एसजीआरआर विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 210 अभ्यर्थी हुए शामिल

देश भर से परीक्षा देने पहुंचे पीएचडी के इच्छुक

21 विषयों के लिए आयोजित की गई परीक्षा

42 अभ्यर्थी नेट क्वालीफाईड, सीधा साक्षात्कार मेँ लेंगे हिस्सा

उत्तराखण्ड वासियों को मिलेगी फीस में 26% (प्रतिशत) छूट

देहरादून।

श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय की पीएचडी प्रवेश परीक्षा (रिसर्च एंट्रेंस टेस्ट) में 210 अभ्यर्थी शामिल हुए।

21 विषयों के लिए आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा की 95 सीटों के लिए विश्वविद्यालय की ओर से पीएचडी के इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र मांगे गए थे।
पीएचडी के लिए 252 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए जिसमें से 42 नेट या गेट पास हैं जोकि एंट्रेंस टेस्ट से एक्जेंप्टेड हैं
एवं यूजीसी मानकों के हिसाब से सीधे साक्षात्कार में शामिल होंगे।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. यू.एस.रावत ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि मंगलवार को आयोजित रिसर्च एंट्रेंस टेस्ट के लिए सरकार की ओर से जारी कोविड-19 गाईडलाइन का पूरा पालन किया गया।
विश्वविद्यालय के परीक्षा केंद्रों को एक दिन पूर्व ही अच्छी तरह से सेनेटाइज करा दिया गया। जगह-जगह प्रवेश द्वारों पर सेनेटाइजरों की व्यव्सथा की गई इसके साथ ही मास्क की अनिवार्यता के बावजूद जो परीक्षार्थी कींन्हीं कारणों से मास्क नहीं ला सके या जिनका मास्क कारणवश छूट गया उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश के समय ही मास्क उपलब्ध करा दिया गया। यह भी देखने में आ रहा है कि उत्तराखण्ड में पीएचडी की ओर विद्यार्थियों का रुझान बढ़ रहा है।
इसी को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री देवेंद्र दास जी महाराज के निर्देश पर प्रदेश वासियों को पीएचडी की फीस में 26 प्रतिशत की छूट दी गई है।


उत्तरखण्ड राज्य में शोध एवं नवोन्मेष को प्रोत्साहन देने हेतु श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय ने यह पहल छात्रहित को ध्यान में रखकर की है।
डीन रिसर्च डॉ. अरुण कुमार ने बताया कि एसजीआरआर आरईटी टेस्ट के लिए काफी अच्छा रिस्पांस रहा। कोविड के बावजूद अभ्यर्थियों का रिसर्च के लिए रुझान बढ़ा है। लगभग देश के हर हिस्से से अभ्यर्थी परीक्षा देने आए हैं। उत्तराखण्ड के साथ ही दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्यप्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश, पंजाब हरियाणा सहित कई राज्यों से परीक्षार्थी परीक्षा देने देहरादून पहुंचे।
परीक्षा संपन्न कराने में डॉ. संजय शर्मा, डॉ. कीर्तिमा उपाध्याय, डॉ. लोकेश गंभीर, डॉ. अनिल थपलियाल, डॉ. सौरभ गुलेरी, विरेंद्र गुसाईं, अभिषेक आदि ने योगदान दिया।


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