राज्य मंत्री रेखा आर्य अगर राज्य की स्वास्थ्य मंत्री होती तो तब क्या होता!

राज्य की राज्य मंत्री रेखा आर्य जब से मंत्री बनी है वो तब से ही पूरी निष्ठा के साथ अपने काम को अंजाम देते जनता की उम्मीद पर खरा उतर रही है फिर बात उनके द्वारा छेड़े गए हर अभियान की हो या मुहिम की उन्होंने अपने काम के आगे राज्य के सभी मंत्री को पीछे छोड़ दिया है मंत्री रेखा आर्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य का देखा सपना पूरा करने के लिए लगातार उत्तराखण्ड मे जनता के बीच जाकर मेहनत करती नज़र आती है रेखा आर्य कहती है कि महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के मामले मे उत्तराखण्ड बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है, माहवारी के दिनों को महिलाओं और किशोरियों को एक सामान्य दिन की तरह से ही लेना चाहिये किंतु निजी स्वच्छता पर ज़रूर ध्यान देना चाहिये, इसके लिये प्रदेश सरकार पूरी तरह संकल्पबद्ध है और हमने इसके लिये बहुत कम मूल्य पर सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराये हैं” रुड़की के शेरपुर ग्राम में सैनिटरी नैपकिन यूनिट के उद्घाटन के मौके पर उन्होंने महिलाओं से आवहान किया कि वो माहवारी के दिनों में सैनिटरी नैपकिन का प्रयोग अवश्य करें ताकि वो सर्वाइकल कैंसर जैसी बीमारियों से बच सकें |” .   
प्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराये जा रहे हैं, लेकिन इस अभियान में सामान्य नागरिकों को भी अपना योगदान देना होगा |
ताकि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का महिलाओं की स्वच्छता और स्वस्थता का अभियान सफल होगा | 
अब बोलता है उत्तराखंड़ की जब राज्य मे आधी आबादी महिलाओं की है तो फिर ये राजनीतिक दल महिलाओं को जायद टिकट क्यो नही देते ओर सिर्फ नाम के लिए एक दो महिलाओं को टिकट देकर चुप   हो  जाते है क्या आपने अभी तक किसी महिला मंत्री पर आरोप लगते सुना है उनके कामो को लेकर मतलब घोटाला नही सुना होगा ओर जो सुना होगा वो राजनीति से प्रेरित होगा उदहारण ले लो क्या आज तक इंदिरा ह्रदयेश पर कोई आरोप लगा घोटाले का , विजया बढ़थवाल पर , अम्रता रावत पर ,ऋतु खडूडी पर , रेखा आर्य पर जवाब आप जानते है पर यहा की पुरुष पूर्व मंत्री पर या पूर्व मुख्यमंत्री पर क्या  आरोप नही लगे घोटालों के!  वो बात अलग है कि साबित नही हो पाए आज तक। इसलिए तो हम कह रहे है जी राज्य मे कम से कम दो से तीन। महिला मंत्री होनी चाइए ओर उनके पास मत्वपूर्ण विभाग भी जिस दिन ये काम हो जाएगा उस दिन राज्य के हालत और बेहतर होगे ओर अगर कुछ भी ना हुवा तो आधी आबादी मतलब महिलाओं के दिन तो अच्छे आ ही जायेगें पर ये तब हो जब महिलाओं को भी बराबरी का अधिकार राज्य मे मिलने लगे सर्फ बोलने से काम नही चलता यदि रेखा आर्य के पास कैबिनेट मंत्री का दर्ज होता तो वो ओर बेहतर काम कर सकती थी और बोलता उत्तराखंड़ को तो लगता है कि किसी महिला को ही राज्य का स्वास्थय मंत्री होना चाइए स्याद तब ही आधी आबादी से लेकर पहाड़ मे स्वास्थ्य सेवाओं मे ओर सुधार हो सके क्योकि एक महिला से बेहतर कोन जान पाएगा पहाड़ का दर्द और लाचार स्वास्थ्य व्यवस्था ओर वही उसको सुधारने का दम रखती है
यहा पर सोच बदलने की जरूरत है तो सोचो अब रेखा आर्य या कोई और महिला स्वास्थ्य मंत्री राज्य की होती तो क्या होता

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