रैन सेल्टर ओर शौचालयो की माग है पर्यटको की !

बोलता उत्तराखण्ड आज आपको जोशीमठ ले जा रहा जो पर्यटकों के लिए धरती का स्वर्ग है तो वैज्ञानिकों के लिए शोध का केंन्द्र बना हुआ है जी हा जिसका नाम है फूलों की घाटी। ओर ये नाम सुनकर एक आनंद की अनुभूति होती है आपको बता दे पिछले 30  दिनों में लभगग  1500  से अधिक पर्यटक इस वैली मे आये और यहां की सुंदरता को देख इसे कुदर का अनमोल खज़ाना कहने लगे । आपको ये भी बता दे कि अब 15जुलाई से 15 सितबंर तक विदेशी शैलानियों व शोधार्थियों का जमावडा इस घाटी मे रहेगा
विश्व धरोहर फूलो की घाटी अब धीरे-धीरे अपने यौवन की ओर लौट रही है। पाॅच सौ खूबसूरत पुष्पो की प्रजातियों की इस घाटी मे इन दिनो डेढ सौ किस्म के पुष्प खिले है। और अब 15जुलाई से 15 सितंबर के मध्य घाटी अपने पूरे यौवन पर रहेगी। .                           

  1. आपको बता दे कि साल 1982 मे फूलो की घाटी को राष्ट्रीय पार्क घोषित होने के बाद तथा साल 2005 मे विश्व धरोहर का दर्जा मिला बस तभी से इस घाटी मे लगातार प्रकृति प्रेमी देशी/विदेशी पर्यटको की आमद लगातार बढती ही जा रही है। साल आपदा वर्ष 2013-14 को छोड कर बात करे तो इस घाटी मे प्रतिवर्ष हजारो पर्यटक पंहुच रहे है। विदेशी पर्यटको की संख्या मे प्रतिवर्ष इजाफा हो रहा है    
    इस साल 1 जून को घाटी पर्यटको के लिए खोली गई और एक माह के इस अंतराल मे घाटी मे 1562भारतीय पर्यटक तो 44विदेशी पर्यटक सैर करने के लिए पंहुचे। और इनसे फीस के रूप मे वन महकमे को अच्छा राजस्व भी प्राप्त हुआ।
    आपको बता दे कि विश्व धरोहर फूलो की घाटी मे इन दिनो जेरेनियम,पोंटेटिला ,एनीमून,हिमालयन सिल्वर ओरचिट, ब्लूपापी, थाइमस, कोबरालिली , हेरक्यूलियम, वाइल्ड रोज, आइटिस व वन ककडी सहित करीब डेढ सौ किस्म के फूल खिले है। फूलो की घाटी न केवल प्रकृति प्रेमी पर्यटको के लिए ब्लकि वनस्पति विज्ञान मे शोध करने वाले छात्रो व वैज्ञानिको के लिए भी शोध का केंद्र वन गया है। घाटी मे प्रतिवर्ष हजारो की संख्या मे देशी-विदेशी पर्यटको के साथ ही विश्व भर से वनस्पतिविज्ञान मे शोध करने वाले छात्र घाटी मे पंहुच रहे है।

प्रकृति प्रेमी पर्यटको के आवागमन से गोविंदघाट से घांघरियाॅ तक के ब्यवसायियों को भी अच्छा लाभ हो रहा है। गत वर्ष जब हेमकुंड साहिब पंहुचने वाले यात्रियो की संख्या कम रही तो फूलो की घाटी पंहुचे पर्यटको से भ्यॅूडार वैली के निवासियों को ब्यवसाय चला। वर्ष 2013 की आपदा से उबारने मे फूलो की घाटी भी मददगार साबित हुई। घाॅधरियॅा के होटल ब्यवसायी दिनेश झिक्वंण कहते है कि गत वर्ष हेमकुंड साहिब की यात्रा मे कमी रही और होटल तथा रेस्टोरेंट ब्यवसासियों ने 2013 से पूर्व की यात्रा को देखते हुए अक्टूबर महीने तक की सामग्री अपने प्रतिष्ठानो मे पंहुचा दी थी। लेकिन अचानक जुलाई से सितबंर तक फूलो की घाटी पंहुचने वाले पर्यटको मे कई गुना बृद्धि हुई और ब्यवसासियों की ब्यवसाय मे ठीक चला।
प्रकृति की अनमोल धरोहर फूलो की घाटी राष्ट्रीय पार्क भी बनी और विश्व धरोहर का दर्जा भी हासिल किया। लेकिन करीब 87वर्ग किमी0 मे फैली इस घाटी मे आज तक न तो एक अदद रैन सेल्टर है और ना ही शौचालय। घाटी पंहुचने वाले पर्यटक भी कई बार इसकी शिकायत कर चुके है। खासकर स्वच्छ भारत अभियान सचालित होने के बाद से पर्यटक घाटी मे शौचालय की मांग कर रहे है।
फूलो की घाटी राष्ट्रीय पार्क के रैंज आफीसर बृजमोहन भारती के अनुसार घाटी मे रैन सेल्टर निर्माण व शौचालयो के निमार्ण के लिए जिला धिकारी के माध्यम से पर्यटन विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आंवटन होते हुए विभाग स्वयं ही रैन सेल्टर व शौचालयो का निर्माण कराऐगा। अब बोलता है उत्तराखण्ड राज्य के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज जी आप से उम्मीद है कि आप जल्द ही मूलभूत सुविधाओं को वहां पर पूरा करवाएंगे इसके साथ ही इस कुदरत की इस विरासत को सजोय रखने के लिए जल्द ही बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लगे

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