रावत से रावत का दिल मिला दोनों के दुश्मनों का दिल जला

सूबे मैं जहा प्रचण्ड बहुमत की सरकार है ओर उनका राज काज चल रहा है पर इस सरकार के आगे जन हित के मुदो को देखा गया है कि विपक्ष की भूमिका में खड़ी काग्रेस पुर जोर तरिके से उठा नही पा रही है हा शोर जरूर होता है , पुतले जरूर बीजेपी सरकार के फुके जाते है , आरोप ही लगते है ,पर वो पैना पन वो धार काग्रेस मे नज़र नही आती.             जिसके लिए काग्रेस को जाना जाता था जिसका कारण है राज्य मे गुटों मै भिखरा इनका परिवार यहा अध्यक्ष प्रीतम सिंह का बयान कुछ होता है, नेता प्रतिपक्ष का कुछ ओर , तो किशोर का सबसे अलग हटकर , ओर हरीश रावत का बयान किसी मिठास से कम नही मानो जैसे आम चूस चूस कर ये कभी सरकार पर हमला बोलते है तो कभी उन पर जिनके निशाने पर हरीश रावत रहते है ।.            राहुल गांधी की लांख कोशिश के बावजूद  आज  के काग्रेस के नेता  सब कुछ भूलने को तैयार नही ओर आये दिन बीजेपी को घेरने की बजाय खुद के लोगो को घेरने का काम करते है इस बात को हरीश रावत कही बार फेसबुक के जरिये ओर जनसभाओं मे बोल चुके है कि सब एक साथ मिल कर काग्रेस को मजबूत करने का काम करे पर ये होता कम है  
तभी तो हर दा अक्सर एक तीर से कही निशाने साधते नज़र आते है ताकि कही तो ये तीर निशाने पर लगे अब हर दा के नाम से प्रसीद उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत ने मेंगो पार्टी के साथ दूंन मे हाजिर हुए ओर इस मैंगो पार्टी में हरीश रावत के चाहने वालो का काफिला भी खूब उमड़ा आपको पहले ये बात दे कि हर दा ने काफल पार्टी भी खूब करी वो भी अलग अलग जिलो मै जाकर ओर हर बार कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह के अलावा सीएम त्रिवेंद्र रावत को आमंत्रित किया किसी पार्टी में प्रीतम आये तो किसी पार्टी मे नही जानकार कहते है कि हरीश रावत इन छोटी छोटी दावत को देकर एक तो सबसे पहले पहाड़ी उत्पादन को बढ़वा देना का काम कर रहे है.           तो दूसरी तरफ अलग थलग बिखरे काग्रेस के कार्यकर्ताओं को एक साथ खड़ा कर उनमें फिर से जान फूंक कर उनको मिशन 19 के लिए तैयार कर रहे है जो आज काग्रेस की जरूरत भी ओर इसके साथ हर दा खुद चुनाव के मैदान मे एक बार फिर से उतरने की रणनीति भी बना रहे है जिसके लिए मेल मिलाप जरूरी है और वही काम हर दा बड़े प्यार से धीरे धीरे कर रहे है कभी काफल खिला कर , कभी कीड़ा जड़ी की चाय पिला कर , तो कभी पहाड़ी भोजन खिला कर काम दोनों हो रहे है एक तरफ पहाड़ी उत्पादतो की ब्रांडिंग ओर दूसरा काग्रेस के लोगो का मन टटोलना ओर उनको फिर से सक्रिय करना भले ही हरीश रावत को आजकल उनके अपने ही भूल चले हो, वो अपने जो हरीश रावत के कंधो पर चढ़कर अपनी मंजिल तक पहुचे हो पर हरीश रावत इन सबकी फिक्र करते कहा है वो तो फिर भी सुर्खियां बटोर ही लेते है भाई राजनीति का बड़ा अनुभव हार जीत के उनको जो है इसलिए भले ही पूरी काग्रेस भूल जाये चूक जाए पर हर दा कोई मौका नहीं छोड़ते। अब दवात मे पहुचे मेहमानों को मैंगो के साथ साथ -भुट्टा भी उन्होंने खूब खिलाया ओर शुगर वालो को जामुन हरीश रावत के विरोधी भी चाह कर दावत का आनंद तो लेते है पर अंदर ही अंदर यही सोचते है कि अब क्या किया जाए इस इंशान का जो दो दो जगह से हारने के बाद भी मैदान मे खड़ा है डटा है खेर जो भी हो और कोई कुछ भी कहे लेकिन उत्तराखंड की सियासी जमीन पर हरीश रावत का वजूद ओर दम बरकरार है। हरीश रावत की जब सरकार राज्य मे थी तब इस बात से इनकार नही किया जा सकता कि पहाड़ की खेती को एक पहचान मिली थी तब भी उनका  
पहाड़ी उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर ज्यादा फोकस रहता था। ओर वो उन्होंने पहाड़ के फलों और उनके संरक्षण के लिए काम भी किया ओर कही उत्पादतो का समर्थन मूल्य भी तय किया ओर अब सरकार तो है नही इसलिये हरीश रावत कभी कंडाली, कुलवंसा और पहाड़ी तुलसी की चाय के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए पार्टी तो कभी काफल, ककड़ी, मुग़री, क्भी अरसे , आज मैंगो पार्टी और आगे ना जाने क्या क्या ओर कोन सी पार्टी हर दा के दिमाग मे फिक्स होगी. 
ओर रविवार की आम की पार्टी इसलिये खास से खास बन गयी जब राज्य के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत हरीश रावत की आम पार्टी की दावत मे पहुचे बस फिर क्या था हर कोई हरीश रावत ओर त्रिवेन्द्र रावत की तरफ ही देख रहा था लेकिन इन दोनों नेताओं ने राजनीति और अलग अलग पार्टी के नेताओ की तरह नही बल्कि उत्तराखंड के भाई भाई के नाते एक दूसरे के साथ दवात मे हिसा लिया मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि हरीश रावत जो पहाड़ी उत्पादनो को बढ़वा दे रहे है वो बहुत ही अछी बात है तो दूसरी तरफ हरीश रावत ने कहा कि वो सीएम त्रिवेन्द्र रावत के आभारी है कि इस आम दवात मैं पहुचे ओर उन सब लोगो को धन्यवाद बोला जो इस दावत मे आये हा हर दा से जब प्रीतम सिंह ओर नेता विपक्ष इन्दिरा ह्रदयेश। के ना आने का कारण पूछा तो वो बोल उठे की रही होगी कोई मजबूरिया जो वो ना पहुच पाए हम तो उनके लिए आज ही नही आगे भी इंतज़ार करेंगे जब पत्रकारो ने कहा कि अब तो इन्दिरा ओर प्रीतम एक गुट के हो गए है और आपको किनारे लगाने की साजिश चल रही है तो जवाब में हर दा बोले कि हम तो पहले से ही किनारे पर है पर जो बीच मैं होता है या इधर उधर होता है उसको ही खतरा ज्यादा होता है वाक्य मै हरीश रावत की राजनीति को खत्म खुद हरीश रावत कर सकते है कोई दूसरा नही ओर अब ये तय है कि आने वाले दिनो मे काग्रेस मे फिर से बूढ़े शेेर की दहाड़ सुनाई देगी

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