महज़ छह मिनट में करिए देवभूमि के दर्शन ।जल्द आ रहा है जय जय हो देवभूमि , ये तो बस ट्रेलर है।


उत्तराखंड मैं त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ओर स्वयं खुद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत उत्तराखंड की बोली भाषा , रीति रिवाज़, हमारी संस्कृति, पाराम्परिक लोक नृत्य, सालो साल से लगते आ रहे मैले, ओर पहाड़ की फसलो के साथ ऐतिहासिक धरोहर को सजोय रखने मे अब तक सबसे ओर अपने उत्तराखंड की जिससे से भी पहचान है उसे आगे बढ़ावा देने का काम लगातार कर रहे है।


मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलहाकार रमेश भट्ट जी से जब भी बात चीत हुईं तो वे यही कहते नज़र आये कि
सर (मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत) जी का विज़न बड़ा है और वे पहाड़ के उन सभी दर्द को जानते है महसूस करते है जिसकी वजह से पहाड़ विकास मैं पिछड़ा रहा, कही बार सर से जब बातचीत होती है तो वे कहते है कि आज ये उत्तराखंड साल 2000 हज़ार वाला उत्तराखंड नही रहा है 20 साल आगे निकल चुका है। आज के उत्तराखंड मैं ओर साल 2000 वाले उत्तराखंड मैं बहुत फर्क आ चुका है दरसल मैं राज्य गठन के दौरान पहली उत्तराखंड की सरकार ने पहाड़ की बुनियादी जरूरतों और दुर्गामी सोच के साथ काम नही किया जिसका खामियाजा पहाड़ भुगता आया है अब अटल जी के द्वारा दिये गए राज्य को मोदी जी सवार रहे है इसलिए पिछली सरकारों की की गई गलतियों को सुधारने मैं समय तो लगता है जिसे सुधार कर अब हम तेज़ी से आगे बढ़ रहे है।ओर भविष्य मैं सुखद परिमाण सामने भी होंगे।
इसी बीच आज फिर बोलता उत्तराखंड की टीम से अचानक जब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के मीडिया सलहाकार रमेश भट्ट जी से मुलाकात हुई तो बातों ही बातों मैं मालूम चला कि
राज्य के लोकगीतों की श्रेणी में प्रथम बार एक ऐसा गीत नए रूप में जल्द लॉन्च होने जा रहा है जिसमें देश विदेश को संपूर्ण उत्तराखंड के दर्शन हो जाएंगे।


ओर इस गीत का टाइटल भी फाइनल हो चुका है जो ‘जय जय हो देवभूमि’ है ।उन्होंने बताया कि
उत्तराखंड के मशहूर लोकगायक स्वर्गीय गोपाल बाबू गोस्वामी द्वारा रचित इस गीत को नए सुर दिए गए है , जब हमने पूछा कि ये नए स्वर किसने दिए है नरेंद्र सिंह नेगी जी ने या किसी ओर ने तो वे मुस्कुरा गए और बोले मेरा फेसबुक चेक कीजिये उसमे डाला हुवा है कुछ गीत का अंश ।

हमने भी तपाक से फिर खड़े खड़े ही मोबाइल निकाला और रेमश भट्ट जी का फेसबुक खोला तो सब कुछ समझ मैं आ गया था जी हां क्योंकि इस गीत को नए स्वर देने वाले कोई और नही बल्कि खुद रमेश भट्ट ही है । यानी कि वरिष्ठ टीवी पत्रकार रहे ओर वर्तमान में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के मीडिया सलाहकार रमेश भट्ट ।
जब हम इस गीत का वीडियो ट्रेलर रमेश भट्ट की फेसबुक वॉल पर देख रहे थे तो उस समय तक हजारों की तादाद में इसे लोगों भी देख चुके थे।
फिर बोलता उत्तराखंड की टीम के मन मे कही सवाल जन्म ले चुके थे जिनका जवाब रमेश भट्ट से हम लेने को बेताब थे ।
सबसे पहले हमने पूछा कि आखिर इस गीत मैं खास क्या है भट्ट जी तो वे बोले – कि इस
गीत में हमारे देवभूमि उत्तराखंड के अध्यात्म, धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन के साथ साथ संपूर्ण उत्तराखंड के सौंदर्य को बहुत अच्छे से दर्शाया गया है।
तभी मेरे सहयोगी बीच मे बोले पढ़ें कि अभी पहली ही बार में इसके फुटेज देखने और गीत सुनने में ये दिलो दिमाग पर छा जाने जैसा लग रहा है। तब मैने अपने सहयोगी से बोला कि आप चुप रहे सवाल रमेश भट्ट जी से किया है हमने आप से नही तब रमेश भट्ट के चेहरे पर धीमी मुस्कान थी और वे बोले कि इस गीत मैं उत्तराखंड के गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर का बेहतरीन चित्रण है
साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के चारों धामों के साथ साथ इस गीत में तमाम छोटे-बड़े प्रसिद्ध सिद्धपीठों और पर्यावरणीय संतुलन का भी का बेहतरीन चित्रण है ओर इस गीत में उच्च हिमालयी क्षेत्र और यहां के जीवन के अदभुत दर्शन होते हैं आप थोड़ा सा इंतज़ार करे जल्द ही ये पूरा गीत आपके सामने होगा।
आपको बता दे कि जानकारी अनुसार
नए स्वर नए आकर्षक फुटेज के साथ संपूर्ण दर्शन उत्तराखंड के सिर्फ 6 मिनट में देश दुनिया इस गीत के माध्य्म से करते दिखाई देगी।
ओर सबसे ख़ास बात ये है कि ‘जय जय हो देवभूमि, जय जय हो मातृभूमि’ ये गीत प्रवासी पर्वतीय लोगों को भी रिवर्स पलायन का संदेश देता दिखाई दे रहा है तो पूरे विश्व को भारत बाल देवभूमि उत्तराखंड के अदभुत दर्शन भी कराता है।
इस गीत में संगीत संजय कुमोला ने दिया है जबकि इसका वीडियो निर्देशन अरविंद नेगी ने किया है।
ओर सबसे बड़ी बात ये है कि इस गीत में खुद अभिनय भी रमेश भट्ट जी ने किया है।
बोलता उत्तराखंड पर रमेश भट्ट बोले कि जब भी सौभाग्य मिला मैं मंचों से उत्तराखंड के लोकगीत को सालो से गाता आया हूं,
ओर ये पहला मौका मेरे लिए है जब इस ख़ास गीत को प्रोफेशनल तरीके से मैने स्टूडियो में गाया है और अब इसका फिल्मांकन कर संगीत इंडस्ट्री में लॉन्च किया जा रहा है रमेश भट्ट बोले कि सबसे पहले मेरी श्रद्धांजिल स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी जी को। वे हमेशा मेरे प्रेरणाश्रोत रहे हैं।
ओर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मीरा गोस्वामी जी का भी बहुत बहुत आभार, जिन्होंने मुझे इस रचना को गाने की अनुमति दी। मैं गीत के फिल्मांकन और सहयोग के लिए पटवाल फिल्म्स का भी कृतज्ञ हूं। मुझेबभरोसा है आप सबको ये गीत पसंद आएगा।
बहराल बोलता उत्तराखंड की टीम
ने 19 साल के उत्तराखंड मैं पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय नित्यानंद स्वामी से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तक के कार्यकाल तक के  कही मीडिया सलहाकार को देखा समझा ओर आज रमेश भट्ट जी को भी देख रहे है ।


बस इतना कहता है बोलता उत्तराखंड कि जिस मेहनत , लगन, निष्ठा , एनर्जी , क्वालटी, मिशन,
शालीनता, विवेकपूर्ण तरीके से अपने हर कार्य को रमेश भट्ट जी पूर्ण करते है ऐसा आज तक हमने कोई सलहाकार नही देखा।
ओर स्याद यही वजह है कि रमेश भट्ट अभी छोटी उम्र मैं ही युवाओं के बीच
लोकप्रिय है ।


बोलता उत्तराखंड की तरफ से रमेश भट्ट जी को बहुत बहुत सुभकामनाये।

मैंने पहली बार अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड का गीत गाया है। गीत में विश्व को सम्पूर्ण उत्तराखंड के दर्शन (आध्यात्मिक और…

Posted by बोलता उत्तराखंड़ on Wednesday, December 11, 2019

 


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