सरकार पीडित जनता परेशान है नेता प्रतिपक्ष भी समझे बात को !

उत्तराखण्ड राज्य की दुःखहारी जनता का कोई अपना नही यहा के राजनेताओ को बस अपने अपने लोगो की सेटिंग में लगने के सिवा कोई दूसरा काम नही इनको कहा जनता की फिक्र है आज हम बात कर रहे है
सूचना आयुक्त की नियुक्ति की जो इन राजनेताओ की सियासी लड़ाई मे उलझ गई है जिसका खामियाजा दुःखयारी जनता को भुगतना पड़ रहा है अब तो पीडितो की फाइलों मे धूल जम चुकी ओर उनको आस नही की उनका कुछ भला होने वाला है 

आपको बता दे कि राज्य मे सूचना आयुक्त का पद खाली पड़ा है। पर डबल इज़न की सरकार गंभीर नहीं है। ओर सूचना आयुक्त न होने की वजह से पीड़ितों की समस्याओं से जुड़ी सभी फाइलें धूल फांक रही है इस पद पर अपने पसंद के व्यक्ति को बैठाने के लिए राज्य मैं सियासत भी खूब चल रही है,
ओर यही एक बड़ा कारण है कि अब तक इस सियासी लड़ाई में फ़स गयी है सूचना आयुक्त की नियुक्ति आपको बता दे कि उत्तराखंण्ड राज्य में आयुक्त के चारों पद खाली पड़े हैं। ओर सिर्फ एक मुख्य सूचना आयुक्त होने की वजह से पीड़ित की फाइल अटकी पड़ी है क्योकि अकेला व्यक्ति कुछ नही कर पा रहा है उनके ऊपर सभी कामों का बोझ है, जिससे मामले निपटाने में काफी समय से देरी हो रही है। आपको ये भी बता दे कि 2015 में सूचना आयुक्त अनिल शर्मा और प्रभात डबराल का कार्यकाल समाप्त हुआ था। इसके बाद
राजेंद्र कोटियाल और सूचना आयुक्त एसएस रावत का कार्यकाल भी खत्म हो गया था बस यही से राज्य सूचना आयुक्त की कुर्सी खाली पड़ी है इन सबके बीच नियुक्ति को लेकर कही बार बैठक भी हुईं पर नतीजा कुछ नही निकला क्योकि कभी विपक्ष और कभी सत्ता पक्ष के बीच उन नामों पर सहमति ही नहीं बन पाई क्योंकि आपको बता दे कि सूचना आयुक्त का चयन करने के प्रक्रिया मे मुख्यमंत्री और सरकार के 1 कैबिनेट मंत्री के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष की भूमिका ही महत्वपूर्ण होती है ये ही मिलकर य करते हैं। सत्ता और विपक्ष पक्ष जिसके नाम पर भी मान जाए इसकी नियुक्ति हो पाती है। ओर यही वजह है कि विपक्ष और सरकार की आपसी खींचतान की वजह से पीड़ितों की सैकड़ों फाइलें बद पड़ी है जिनमे धूल जम चुकी तो हैं।
होता अकसर यही है कि जो भी दल विपक्ष मे होता है वो नहीं चाहता कि राज्य सरकार अपने चहेतों को इस पद पर बैठाए। ओर हुवा भी यही जब-जब सरकार ने अपने पसंदीदा नामों को बैठक में रखा तब-तब विपक्ष की नेता इंदिरा हृदयेश ने इसका विरोध किया।
अब बात ये समझ मे नही आती की इनके आपस मे आये दिन होने वाले विरोध के कारण पीडित जनता परेशान है दूसरी बात वो कोन सी सरकार है या रही जिसने अपने सरकार बनने के बाद अपनो लोगों को सेट ना किया हो तो ये बेवजह का विरोध क्यो नेता प्रतिपक्ष इंदिरा जी क्यो आप पीड़ित जनता को ओर पीडित कर रहे हो जो भी नाम हो नियम मानकों के अनुसार हामी भर कर जल्द तय करे आप ओर सरकार ताकि पीडित जनता को मिल सके इंसाफ ओर सीएम त्रिवेन्द्र रावत से उम्मीद करते है कि वो अब होने वाली बैठक मे जल्द कोई हल निकाले

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here