राज्य के नोकरशाह बीजेपी के विधायको को किलसा रहे है तो विधानसभा अध्यक्ष को कुछ समझते ही नही !

डबल इज़न की सरकार मे सिर्फ मुख्य मंन्त्री त्रिवेन्द्र रावत को छोड़कर राज्य की अफसर शाही किसी की नही सुनती कही बार मुख्यमंत्री से लेकर विधानसभा अद्य्यक्ष तक बीजेपी के कही विधायक अपना दुखड़ा रो चुके है पर उसके बावजूद भी कुछ हल नही निकला इन लोगो का कहना है कि राज्य के अधिकारी ना तो विधायको का फोन उठाते है और ना उनसे ठीक से बात करते है यही नही इन बीजेपी के विधायकों की शिकायत रहती है कि ना तो ये अधिकारी उनके क्षेत्र मे समय पर विकास के काम काज को पूरा करते है और ना ही समय पर बजट रीलिज करते है ज़िस कारण जनता के आगे इन विधायकों को कही बार खरी खोटी भी सुननी पड़ती है । और उनकी डबल इज़न की सरकार को अब तो जनता लोग चिढ़ाने भी लगे है कि बताओ विधायक जी डबल इज़न के राज मे फलाना ये काम कब तक पूरा होगा और कितने समय तक जिससे विपक्ष को भी मौका मिल जाता है दो चार सवाल खड़े करने का । आपको बता दे कि इन सभी बातों को जानकर अधिकारियों के अड़ियल रवैये से परेशान विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा था जिसका जवाब अभी तक नही मिल पाया विधानसभा अध्यक्ष को। 
राज्य मे डबल इज़न की सरकार मे भी अगर अफसरशाही बेलगाम है या मनमौजी है और वो अपने सामने सबको बौना समझती है तो फिर ये इस राज्य का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है। अभी की ही बात ले लो जो विधानसभा अध्यक्ष के पत्र से जुड़ी बात है आपको बता दूं कि कुछ दिन पहले विधायकों की अनदेखी को लेकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा था लेकिन प्रेमचंद अग्रवाल को इस पत्र का जवाब अब तक नहीं मिला है. 
इस पत्र मे विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को लिखा था कि अधिकारियों द्वारा विधायकों के फोन न उठाने और अड़ियल रवैये को लेकर कड़ी आपत्ति जताई गयी थी. पत्र में विधानसभा अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को जल्द से जल्द जवाब देने के लिए कहा था लेकिन हैरानी की बात ये है कि अबतक मुख्य सचिव के दफ्तर से विधानसभा अध्यक्ष को कोई जवाब नहीं आया है. पत्र में मुख्य सचिव से सभी अधिकारियों को विधायकों का फोन उठाने को लेकर एक एडवाइजरी जारी करने का अनुरोध किया गया था. 
आपको ये भी बता दे कि ये पत्र तब लिखने की जरूरत पड़ी जब विधायक लगातार मुख्यमंत्री और विधानसा अध्यक्ष से शिकायत कर रहे थे कि उनकी कोई सुनता ही नहीं है. हैरानी की बात ये है कि मुख्य सचिव के दफ्तर से विधानसभा अध्यक्ष के पत्र का जवाब अभी तक नहीं आया है.
: बोलता है उत्तराखंड की जब राज्य के अधिकारी और वो कुछ नोकरशाह सरकार मे शामिल विधायको की मंत्रियो की ही सुनने को तैयार नही तो फिर आम जनता कहा रह गई भाई और वो लोग कहा रह गए जो आये दिन अपने अपने मुद्दों को लेकर सड़क पर रह्ते है धरना देने के लिए। क्योंकि जब ये नोकरशाह ठीक से कोई बात का हल नही निकलाते ओर मामले को ओर लटका देते है जिसके कारण राज्य के कही विभाग सड़को पर देखे जाते है और तब बनता है ये उत्तराखंड हड़ताली प्रदेश ।इन अधिकारियों को तो बीच मे कुछ समय पहले सत्ता से जुड़े विधायको ने सचिवालय मे खूब खरी खोटी भी सुनाई थी ओर बात हाथ तक उठाने की आ गई थी पर जैसे तैसे मामले को शांत कर दिया गया था।। कुछ विधायको का कहना है कि राज्य के कुछ अफसर पहाड़ विरोधी है इसलिए वो पहाड़ के विकास के काम काज मे कोई न कोई अडंगा डालते ही रहते है तो कोई विधायक ये तक कहता है की अधिकारी यो की अगर सम्पति की जांच ही जाए तो ठीक से तो मालूम ही जाएगा कि इन्होंने कितना राज्य को लूट लिया है।
बहराल हम तो सिर्फ यही कहेंगे कि अगर त्रिवेन्द्र सरकार मे भी ये अधिकारी बेलगाम हो रहे है मन्त्री से लेकर विधायक तक के फोन नही उठाते ओर कुछ भी ठीक से बात नही करते तो ये सबसे जायदा खुद दुखदाई डबल इज़न की सरकार के लिए है बाकी जनता का क्या है वो तो कल भी दुखी थी और आज भी है । और अपने अपने दुख का ठीकरा हर बार वो चुनाव मे फोड़ भी देती है ।

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