राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी का नाम चर्चा में जल्द मिलेगी राज्य को खुशखबरी!

ईमानदार छवि के नेता और राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी का नाम राज्य मै त्रिवेन्द्र सरकार बनने से पहले भी खूब चर्चाओं मे रहा कि बलूनी के सर राज्य का ताज सज सकता है और उसके बाद जब राज्य मे बीजेपी ने प्रचण्ड बहुमत से जीत हासिल की तब भी ये माना जाने लगा कि अनिल बलूनी को राज्य की कमान मिल सकती है लेकिन फिर बीजेपी हाईकामान ने त्रिवेन्द्र रावत को राज्य की कमान दी कुछ बीजेपी के कुनबे के बड़े नेता ये बात बद कमरों में कहते भी  है  की त्रिवेन्द्र रावत को मुख्यमंत्री बनवाने  मे अनिल बलूनी का महत्वपूर्ण रोल रहा इसके बाद अनिल बलूनी को राज्य से ही राज्य सभा सांसद बना दिया गया बलूनी ने राज्य सभा सांसद बनते ही अपने कर्तव्य , वादो को तेज रफ्तार के साथ पूरा करना भी शुरू कर दिया है बलूनी अपनी मेहनत और ईमानदारी और राज्य के प्रति लगाव के कारण लगातार आगे बढ़ रहे है ना की वंशवाद के सहारे क्योकि उनके परिवार से ऐसा कोई नही बलूनी सिर्फ मेहनत करने और जितना जरूरी है उतना ही बोलने मे विस्वास रखते है                             
ना राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी लच्छेदार बातें करते है ओर ना ही किसी की बुराई हा काम को लेकर विकास को लेकर वो अक्सर विपक्ष को आइना दिखाने का काम जरूर करते है
आपको बता दे कि अनिल बलूनी शांत स्वभाव के हैं, वो विचारों में मग्न रहते हैं. ओर हर वह शब्द को नाप-तौल कर बोलना उनकी सबसे बड़ी खूबियो मे शामिल है फिर चाहे बोलने की अगर बात हो तो सार्वजनिक या निजी रूप से सब कुछ नाप तोल कर बोला जाता है                     
ये नेता ना दिखावा करता है और ना लंबी-चौड़ी बयानबाजी जो आपने हाल ही देख ही लिया होगा कि किस तरह मिलने वाली मत्वपूर्ण सुरक्षा को भी वापस कर दिया राज्य सभा सांसद बनने के बाद का अपना किया हुआ वादा यानी एक महीने का पूरा वेतन दान कर दिया जितना बोलता उत्तराखण्ड अनिल बलूनी को जानता है वो अपने सहयोगियों से बात करते हुए भी वह अपने शब्दों को नाप तोल कर बोलते है कहते है ओर उनको जानने वाले या उनके परिचित लोग सोचते रह जाते है कि आज तो बलूनी जी बहुत कुछ बोलेगे पर उनको सुनने को कुछ मिलता नही                                  
राजनीति मे बलूनी 26 साल की उम्र में पहुचे अब वह 46 साल के हैं और उन्होंने राजनीति में लंबा सफर तय किया है. वो सालो के हिसांब से नही बल्की दूरी के हिसाब से वो बस भागते रहे मंजिल की ओर जो वादा खुद से किया है उस ओर आपको बता दे कि जब वो पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे थे तब से ही वो छात्र राजनीति में कूद गए थे और दिल्ली मे वो संघ परिवार के दफ्तरों के आसपास घूमते-रहते थे कही सघ नेता उनसे मिलते थे और विचारों का आदान प्रदान भी होता था इसी बीच वहीं संघ के प्रख्यात नेता श्री सुंदर सिंह भंडारी उन्हें पसंद करने लगे. जब सुंदर सिंह भंडारी को बिहार का राज्यपाल बनाया गया तो वह बलूनी को अपना ओएसड बनाकर अपने साथ पटना ले गए. उस दौर मे लालू के कुख्यात गुंडाराज का बोलबाला था I
बिहार के बाद वह गांधीनगर जा पहुंचे, भंडारी के पीछे-पीछे ही, जिन्हें गुजरात का राज्यपाल बनाया गया था. ओर इसके करीब 28 महीने बाद बतौर सीएम गुजरात में नरेंद्र मोदी का दौर शुरू हुआ. अनिल बलूनी कभी भंडारी के काम से तो कभी संघ के काम से, साबरमती शहर की सड़कों पर खूब पसीना बहाते जिसके बाद वो लगभग 2002 में वह देहरादून आगये तब तक राज्य को बने 2 साल हो चुके थे             
अब बारी चुनाव के मैदान मे कूदने की थी और वो कूद भी गए महज 26 साल की उम्र मे उन्होंने कोटद्वार सीट से चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल कर दिया.
लेकिन स्याद उस दौर मे बलूनी को पहला झटका लगना तय था जब उनका नामांकन अवैध घोषित कर दिया गया ओर वो इस मैदान मे बिना घुसे ही आउट हो गए झटका भी लगा बलूनी को ओर उंभरने मे समय भी राजनीति के खिलाड़ी कहते है कि उस दौर मे
मेजर जरनल पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खडूड़ी ने बलूनी के अरमानों पर अपने किसी चहेते के लिए पानी फेर दिया जो राजनीति मे अब आम बात हो
गयी है और मत्त्वपूर्ण भी जो इस गम मे घुस गया वी फिर ना निकल सका और जिंसने फिर से आगे बढ़ने का सकल्प लिया वो आगे जरूर बड़ा ओर यही अनिल बलूनी ने भी किया बिना किसी पर आरोप लगाए बगैर वो फिर चल दिये आगे बढ़ने के लिए वो कहते है ना कि जो घाट घाट का पानी पीता है जिसको कमजोर करने के लिए प्रहार किया जाता है वो इन सब से बहुत कुछ सिख कर फिर से आगे बढ़ता है और यही काम बलूनी कर रहे थे कुछ ना कुछ नया सिख कर आगे बढ़ रहे थे हालातो से लड़ रहे थे
अपमानों का घुट पी पी कर भी चुप थे। समय आगे बढ़ रहा था   
ओर उस दोरान मुख्यमंत्री बने रमेश पोखरियाल निशंक ने अनिल बलूनी की काबलियत समझकर उनको वन और पर्यावरण कार्य बल का प्रभारी बना दिया. फिर यह से अनिल बलूनी ने वो काम किया जो मीडिया की सुर्खियां बनने लगी
अनिल बलूनी उत्तराखंड के जंगलों में सियासत के गुर खुब सीखे हैं. ओर इसी वजह से वो अपने आज के हर काम मे परफेक्ट है ओर नतीजे आपके सामने है। बोलता है उत्तराखण्ड कि अब संसद में निष्क्रिय उत्तराखंडी नेताओं को अनिल बलूनी जगाने का काम भी कर रहे है भाजपा के मीडिया विभाग के राष्ट्रीय प्रमुख ओर राज्य के राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी अपनी लगन, कार्य और व्यवहार कुशलता से ऊंचाईयों तक पहुंचे है जब बलूनी का चयन राज्य सभा के लिए किया गया था तब भाजपा हाईकमान ने उत्तराखंड के उन नेताओं को भी संदेश दे दिया है था कि अब उम्रदारज हो जाने मात्र से ही पद नहीं मिलेगा। इसके लिए काम करना होगा। जो बलूनी कर के दिखा भी रहे है अक्सर पिछले सालों की बात की जाए तो संसद यह हर सदन में जहां भी उत्तराखंड का नेता चुना गया ओर वो अपने राज्य के मुद्दों के लिए कितना सक्रिय रहे और उनके मुद्दे उठने के तरीकों को भी राज्य की जनता ने देखा है पर वो कुछ खास ना कर पाए    
ज्यादा दूर नही जाते राजबब्बर को ही देख लो शायद ही उत्तराखंड का कोई मुद्दा उठाया होगा। वे तो उत्तर प्रदेश के हैं, लेकिन लोकसभा के बाद राज्यसभा की शोभा बढ़ा रहे प्रदीप टमटा तो लोकसभा में भी सक्रिय नहीं दिखते थे। लेकिन आज राज्य की जनता देख रही है कि अनिल बलूनी राज्य के हितों के लिये राज्य के विकास के लिए लगातार सक्रिय है और उसी का नतीजा है कि बलूनी जो वादा करते है उसे जल्द पूरा करने के अधिक समय नही लेते बोलता उत्तराखंण्ड आपको बता रहा है कि दिल्ली के मयूर विहार क्षेत्र में पले-बढ़े बलूनी ने शुरूआती दौर में पत्रकारिता भी की। हिमालय दर्पण, दैनिक जागरण आदि अखबारों में रिपोर्टिंग में रहे कुल मिलाकर जमीन से उठने वाले नेता ने आज भी जमीन नही छोड़ी है कहने का मतलब है कि वो जमीन पर धरातल पर जब तक अपने द्वारा किये जा रहे प्रयास मे सफलता हासिल नही कर लेते तब तक वो उस काम को छोड़कर दूसरी तरफ नही देखते ओर यही बीड़ा अब अनिल बलूनी ने उठाया है उत्तराखण्ड राज्य को न्यू उत्तराखण्ड राज्य बनाने का सकल्प लिया जिसके चलते बलूनी जो बोल रहे है वो उस काम को पूरा करने मे जुट गए है                                                                           अब राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी गढ़वाल ओर कुमाऊँ की जनता को जल्द बड़ा तोफा देने जा रहे आपको बता दे कि गढ़वाल ओर कुमाऊँ के बीच यात्रियो की सुविधा के लिए काठगोदाम ओर देहरादून के बीच इंटरसिटी ट्रेन सेवा चलाये जाने की जो माग अनिल बलूनी ने की थी उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ये सौगात उत्तराखंण्ड राज्य को मिलने जा रही है आपको बता दे जी राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से बात कर काठगोदाम ओर दूंन के बीच शताब्दी जैसी ट्रेन चलाने की बात रखी थी ओर उन्हें बलूनी ने माग पत्र सोपा था बोलता उत्तराखण्ड से बात करते समय अनिल बलूनी ने कहा कि रेलवे बोर्ड को बोला गया है कि काठगोदाम से सुबह पौने पांच बजे देहरादून के लिए ट्रेन चलाई जाए जो सुबह लगभग 10 बजे दूंन आजाये इसका फायदा ये होगा कि नोकरी पेशा करने वाले ओर व्यापारियो को इसका बड़ा लाभ मिल सकेगा साथ ही अगर पहाड़ से किसी बीमार लोगो को भी अगर दूंन मैं इलाज़ कराना है तो उनके लिए भी लाभ है इसके साथ ही देहादून से काठगोदाम की वापसी का समय ऐसा हो ताकि ये ट्रेन रात 9 बजे से 11 बजे तक वापस काठगोदाम पहुच जाए और बलूनी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है 15 अगस्त से पहले राज्य वासियों को ये खुशखबरी मिल सकती है आपको ये भी बता दे कि बड़े समय से देहरादून ओर नैनीताल को जोड़ने के लिए एक अछी ट्रेन की माग चल रही थी जिसको राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी ने समझा और परिणाम जल्द जनता के सामने होंगे इससे पर्यटन प्रदेश मे आने वाले पर्यटकों को लाभ मिलेगा उनको अछी ओर बेहतर सुविधाएं मिलेगी और राज्य के राजस्व मे जहा इजाफा होगा वही पर्यटन प्रदेश का सपना भी साकार होगा
इसके साथ ही अनिल बलूनी लगातार पिछले समय से प्रयास कर रहे थे कि राज्य के विकास के लिए केंद सरकार से महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए अलग अलग मंद मे राज्य के अलग अलग जगह के लिए बजट की व्यवस्था हो जाये तो उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द अनिल बलूनी के प्रयासों से राज्य को केंद सरकार विकास की योजनाओं के लिए बजट देगी पीएम मोदी का उत्तराखण्ड से गहरा लगाव ही है कि पीएम मोदी राज्य को न्यू उत्तराखण्ड बनता देखना चाहते है और यही बात राज्य सभा सांसद बनते ही बलूनी ने कहा था कि आप् देखते जाइये हम पीएम मोदी जी आशीष से केंद्र सरकार के पूरे सहयोग उत्तराखण्ड को न्यू उत्तरखण्ड बनायेगे जिसमे स्वास्थ्य , शिक्षा, रोजगार ,स्वरोजगार , हर गाँव गाँव तक सड़क एक सुनियोजित तरिके से राज्य का विकास जिसमे पहाड़ जिलो के लिए अलग नीतियां ओर मानक ओर मैदानी स्थानों के लिए जनसख्या के हिसाब से विकास पर्यावरण का ध्यान रखते हुए विकास की नई लाइन खिंचते हुए न्यू उत्तराखण्ड राज्य बनेगा जिसमे सभी नई तकनीकों का लाभ राज्य को मिलेगा बलूनी कहते है कि बस आप देखते जाइये आपको आगे आगे राज्य मे विकास दिखाई देगा और पहाड़ का जो दर्द है वो भी कम होगा क्योकि पीएम मोदी जी का सहयोग केंद सरकार का पूरा सहयोग राज्य को मिल रहा है इसलिए एक दिन आपको न्यू उत्तराखंड राज्य देखने को मिलेगा।

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