साल मे एक दिन ही खुलते है इस मंदिर के कपाट रक्षाबंधन के दिन मनोकामना होती है पूरी पढ़े पूरी रिपोर्ट

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आप सबको बोलता उत्तराखंड की तरफ से भाई बहन के प्यार का प्रतीक रक्षाबंधन की सुभकामनाये ।।
आज हम आपको वो ख़बर या जानकारी दे रहे है जो भारत मे बहुत कम लोगो को मालूम होगी देवभूमि मे एक वो मंदिर है जिसके कपाट सिर्फ रक्षाबंधन के दिन ही खुलते हैं।

उत्तराखंड देवी देवताओं की भूमि है. यहा के कण कण मे भगवान बसे है। और देवभूमि में एक मंदिर ऐसा भी है, जिसके कपाट साल में सिर्फ एक बार रक्षाबंधन के दिन ही खुलते हैं. ये बात सच है और इस मंदिर में भगवान बंसी नारायण चतुर्भुज मूर्ति विराजमान है. आपको बता दे कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित इस 10 फुट ऊंचे इस मंदिर में साल में सिर्फ एक बार ही पूजा की जाती है और होती है. इस दिन सभी बहनें भगवान बंसी नारायण को राखी बांधती हैं.

उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित भगवान बंसी नारायणका मंदिर समुद्रतल से 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है. रक्षाबंधन के पर्व पर आसपास रहने वाली बहनें भगवान बंसी नारायण को राखी बांधने के बाद ही अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बंधती हैं. सूर्यास्त होते ही भगवान बंसी नारायण के मंदिर के कपाट एक साल के लिए फिर से बंद कर दिए जाते हैं.

आपको बता दे कि देवभूमि का ये अकेला एक ऐसा मंदिर है. जो सिर्फ रक्षा बंधन के दिन ही खुलता है. कुंवारी कन्याओं के साथ-साथ विवाहिताएं भी भगवान बंसी नारायण को राखी बांधती हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां पर रक्षाबंधन के दिन भगवान बंसी नारायणअपने भक्तों को दर्शन देते है.

आपको बता दे कि चमोली के जोशीमठ विकासखंड के उर्गम घाटी में स्थित भगवान विष्णु के अवतार भगवान बंसी नारायण के कपाट आज यानी 26 अगस्त को सुबह ठीक आठ बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए है . जिसके बाद ढुमक गांव के बजीर देवता के पुजारी बंसी नारायण मंदिर में पूजा-अर्चना की
आपको बता दे कि परंपरा के अनुसार इस मंदिर के पुजारी राजपूत हैं. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि भगवान वामन अवतार धारण कर भगवान विष्णु ने दानवीर राजा बलि का अभिमान चूर कर उसे पाताल लोक भेजा था. जिसके बाद बलि ने भगवान से अपनी सुरक्षा का आग्रह किया. इस पर श्रीहरि विष्णु स्वयं पाताल लोक में बलि के द्वारपाल हो गए. ऐसे में पति को मुक्त कराने के देवी लक्ष्मी पाताल लोक पहुंचीं और राजा बलि को राखी बांधकर भगवान को मुक्त कराया. बंसी नारायण मंदिर में विष्णु भगवान के साथ-साथ नारद जी की पूजा भी की जाती है.

मान्यता है कि पाताल लोक से भगवान यहीं प्रकट हुए थे. भगवान को राखी बांधने से स्वयं श्रीहरि उनकी रक्षा करते हैं. बंसी नारायण मंदिर तक पहुंचने का रास्‍ता काफी दुर्गम है. जिला मुख्यालय गोपेश्वर से उर्गम घाटी तक वाहन से पहुंचने के बाद आगे 12 किलोमीटर का सफर पैदल ही करना पड़ता है. जिसके बोलता उत्तराखंण्ड त्रिवेन्द्र रावत की सरकार और पर्यटन मंन्त्री से हाथ जोड़कर अपील करता है कि आप यहा मंदिर तक पहुचने वाले रास्ते को सुविधा वाला रास्ता बनाकर इस का प्रचार भी करे ताकि दुनिया को मालूम हो इस मंदिर का इतिहास और लोग भी यहा जरूर आये।

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