सरकार! हीरासिंह राणा को बचाओ…

उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोककवि और लोकगायक हीरासिंह राणा फिर दर्द से कराह रहे हैं, लेकिन धन के अभाव में इलाज नहीं करा पा रहे। आपको बता दें कि करीब 7-8 महीने पहले हीरासिंह राणा अपने गांव डढोली (मानिला, अल्मोड़ा) में पैदल मार्ग पर फिसल गए थे। इस घटना में उनका कूल्हा खिसक गया था। करीब दो महीने तक राणा जी का इलाज रामनगर (नैनीताल) के एक प्राइवेट अस्पताल में चला। उनके कूल्हे का ऑपरेशन किया गया था, लेकिन ये ऑपरेशन सफल नहीं हुआ। ऑपरेशन के दौरान जिन सर्जिकल प्लेट्स से उनका कूल्हा ठीक किया गया था, पता चला है कि वो फिर टूट गई है। राणा जी को जब सात-आठ माह बाद भी चलने फिरने में अक्षम रहे और लगातार दर्द होता रहा तो उन्होंने गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में इसका चेकअप कराया।

क्या कहना है डॉक्टरों का?

हीरासिंह राणा ने कहा कि मेदांता में उनके जान-पाहचान के कुछ लोग हैं। इन्हीं से संपर्क साधकर उन्होंने अपना चेकअप कराया। डॉक्टरों ने दोबारा पूरा ऑपरेशन करने को कहा है। साथ ही ये भी कहा है कि ऑपरेशन जल्दी करना पड़ेगा क्योंकि इनफेक्शन होने का भी खतरा है।

क्या कहते हैं राणा जी

करीब 80 वसंत देख चुके हीरासिंह राणा ने अपना दुख बयां किया। उन्होंने कहा कि वे इस माली हालत में नहीं हैं कि मेदांता अस्पताल में भर्ती हो सकें। उनके पास सिर्फ 50 हजार रुपये हैं और अस्पताल में भर्ती होने के लिए एडवांस डेढ़ लाख रुपया जमा कराना है। हालांकि राणा जी ने ये भी बताया कि वो कुछ कर्ज लेकर डेढ़ लाख तक की रकम तो जुटा लेंगे लेकिन इलाज में करीब 5 लाख तक का खर्च बताया गया है। आखिर ये पैसा वे कहां से लाएंगे। रामनगर में हुए पहले ऑपरेशन के दौरान उत्तराखंड सरकार ने हीरासिंह राणा की मदद की थी। तब मीडिया रिपोर्ट्स में छपी खबरों के बाद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घोषणा की थी कि राणा के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।

सरकार को फिर करनी चाहिए मदद

हमारी मांग है कि सरकार इस बार भी हीरासिंह राणा के इलाज का खर्च उठाए। मुख्यमंत्री राहत कोष से उनकी मदद की जा सकती है। सरकार के नुमाइंदों को तुरंत हीरासिंह राणा और मेदांता अस्पताल प्रशासन से बात करनी चाहिए। राणा जी के चाहने वालों को भी जुटकर उनकी मदद के लिए आगे आना चाहिए।

हीरासिंह राणा से इस नंबर पर संपर्क किया जा सकता है- 9968127452

 

 

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