ई0वी0ए0आर0 तकनीक से श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में उत्तराखण्ड का पहला सफल आॅपरेशन
जाॅघ में केवल 3 इंच का चीरा लगाकर महाधमनी व उनकी शाखाओं मे नए ग्राफ्ट लगाए.

रक्त के प्रवाह को संचालित करने के लिए बनाया नया रास्ता
कैथ लैब को बनाया हाईब्रिड आॅपरेशन थियेटर, सुपरस्पेशलिस्ट डाॅक्टरों की टीम की देखरेख में हुआ सफल आपरेशन

देहरादून
लोकप्रिय श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में एक मरीज़ की एब्डोमिनर्ल एओटिक एन्यूरिज्म की सफल सर्जरी हुई। मेडिकल साइंस की एडवांस तकनीक एण्डो वैस्क्युलर ट्रीटमेंट आॅर्फ एओटिक एन्यूरिज्म (EVAR तकनीक से मरीज़ की सफल सर्जरी की गई। मरीज़ की जाॅघ पर केवल 3 इंच का चीरा लगाकर महाधमनी व उनकी शाखाओं मे नए ग्राफट लगाए गए व रक्त प्रवाह के लिए नया रास्ता तैयार किया गया। ऐसे आॅपरेशन के लिए हाईब्रिड आॅपरेशन थियेटर होने के साथ ही कााॅर्डियोलाॅजिस्ट, काॅर्डियक थोरेसिस वैस्क्यूलर सर्जन, इंटरवेंशनल रेडियोलाॅजिस्ट, एनेस्थिटिस्ट सहित बड़ी डाॅक्टरों की टीम की आवश्यकता होती है।
एक मरीज़ को ऐसे उपचार की आवश्यकता पड़ने पर श्री महंत इन्दरेश अस्पताल की कैथ लैब को हाईब्रिड आॅपरेशन थियेटर के रूप में तब्दील किया गया व उस मरीज़ का सफल आपरेशन हुआ।


बता दे कि यह जानकारी श्री महंत इन्दरेश अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ विनय राय व श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आॅफ मेडिकल एण्ड हेल्थ साइंसेज़ के प्रचार्य डाॅ तनुज भाटिया ने पत्रकारों से मुखातिब होते हुए दी।
बुधवार 9 अक्टूबर को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की कैथ लैब के काॅन्फ्रेंस हाॅल में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। डाॅ विनय राय ने जानकारी दी कि एब्डोमिनर्ल एओटिक एन्यूरिज्म पेट के पास महाधमनी में पाई जानी वाली ऐसी बीमारी है जिससे महाधमनी फूल जाती है। महाधमनी के फूलने का प्रतिकूल असर पेट के आसपास के टिश्यू पर बढ़ते दबाव के रूप में पड़ता है। बढ़ते दबाव के कारण आॅत व रीढ् की हड्डी के कार्य करने की क्षमता पर भी प्रतिकूल असर पड़ने लगता है। इससे महाधमनी या आसपास के टिश्यू का कोई हिस्सा फट सकता है, इसके कारण अत्यधिक रक्तस्त्राव हो सकता है व मरीज़ की जान भी जा सकती है।
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के वरिष्ठ काॅर्डियक थोरेसिस वैस्क्यूलर सर्जन डाॅ अरविंद मक्कड, कैथ लैब के डायरेक्टर डाॅ तनुज भाटिया व वरिष्ठ इंटरवेंशनल रेडियोलाॅजिस्ट डा प्रशांत सारड़ा ने जानकारी दी कि मरीज़ भगत सिंह उम्र 70 वर्ष निवासी देहरादून को 2 सालों से पेट दर्द की शिकायत थी। मरीज़ को लंबे समय से पाचन में परेशानी थी और वे चल फिर भी नहीं पा रहे थे। वे कई अस्पतालों में उपचार करवा चुके थे। श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के वरिष्ठ काॅर्डियक थोरेसिस वैस्क्यूलर सर्जन डाॅ अरविंद मक्कड ने मरीज़ की प्रारम्भिक जाॅचों में पाया कि उन्हें एब्डोमिनर्ल एओटिक एन्यूरिज्म की परेशानी है। इस बीमारी के कारण पेट के पास महाधमनी फूल गई थी। आमतौर पर इस बीमारी की सर्जरी के लिए पेट पर बड़ा चीरा लगाकर पेट खोला जाता है। मरीज़ की उम्र अधिक होने के कारण व सी0ओ0पी0डी0 की शिकायत के चलते मरीज के पेट में बड़ा चीरा लगाकर आॅपरेशन करना जोखिम भरा हो सकता था वहीं दूसरी तरफ बड़े आॅपरेशन के बाद रिकवरी करने में भी लंबा समय लग सकता था।
इन सभी बातों को ध्यान में रखकर श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की कैथ लैब में एण्डो वैस्क्युलर ट्रीटमेंट आॅर्फ एओटिक एन्यूरिज्म तकनीक से मरीज़ का आॅपरेशन प्लान किया गया। एब्डोमिनर्ल एओटिक एन्यूरिज्म के उपचार की माॅर्डन व हाईटेक तकनीक है। इस तकनीक के अन्तर्गत मरीज़ के पाॅंव की धमनियों में छोटा सा चीरा लगाकर मरीज़ का आॅपरेशन किया गया। उत्तराखण्ड में इस तकनीक से हुआ यह पहला सबसे जटिल एब्डोमिनर्ल एओटिक एन्यूरिज्म का आॅपरेशन केस है। आॅपरेशन के दौरान इंटरवेंशनल रेडियोलाॅजिस्ट डाॅ प्रशांत सारड़ा कैथेटर की मदद से महाधमनी व उनकी शाखाओं तक पहुंचे। महाधमनी व उनकी शाखाओं मे नए ग्राफट लगाकर खून के संचालन हेतु नया रास्ता बनाया। फेब्रीकेटेड ग्राफिटंग के बाद मरीज़ की महाधमनी के आसपास के टीश्यू पर दबाव न के बराबर रह गया है, व टीश्यू के फूटने की सम्भावनाएं भी लगभग खत्म हो गई हैं। आॅपरेशन के बाद मरीज़ एकदम स्वस्थ्य है व सामान्य दिनचर्या कर पा रहा है। आॅपरेशन को सफल बनाने मैं एनेस्थीसिया टीम जिसमें डाॅ पराग डाॅ प्रतीश, डाॅ हरीओम व डाॅ रूबीना मक्कड़ आदि का विशेष सहयोग रहा। बाॅक्स
एब्डोमिनर्ल एओटिक एन्यूरिज्म बीमारी है असंतुलित जीवन शैली, तम्बाकू का सेवन करने शरीर में कैलेस्ट्रोल की अत्यधिक मात्रा होने के कारण, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर के कारण एब्डोमिनर्ल एओटिक एन्यूरिज्म की सम्भावना बढ़ जाती है। समय रहते बीमारी का पता लगने पर इसका पूर्णं उपचार सम्भव है। समय पर उपचार शुरू करने पर इस बीमारी से होने वाले बड़े नुकसानों व जटिल सर्जरी से बचा जा सकता है।
डाॅ अरविंद मक्कड
वरिष्ठ काॅर्डियक थोरेसिस वैस्क्यूलर सर्जन



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