंगा

 

उत्तराखण्ड में अब सीबीएसई के स्कूलों ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है एनसीईआरटी की किताबों को पढ़ाने के खिलाफ और अपनी चार अन्य मांगों को लेकर उत्तराखण्ड के सीबीएसई स्कूल अनिश्चितकाल के बंद पर चले गए हैं। सभी स्कूलों के प्रबंधन ने फैसला लिया है कि जब तक उनकी चार मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक वो अनिश्चितकाल के लिए स्कूलों को बंद रखेंगे । सरकार के फैसलों के खिलाफ बृहस्पतिवार को सभी स्कूल एसोसिएशनों के साथ साथ अभिभावन संगठनों ने भी एकजुटता दिखाई और करीब 700 स्कूलों के 3000 संचालक प्रिंसिपल निदेशक और अभिभावकों ने देहरादून के गांधी पार्क में धरना प्रदर्शन किया। नए सत्र में सरकार ने आदेश जारी किया है कि सभी निजी सीबीएसई स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाएं। और अगर कोई स्कूल प्रबंधक निजी प्रकाशकों की रेफरेंस बुक्स पढ़ाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। और इस कार्रवाई में मान्यता खत्म करने तक का फैसला हो सकता है। सरकार के इसी फैसले के खिलाफ सीबीएसई स्कूल प्रबंधको में नाराजगी है। इस मामले पर अब सीबीएसई स्कूलों ने विरोध शुरू कर दिया है। लेकिन अभी तक सरकार पर कोई भी असर इसका देखने को नहीं मिला है।

 

स्कूल पहुंचे हाईकोर्ट

इस मामले में अब स्कूल हाईकोर्ट तक पहुंच गए हैं । जिसमें कोर्ट ने सुनवाई की तारीख तीन अप्रैल तय की है।

 

क्या हैं चार मांगें

सीबीएसई स्कूलों की चार मुख्य मांगों में……

 

केवल एनसीईआरटी पुस्तकों की अनिवार्यता खत्म की जाए किताबों के चयन का अधिकार प्रिंसिपल को मिले।

 

राइट टू एजुकेशन का पुराना पैसा मिले भविष्य में भी पैंसा समय से मिलने का आश्वासन मिले। नही तो नए आरटीई दाखिले नहीं दिए जाएंगे।

 

निजी स्कूलों को स्वायत्ता मिले सरकार द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप न किया जाए।

 

सरकार स्कूलों के लिए जो एक्ट लाएगी उसे लागू करने से पहले स्कूलों से भी राय ली जानी चाहिए।

 

राज्य के अंदर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता  कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी हावी रहती थी और आज भी है हर बात पर जबरदस्ती की पेमेंट अभिभावकों पर राज्य के कई प्राइवेट स्कूल थोपते रहते थे जिसकी आवाज आए दिन आंदोलन के रूप में सरकार के कानों तक भी पहुंचती थी जब से अरविंद पांडे ने शिक्षा मंत्री का पद संभाला उन्होंने ईमानदारी के साथ प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने का पूरा प्रयास किया है। शिक्षा मंत्री की ही पहल पर ये आदेश जारी हुआ है कि प्रदेश के अंदर एनसीईआरटी की पुस्तकों को निजी स्कूलों में अनिवार्य किया जाएगा। जब शिक्षा मंत्री के आगे प्राइवेट स्कूलों की एक न चली तो उन्होंने सरकार पर दबाव बनाने के लिए शिक्षा बचाओ देश बचाओ के नारे के साथ प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन के बैनर तले धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया इन शिक्षकों का कहना है कि इस तनाव भरे माहौल में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा है। और एनसीईआरटी की जो पुस्तकें हैं इनमें विषयवस्तु बहुत ही संक्षिप्त है इसके अलावा इस पुस्तक में सीमित मात्रा में अभ्यास प्रश्न हैं जो कि छात्र छात्राओं को किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफल बनाने के लिए अपर्याप्त हैं। कुल मिलाकर बात ये है कि सरकारी आदेश का विरोध खुलकर अब निजी स्कूलों के प्रबंधक करने लगे हैं ऐसे में आग में घी डालने का काम विपक्ष में बैठी कांग्रेस भी खूब करने लगी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह सीधे तौर पर कह चुके हैं कि सरकार ने एनसीईआरटी की पुस्तक अनिवार्य करने की बात तो कही  पर पूरी तैयारी नहीं की। आरोप प्रत्यारोप के बीच अब देखना होगा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर क्या निजी स्कूलों के प्रबंधक दबाव बना पाएंगे। या फिर उनको सरकार के आदेश का पालन करना होगा ये बात तो तय है कि अगर सरकार दबाव में आ गई तो फिर हर किसी को सरकार के आदेश का पालन न करने पर आंदोलन करने का बहाना मिल जाएगा। लिहाजा बैठकर मामले को कब तक सुलझाया जाएगा ये देखना होगा साथ ही यहां पर एक कमेटी बनानी चाहिए और वो कमेटी जांच करे तय करे कि क्या वाकई में ही एनसीईआरटी की पुस्तकें अब पढ़ाने लायक नहीं रही ? क्या इन पुस्तकों को पढ़ कर बच्चों का भविष्य नहीं बन पाएगा या फिर वो किसी बड़ी प्रतियोगिता को जीत नहीं पाएंगे या अव्वल नहीं हो पाएंगे जब तक इन सवालों का जवाब नहीं तलाशा जाएगा तब तक किसी के सर भी ठीकरा नहीं फोड़ा जा सकता पर ये बात भी सच है कि प्राइवेट स्कूलों की मनमानी ने अपनी हदें भी इस तरह पार की कि शिक्षा का व्यावसायी करण कर दिया।

साथ ही शिक्षामंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि ना हम डरेंगे ना दबेंगे और ना ही झूकेंगे निजी स्कूलों को हर हाल में एनसीइआरटी की किताबें लागू करनी ही होगी हमें हड़ताल या धरना प्रदर्शन कर ना धमकाएं हमने बहुत हड़तालें और प्रदर्शन देखें हैं हमें मालूम है कि कमीशनखोरी का

60 प्रतिशत सीधा स्कूलों में पहुचता है शिक्षा के सुधारीकरण के लिए जो कुछ मुझ से होगा वो सब करूंगा वरना मेरा मंत्रीपद पर बने रहना का कोई फायदा नहीं।

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