सतपाल महाराज को उसकी तलाश जो दफन है 53 साल से पहाड़ियों मे! पीएम ने भी कहा विजयी हो! पढ़े पूरी ख़बर

उत्तराखंण्ड राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की  बात सुनकर एक बार तो पीएम मोदी भी सुनते ही रह गए कि आख़िर ये जानकारी उन्हें पहले कैसे नही मिली। और ये जानकारी उत्तराखंड़ से जो जुड़ी है क्योकि पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने पीएम मोदी को कहा कि नंदा देवी की पहाड़ी में 53 साल से दफन है प्‍लूटोनियम तो पीएम मोदी ने कहा कि फिर होगी खोज, पीएम मोदी ने लिया संज्ञान (सतपाल महाराज के अनुसार)

ख़बर विस्तार से। आपको बता दे कि साल 1965 में नंदा देवी की चोटी पर लापता हो रखा रेडियोएक्‍टिव प्‍लूटोनियम का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है इसको लेकर रहस्‍य बरकार है। वहीं प्‍लूटोनियम के चलते विकिरण का खतरा भी लगातार बना हुआ है। इन सब बातो को लेकर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने पीएम मोदी को इस बारे में जानकारी दी है। ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे मामले में जांच कराने की बात कही है। ये जानकारी सतपाल महाराज ने मीडिया को दी है ।

आपको बता दे कि मंत्री सतपाल महाराज ने अभी कुछ दिन पहले 2 अगस्त को ही पीएम मोदी से मिलकर इस खुफिया यंत्र की सारी जानकारी उन्हें दी । उन्होंने बताया कि 56 किलोग्राम वजन का यह रेडियोधर्मी यंत्र वर्तमान में बर्फ और मलबे के नीचे दबा पड़ा है। ऐसे में रेडियोधर्मी किरणों के विकिरण और उसके सूक्ष्म कण आसपास की नदियों में गिर सकते है। ये रेडियोधर्मी कण आगे चलकर गंगा के पानी को भी प्रदूषित कर सकते हैं। जो भविष्य मे एक बड़े खतरे के रुप मे आ सकता है ।
सतपाल महाराज के अनुसार उन्होंने दो अगस्त को दिल्ली में पीएम मोदी से इस बारे में बात की और उसके प्लूटोनियम पैक खतरे के बारे मै पीएम मोदी को अवगत कराया था। सतपाल महाराज का कहना है कि उन्हें पीएम मोदी की तरफ से इसको लेकर पूरा समर्थन मिला है, वो वह जल्द ही इस विषय पर काम करेंगे। ऐसे में अगर यह काम शीघ्र शुरू होता है तो कहीं ना कहीं अविरल गंगा को इस प्रकार के रसायन से मुक्त किया जा सकता है, जो भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है ।

नंदा देवी की पहाड़ियां

अगर थोड़ा साल 1964 पर नज़र डालें तो ,भारत-चीन युद्ध के बाद 1964 में चीन के परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका की सीआईए और भारत की शीर्ष खुफिया एजेंसी आईबी ने मिलकर गुरु रिंपोंछी नाम के इस परमाणुवीय यंत्र को स्थापित करने का प्लान किया था। इसका मुख्य उद्देश्य चीन के परमाणविक महत्वाकांक्षा पर लगाम लगाना था, लेकिन असामयिक एव तूफान आ जाने के कारण इस यंत्र को स्थापित करने से पहले ही बीच रास्ते में छोड़ दिया गया। आपको बता दे कि ये यंत्र प्लूटोनियम से बना हुआ है, जो वर्तमान में नंदा देवी पर्वत की पहाड़ियों में बर्फ के नीचे दबा हुआ है। जानकारी मिली है कि इससे पहले भी इसकी कई बार इसकी खोज की गई, लेकिन इसका पता नहीं लगा पाया था ।
उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार पीएम मोदी ने उनसे इसकी पूरी जानकारी ली और जांच कराने की भी बात भी कही । 

बोलता उत्तराखंड कुछ जानकारी आपके बीच मे लाया है
आपको बता दे कि साल 1856 में माउंट एवरेस्ट की सही ऊंचाई मापे जाने से पहले तक नंदा देवी को विश्व की सबसे ऊंची चोटी के तौर पर माना जाता था।
साल 1951 में तेनजिंग नोर्गे ने नंदा देवी पूर्वी चोटी पर चढ़ाई की थी। वे फ्रेंच टीम के दो सदस्यों को ढूंढ़ रहे थे।
आपको बता दे कि नंदा देवी कोट में 1967 में दूसरी बार न्यूक्लियर पावर डिवाइस लगा।
साल 1977 में अमेरिकी सीआईए और भारत के आईबी के इस संयुक्त जासूसी अभियान में नंदा देवी में गायब हुए खतरनाक प्लूटोनियम की खबर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई। अमेरिकी पत्रिका आउटसाउड में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद हंगामा हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारी देसाई ने संसद में जासूसी उपकरण लगाए जाने की बात स्वीकारी।
1981 में इंडियन आर्मी के नंदा देवी अभियान के दौरान 5 सदस्यों की मौत हो गई थी।
साल 2003 में आई पुस्तक स्पाइज इन द हिमालयाज प्लूटोनियम प्रकरण पर प्रकाश डालती है। इस पुस्तक के लेखक एमएस कोहली और केनेथ कोनबाय हैं। बहराल सतपाल महाराज ने पीएम मोदी को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी है ज़िस पर पीएम मोदी ने भी जांच कराने की बात कही है बस अब देखना ये होगा कि 53 साल से नंदा देवी की पहाड़ियों मे ये दफन ये प्लूटोनियम का कुछ सुराग लग भी पाता है या नही साथ ही 53 साल बाद भी इसके ओर अधिक से अधिक बुरे परिणाम मानव के लिहाज से प्रकति के लिहाज़ से क्या हो सकते है इस पर भी जांच की आवयश्कता है।

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