सरकारी कर्मचारी बोला चाहे जो हो मजबूरी हो माग हमारी पूरी हो! ओर काम काज ठप्प !

प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने 15 अगस्त को अपने भाषण मे कहा था कि वो राज्य को हड़ताली प्रदेश नही बनने देगे पर ठीक इसके उल्टा राज्य के सरकारी कर्मचारियों ने अब अनिश्तिकालीन हड़ताल शुरू कर दी है इसके चलते सरकारी विभागों में कामकाज बुरी तरह प्रभावित। हो रखा है तो दूसरी तरफ शासन ने सख्त रूख दिखाते हुए कर्मचारियों व शिक्षकों की हड़ताल अथवा कार्य बहिष्कार को प्रतिबंधित कर दिया है। इसके साथ ही शासन ने वर्ष 2013 के उस शासनादेश का भी हवाला दिया है, जिसमें हड़ताल की सूरत में ‘कार्य नहीं तो वेतन नहीं’ के नियम को लागू करने को कहा गया है।।   
दूसरी तरफ सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर नरम रुख अपनाया है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने हड़ताली कर्मचारी संगठनों से वार्ता कर इसमें सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया है। उत्तराखंड कार्मिक, शिक्षक, आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के 27 कर्मचारी संगठनों ने पूर्ण सेवाकाल में तीन अनिवार्य पदोन्नति अथवा एसीपी की पुरानी व्यवस्था के अनुसार पदोन्नत वेतनमान देने समेत 13 सूत्री मांगों पर सोमवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। 

आपको बता दे कि इससे सभी विभागों में कार्य पूरी तरह प्रभावित हुआ है। इसे देखते हुए मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी विभागीय सचिवों व विभागाध्यक्षों को सरकारी कर्मचारियों व शिक्षकों की हड़ताल को लेकर वर्ष 2013 में जारी शासनादेश का अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि कार्य नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत के अनुरूप हड़ताल करने वाले कर्मचारियों को वेतन का भुगतान नहीं किया जाएगा। प्रदेश विभागाध्यक्ष व कार्यालयाध्यक्ष अपने विभागों में कर्मचारियों की उपस्थिति की कड़ी जांच करेंगे। 
आपको बता दे कि उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर करने के बाद भी काम न करने वाले वालों को भी हड़ताल में शामिल मानते हुए उन पर भी समान कार्रवाई की जाएगी। इस अवधि को उपार्जित अवकाश अथवा अन्य किसी अवकाश में शामिल नहीं माना जाएगा। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन आदेशों में शिथिलता बरतने पर विभागाध्यक्ष व कार्यालयाध्यक्ष पर भी कार्यवाही की जाएगी। उधर, कर्मचारियों ने शासन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एक और सरकार वार्ता कर रही है, वहीं शासन कर्मचारियों को परेशान करने के लिए ऐसे आदेश निकाल रहा है। बहराल अब देखना ये होगा कि कर्मचारी ओर सरकार के बीच समन्वय बन पाता भी है या नही

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