हमारी मांगे पूरी करो……पशुपालन मंत्री रेखा आर्य के विभाग में क्यों बरपा है हंगामा

18 साल बाद क्या इस बार लगेगी इन आंदोनकारी कर्मचारियों की मांगों पर मुहर

देहरादून। केन्द्र की मोदी सरकार से लेकर प्रदेश की त्रिवेद्र सरकार तक किसानों की आय दुगना करने का संकल्प लिये हुए है। यही नहीं किसानों के लिये किसान सम्मान निधि की भी शुरूआत कर दी गई है। लेकिन किसानों के सुखः दुखः के साथी पैरावेटों की किसी को चिंता नहीं है। आर्थिक तंगी में दिन गुजार रहे पैरावेटों के बारें में सोचने का किसी भी सरकार के पास समय नहीं है। उत्तराखंड में पैरावेटों की हालत और भी दयनीय है। पिछले 18 सालों से अपनी मांगों को लेकर हर सरकार के दरवाजे पर दस्तक दे चुके पैरावेटों के हाथों आज तक सिर्फ मायूसी लगी है। किसी भी सरकार ने इनकी फरियाद सुनने की जहमत नहीं उठाई। यही वजह है कि इनकों अपनी मांगों के लिये धरना प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है। राजधानी देहरादून में पेरा वेटनरी वेलफेयर एसोसिएसन के बैनर तले सेकड़ो कर्मचारियों ने धरना पर्दशन किया। एसोसीएशन के अध्यक्ष और महासचिव ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा की पिछले १८ सालो में किसी भी सरकार ने उनकी फरियाद पर गौर नहीं किया। उन्होंने कहा की सरकार किसानो की आया को दुगना करने के बारे में तो बात करती है लेकिन पैरावेट कर्मचारियों को मानदेय देने की बात नहीं मानती। इन कर्मचारियों की मांग है की सरकार प्रति माह उन्हें मानदेय देने के साथ ही पशुपालन विभाग में रिक्त पड़े पशुधन सहायको के पदों पर समायोजित करे।

6 सूत्रीय मांग को लेकर धरने पर पैरावैटनरी वैलफेयर एसोसिएशन
देहरादून के परेड ग्रांउड में अपनी 6 सूत्रीय मांग को लेकर धरने पर बैठे पैरावैटनरी वैलफेयर एसोसिएशन की प्रमुख मांग है कि इनको उडीसा राज्य की भांति पशुधन सहायकों के पदों पर समायोजित किया जाये। जब तक ऐसा नहीं हो पा रहा तब तक तेलंगाना राज्य की भांति हर माह मानदेय की सुविधा दी जाये। इसके साथ ही प्रदेश में चल रहे अनाधिकृत एआई केन्द्रों पर रोक लगाकर बाहरी राज्य के एआई कर्ताओं के उत्तराखंड में केन्द्र खोलने पर रोक लगाई जाये।

पलायन को मजबूर और आर्थिक तंगी से गुजर रहे पैरावेट की करूण पुकार
गौरतलब है कि उत्तराखंड में पैरावेट विषम परिस्थितियों में किसान के द्वार जाकर कृत्रिम गार्भाधान, नस्ल सुधार, बधियाकरण, आकस्मिक समय में पशुओं का प्राथमिक उपचार तथा नस्ल सुधार कर दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। यही नहीं पशुपालन विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं जैसे टीकाकरण प्रेजनी टेस्टींग एयर टैगिंक, पशु गणना आदि कार्यों में भी पैरावेट समय-समय पर सहयोग प्रदान करते आ रहे हैं। बावजूद इसके पैरावेटों को न तो पशुपालन विभाग, न ही राज्य और केन्द्र सरकार द्वारा कोई आर्थिक सहायता और मानदेय दिया जा रहा है।





LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here