राजकीय शिक्षक संघ सरकार से नाराज़ करेगे भूख हड़ताल

जिस राज्य का शिक्षक सड़को पर उस राज्य का आलम क्या होगा ये नारा कोई नया नही है आये दिन जब जब शिक्षक को सरकार के खिलाफ या अपनी मागे मनवाने के लिए धरना देते समय या सड़क पर जुलूस निकालते समय ये नारा जोर जोर से बोला जाता है    और अब फिर ये नारा बुलंद होने वाला है आपको बता दे कि शिक्षा मंत्री अरविंद पांडये साफ कह चुके है कि सरकार झुकेगी नही उनकी मागे पहले भी पूरी की ओर आगे भी करेगे पर हम हड़ताल के आगे झूकने वाले नही । दूसरी तरफ जानकारी मिल रही है सुत्रो के आधार पर की शिक्षकों में दो गुटों बन गए है जिससे शिक्षक को आपसी शक़्ति कम हो रही है।    आपको बता दे कि अपनी 18 सूत्रीय मांगों को लेकर 21 जुलाई से शिक्षा निदेशालय पर क्रमिक अनशन पर बैठे राजकीय शिक्षक संघ ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। गौरतलब है कि स्कूल खुलने के महज कुछ दिन बाद शिक्षक नेताओं का आंदोलन शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय को सख्त नागवार गुजरा। बीते हफ्तेभर से क्रमिक अनशन कर रहे राजकीय शिक्षक संघ के शीर्ष नेताओं को शिक्षा मंत्री के निर्देश पर सचिव डॉ भूपिंदर कौर औलख ने सुविधाजनक क्षेत्रों से हटाकर दूरदराज पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया था। संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राम सिंह चैहान को देहरादून से हटाकर टिहरी महामंत्री डॉ सोहन सिंह माजिला को देहरादून से हटाकर नैनीताल जिले में तैनात किया गया है। वहीं चमोली जिले में तैनात संघ के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी को जिले में ही दूरस्थ राजकीय इंटर कॉलेज में भेजा गया है। इस कार्रवाई इसे शिक्षक संगठन में हड़कंप मच गया है। 
आपको बता दे कि संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के दर पर दस्तक दी, लेकिन उन्हें मायूसी ही हाथ लगी है। मुख्यमंत्री ने मांगों पर कार्यवाही का आश्वासन तो दिया, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि शिक्षक नेताओं को स्थानांतरण आदेश का पालन करना होगा। जिसके बाद शिक्षक संघ ने आंदोलन को और तेज करने की घोषण कर दी है।
कुछ सूत्र ये भी बोल रहे है कि
शिक्षकों की छुट्टियों का ब्यौरा तलब किया जा चुका है संघ के महामंत्री डाॅ सोहन सिंह माजिला, गढ़वाल मंडल संरक्षक शिव सिंह नेगी, की छुट्टियों में गड़बड़ी की बात सामने आ रही है। सूत्रों के मुताबिक धरने में शामिल अधिकांश शिक्षक निजी कार्य के नाम पर अवकाश लेकर आ रहें हैं और निदेशालय में धरने पर बैंठे हैं। आपको ये भी बता दे कि
संघ के पूर्व अध्यक्ष राम सिंह चोहान ने अपने फेसबुक पेज पर संघ की वर्तमान कार्यकारिणी के कुछ नेताओं पर अपने साथ साजिश का आरोप लगाया है।
तो कुछ टीचर के
तबादलों के मानक को लेकर त्रिवेन्द्र सरकार ने खुद को कठघरे में खड़ा भी कर दिया है। तबादला एक्ट में छूट के बावजूद शिक्षक संघ अध्यक्ष और महामंत्री का तबादला कर दिया है लेकिन भाजपा और आरएसएस की पृष्ठभूमि वाले कई शिक्षकों को खुद हटवाकर गैर शैक्षिक कामों में लगााया हुआ है। शिकायत एवं सुझाव प्रकोष्ठ, एससीईआरटी और रूड़की, पौड़ी और टिहरी डायट में भी कई शिक्षकों को तैनात किया गया है।
शिक्षा मंत्री उत्तराखंड अरविंद पांडेय का कहना है कि शिक्षक संघ की उचित मांगों को लेकर सरकार पहले से ही गंभीर है, कई मांगों मानी गई हैं, कई पर कार्रवाई की जा रही है। सरकार विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने में जुटी है, ऐसे में आंदोलन के जरिये विद्यालयों में पढ़ाई के माहौल को खराब करने की कोशिश स्वीकार नहीं होगी। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
तो वही
राजकीय शिक्षक संघ उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष कमल किशोर डिमरी का कहना है कि क्या मांगा था और क्या मिला, शिक्षकों की मांगों को लेकर सरकार और विभाग गंभीर नहीं हैं ओर जानकारी मिली है। कि संघ आंदोलन के पूर्व घोषित कार्यक्रम को जारी रखेगा। बहराल राज्य के कुछ शिक्षक अक्सर खुद को राज्य मे उपेक्षा का शिकार समझते है ओर अधिकांश टीचर का मनाना है कि सरकार किसी की भी राज्य मे रही हो पर आज तक मजबूत तबादला एक्ट कोई नही लेकर आया जिससे इंसाफ सबके साथ हो सके फिलहाल बनते बिगड़ते समीकरण बोल रहे है कि शिक्षकों का नारज होना हर बार राज्य सरकारों पर ही भारी पड़ा है और इस बार अगर बात मिलकर बैठ कर नही जल्द सुलझाई तो आगे शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय के सर दर्द का सबसे बड़ा कारण ये विभाग बनने वाला है

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