सरकार इनकी पहल शानदार हैं आप भी करे इनकी जमकर तारीफ ओर मूलभूत व्यवस्था को करे दुरुस्त !!

गढ़वाल से पर्भु पाल जी की कलम से

राज्य कि आज की सरकार हो या इससे पहले की सरकारे सभी जानते हैं कि पहाड़ो में लगातार पलायन    बढ़ रहा हैं जाने वाली ओर आने वाली सरकारे दावा तो करती हैं कि पलायन  पर लगाम लगाएंगे पर जनाब ये होता नही क्योकि कारण साफ़ हैं मूलभूत व्यवस्था का पहाड़ो में ना होना जो कही ना कही आज़ तक कि सरकारों की पोल खुलता हैं।     ख़बर गढ़वाल के द्वार कोटद्वार से हैं जहां बढ़ते पहाड़ों से हो रहे पलायन के चलते ग्रामीणों की ओर से एक अनूठी पहल की जा रही हैं आगमी 15 से 17 मई तक इस पहल के तहत तीन दिवसीय रिखणीखाल महोत्सव मनाया जा रहा है। इसकी तैयारियां जोरों से आजकल चल रही हैं। महोत्सव के सफल आयोजन के लिए स्थानीय और प्रवासी लोग शहर और गांव स्तर पर समितियां बनाकर लोगों को संगठित करने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रिखणीखाल क्षेत्र में विकास कार्य, आम जनमानस को न मिलने वाली सुविधाओं, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बेेरोजगारी और सरकारी महकमों से उठते विश्वास ने ग्रामीणों को अपनी मातृभूमि से पलायन को मजबूर किया।इस महोत्सव का आयोजन कर क्षेत्रवासियों में आशा और विस्वास को वापस लौटाने के साथ ही गांवों की रौनक व चहल-पहल की वापसी करने के लिए एक अनूठी पहल की जा रही है।।     जिसको लेकर अभी सब लोग उत्साहित हैं मोदी जी ने चुनाव के दौरान कहा था कि राज्य में उनकी सरकार बनने के बाद पानी और जवानी दोनों काम आएगी पर अभी कुछ भी धरातल पर नही दिखाई दे रहा हैं इस बात से भी गाँव वाले नारज हैं कि उनके साथ सब ने छलावा किया हैं फिलहाल गाँव वाले खुद आपस में मिलकर एक प्रयास कर रहे हैं जिसकी तारीफ की जानी चाइए क्या पता क्या निकलर छन कर आये जिससे सरकार को भी आईना दिखाया जाए या सरकार को कोई सलाह मिल जाये ये तो आने वाला कल ही बताएगा फिलहाल बोलता उत्तराखण्ड यहा के लोगो को बहुत बहुत सुभकामनाये देता हैं और उम्मीद करता हैं कि अब ये पहल हर गांव में हर ब्लाक में राज्य के 9 पर्वतीय जिलो में होंनी चाइए फिर जो छन कर आये उसे सरकार के आगे सब मिलकर रखे तो हम समझते हैं कि फालतू के पलायन जैसे आयोग की जरूरत ना पढ़े माफ करना जी बेवजह फालतू के आयोग से मतलब सिर्फ धन की बर्बादी ओर कुछ नही वरना आप ही बता दे आज़ तक जितने भी आयोग राज्य में बने इन्होंने क्या रिजल्ट दिया राज्य को ??? उल्टा खर्चा ही बढ़ाया हैं राज्य का खेर डबल इज़न से आस हैं पाहड़ को अब आगे देखते है ।          राज्य की सरकार  क्या कुछ बेहतर करती  है  पाहड़ के हालत

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